स्विट्जरलैंड द्वारा मत्स्य सब्सिडी पर नए समझौते को औपचारिक रूप से स्वीकार

स्विट्जरलैंड द्वारा मत्स्य सब्सिडी पर नए समझौते को औपचारिक रूप से स्वीकार

हाल ही में स्विट्जरलैंड मत्स्य सब्सिडी पर नए समझौते को औपचारिक रूप से स्वीकार करने वाला विश्व व्यापार संगठन (WTO) का पहला सदस्य बन गया है।

  • यह समझौता हानिकारक सब्सिडियों को रोकने के लिए नए बाध्यकारी व बहुपक्षीय नियम निर्धारित करता है हानिकारक सब्सिडियां दुनिया के मत्स्य भंडार में हो रही व्यापक गिरावट का एक प्रमुख कारण हैं।
  • विश्व के एक-तिहाई से अधिक वैश्विक मत्स्य भंडार में जैविक रूप से असंधारणीय तरीके से मत्स्यन किया जाता है।
  • यह पर्यावरण पर ध्यान केंद्रित करने वाला विश्व व्यापार संगठन का पहला समझौता है। साथ ही, WTO की स्थापना के बाद से इस संगठन का यह केवल दूसरा समझौता है ।
  • इस समझौते को जेनेवा में आयोजित विश्व व्यापार संगठन के 12वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (जून 2022 ) में अपनाया गया था।
  • इस समझौते को प्रभावी बनाने के लिए विश्व व्यापार संगठन के दो-तिहाई सदस्यों की स्वीकृति आवश्यक है ।

समझौते की मुख्य विशेषताएं

  • यह समझौता अवैध, अप्रतिबंधित और अनियमित (Illegal, Unreported and Unregulated -IUU) मत्स्यन के लिए सब्सिडी प्रदान करने पर प्रतिबंध लगाता है।
  • साथ ही, यह अत्यधिक दोहन कर लिए गए मत्स्य भंडार में मत्स्यन और खुले समुद्र में बिना-विनियमन के मछली पकड़ने पर दी जा रही सब्सिडियों को भी प्रतिबंधित करता है।
  • यह विकासशील और अल्प-विकसित देशों (LDCs) की जरूरतों को भी ध्यान में रखता है। उन्हें समझौते को लागू करने में मदद करने के लिए उन्हें तकनीकी सहायता प्रदान करने और उनकी क्षमता का निर्माण करने हेतु एक कोष की स्थापना का प्रावधान करता है।
  • हाल ही में, यूरोपीय संघ ने इस कोष के लिए 1 मिलियन यूरो देने की प्रतिबद्धता प्रकट की है।
  • WTO के सदस्यों पर अपने पोत या ऑपरेटर को सब्सिडी देने पर कोई प्रतिबंध नहीं है, जब तक कि वह IUU गतिविधियों में शामिल नहीं होता है ।
  • मत्स्य भंडार की जैविक रूप से संधारणीय स्तर पर पुनर्स्थापना के लिए दी जा रही सब्सिडी पर कोई रोक नहीं है।

भारत का पक्ष

  • भारत का कहना है कि WTO के ऐसे सदस्य, जिन्होंने अतीत में भारी सब्सिडी प्रदान की है और बड़े पैमाने पर औद्योगिक स्तर पर मत्स्यन में लगे हुए हैं उन्हें सब्सिडियों को प्रतिबंधित करने हेतु अधिक दायित्व उठाना चाहिए।
  • इसके लिए इन देशों को ‘प्रदूषक द्वारा भुगतान सिद्धांत’ और ‘साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों का पालन करना चाहिए ।

स्रोत – डबल्यू. टी.ओ.

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