भौगोलिक संकेतक

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भौगोलिक संकेतक

तमिलनाडु के थेनी जिले के एक पंजीकृत किसान संगठन ने अंगूर की प्रजाति “कंबम पनीर थ्रचाइ”को भौगोलिक संकेतक (जीआई टैग)दिये जाने की मांग की है।

कंबम पनीर थ्रचाइअंगूर

  • “कंबम पनीर थ्रचाइ” अंगूर की एक प्रजाति है। इसकी प्रमुख विशेषता है कि इस अंगूर की खेती तमिलनाडु की कंबम घाटी में वर्ष पर्यंत होती रहती है।
  • चूंकि ये अंगूर एक वर्ष में दो मौसमों में उत्पादित होते हैं, इसलिए उनकी उपज और इनसे होने वाली आय उच्च है।कंबम घाटी में स्थित 10 गांवों में लगभग 2,000 एकड़ भूमि में अंगूर की इस विशेष किस्म की खेती की जाती है।
  • समान्यतः अंगूर की खेती भारत के अन्य भागों में जनवरी से अप्रैल के दौरान होती है।
  • कंबन घाटी में उपजाए जाने वाले अंगूर वाइन, शराब, स्प्रिट, जैम, डिब्बाबंद अंगूर का रस और किशमिश बनाने के लिए उपयुक्त हैं।

जीआई टैग किसे दिया जाता है?

  • जीआई टैग उन उत्पादों को दिया जाता है जो किसी क्षेत्र विशेष में पैदा होते हैं। इन उत्पादों की खासियत और प्रतिष्ठा उस क्षेत्र विशेष में पैदा होने की वजह से स्थापित होती है।
  • यह टैग मिलने के बाद संबंधित उत्पाद का नाम लेकर बाजार में किसी और चीज को बेचने पर पाबंदी लग जाती है।
  • डब्ल्यूटीओ समझौते के अनुच्छेद 22 (1) के तहत जीआई टैग को परिभाषित किया गया है।
  • औद्योगिक सम्पत्ति की सुरक्षा से सम्बंधित पहली संधि के अनुसार जीआई टैग को बौद्धिक सम्पदा अधिकारों का एक अवयव माना गया है।
  • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जीआई टैग के बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के व्यापार से सम्बंधित पहलुओं पर हुए समझौते से शाषित होता है। भारत में वह भौगोलिक वस्तु संकेतक (पंजीकरण एवं सुरक्षा) अधिनयम, 1999 से शाषित होता है।

भौगोलिक संकेतक पंजीयक:

  • भौगोलिक वस्तु संकेतक (पंजीकरण एवं सुरक्षा) अधिनयम, 1999 के अनुभाग-3 के उप-अनुभाग (1) के अंतर्गत पेटेंट, रूपांकन एवं व्यापार चिन्ह महानिदेशक की नियुक्ति जीआई टैग पंजीयक के रूप में की जाती है।
  • पंजीयक को उसके काम में सहयोग करने के लिए केंद्र सरकार समय-समय पर अधिकारियों को उपयुक्त पदनाम के साथ नियुक्त करती है।

स्रोत – द हिन्दू

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