भारत निर्वाचन आयोग के सदस्यों की नियुक्ति कॉलेजियम पद्धति से करवाने के सन्दर्भ में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर

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भारत निर्वाचन आयोग के सदस्यों की नियुक्ति कॉलेजियम पद्धति से करवाने के सन्दर्भ में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में मांग की गई, कि भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India- ECI) के सदस्यों की नियुक्ति करने के लिए एक स्वतंत्र कॉलेजियम का गठन किए जाए। विदित हो कि इस याचिका को ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ नाम के एक गैर-सरकारी संगठन ने दायर किया था ।

स्वतंत्र कॉलेजियम की आवश्यकता:

  • याचिका में कहा गया कि, सभी तरह से कार्यपालिका के द्वारा निर्वाचन आयोग के सदस्यों की नियुक्ति की वर्तमान प्रक्रिया, संविधान के अनुच्छेद-324 (2) के साथ मेल नहीं खाती है ,अर्थात यह संविधान से असंगत है।
  • कार्यपालिका द्वारा निर्वाचन आयोग के सदस्यों की नियुक्ति, अर्थात ‘अपनी पसंद के हिसाब से चुनाव करना’ (pick and choose), के आधार पर तो निर्वाचन आयोग, कार्यपालिका की मात्र एक सहयोगी संस्था बन कर रह जाता है।
  • लोकतंत्र हमारे देश की प्रमुख विशेषता है ,ऐसे में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित कराने तथा हमारे देश में स्वस्थ लोकतंत्र बनाए रखने के लिए, एक स्वतंत्र निर्वाचन आयोग, जो राजनीतिक और कार्यकारी हस्तक्षेप से मुक्त हो, की अति आवश्यकता हो जाती है।

विभिन्न विशेषज्ञ समितियों की सिफारिशें:

  • विधि आयोग की 255वीं रिपोर्ट में अनुशंसा की गई थी कि, निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति एक तीन-सदस्यीय कॉलेजियम के परामर्श पर राष्ट्रपति द्वारा की जानी चाहिए, और यह तीन-सदस्यीय कॉलेजियम प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता-प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश से मिलकर बना होना चाहिए।
  • जनवरी 2007 में द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग द्वारा चौथी रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। इसमें भी एक तटस्थ और स्वतंत्र कॉलेजियम के गठन की भी सिफारिश की गई थी। इसमें भी कहा गया की प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाला एक कॉलेजियम का गठन हो, जिसमें सदस्य की रूप में लोक सभा अध्यक्ष, लोक सभा में नेता-प्रतिपक्ष, विधि मंत्री और राज्यसभा के उपसभापति को सम्मिलित करना चाहिए ।
  • मई 1990 में डॉ. दिनेश गोस्वामी समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में सिफारिश किया कि, निर्वाचन आयोग में नियुक्ति हेतु, मुख्य न्यायाधीश और नेता प्रतिपक्ष जैसे तटस्थ अधिकारियों के साथ परामर्श किया जाना चाहिए ।
  • वर्ष 1975 में न्यायमूर्ति तारकुंडे समिति ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की, कि निर्वाचन आयोग के सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश से मिलकर बनी एक समिति के परामर्श से नियुक्त किया जाना चाहिए।

नियुक्ति की वर्तमान प्रणाली:

  • विदित हो कि, वर्तमान में संविधान में ‘मुख्य निर्वाचन आयुक्त’ एवं अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति हेतु कोई प्रक्रिया निर्धारित नहीं है।
  • परंपरा के अनुसार अभी ‘मुख्य निर्वाचन आयुक्त’ तथा अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति, प्रधान मंत्री की सिफारिश के आधार राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियों के अंतर्गत आती है।
  • संविधान के अनुच्छेद-324(5) के अनुसार, संसद को निर्वाचन आयोग की सेवा-शर्तों और कार्यकाल को विनियमित करने की शक्ति प्राप्त होती है।

स्रोत – इंडियन एक्सप्रेस

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