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भारत, जापान तथा ऑस्ट्रेलिया द्वारा सप्लाई चैन रेज़ीलिएंस इनीशिएटिव

भारत, जापान तथा ऑस्ट्रेलिया द्वारा सप्लाई चैन रेज़ीलिएंस इनीशिएटिव

  • हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखला में चीन के प्रभुत्व का मुकाबला करने के लिए, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के व्यापार मंत्रियों द्वारा एक आभासी त्रिपक्षीय मंत्री स्तरीय बैठक में औपचारिक रूप से ‘सप्लाई चैन रेज़ीलिएंस इनीशिएटिव’ (SCRI) का शुभारंभ किया गया।

सप्लाई चैन रेज़ीलिएंस का अभिप्राय:

  • सप्लाई चैन रेज़ीलिएंस (Supply Chain Resilience) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के संदर्भ मेंएक दृष्टिकोण है, जो किसी देश को यह सुनिश्चित करने में सहायता करता है कि वह अपनी संपूर्ण आपूर्ति के लिये किसी एक देश पर निर्भर होने की अपेक्षा अपने आपूर्ति के जोखिम का विस्तार अलग-अलग आपूर्तिकर्त्ता देशों तक करे।
  • सप्लाई चैन रेज़ीलिएंस को अपनाने का मुख्य कारण यह है कि किसी भी प्रकार की अप्रत्याशित घटनाके कारण किसी विशिष्ट देश से आने वाली आपूर्ति में बाधा उत्पन्न हो सकती है, जिससे गंतव्य देश की आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अप्रत्याशित घटनाओ में प्राकृतिक (जैसे ज्वालामुखी विस्फोट, सुनामी, भूकंप अथवा महामारी) या मानव निर्मित (जैसे एक क्षेत्र विशिष्ट में सशस्त्र संघर्ष) दोनो शामिल हैं|
  • अतः किसी भी देश के लिए यह अति आवश्यक होता है कि वह अपनी आपूर्ति श्रृंखला को केवल एक देश तक सीमित न करे, अपितु विभिन्न देशों तक उसका विस्तार करे।

जापान के लिए सप्लाई चैन रेज़ीलिएंस के निहितार्थ:

  • एक आँकड़े के अनुसार वर्ष 2019 के दौरान जहाँ एक ओर जापान ने चीन को 135 बिलियन डॉलर का सामान निर्यात किया, वहीं जापान ने चीन से कुल 169 बिलियन डॉलर का आयात भी किया।इस प्रकार जापान के कुल आयात में चीन हिस्सा लगभग 24 प्रतिशत था।
  • अतः स्पष्ट है कि चीन द्वारा की जाने वाली आपूर्तिश्रृंखला में कोई भी बाधा जापान की आर्थिक गतिविधियों और वहाँ की अर्थव्यवस्था को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकती है।
  • इसके अतिरिक्त बीते कुछ महीनों में संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बीच पैदा हुए तनाव ने भी भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के बीच चिंता पैदा की है, क्योंकि इस प्रकार के तनाव से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के प्रभावित होने की संभावना है।

भारत के लिये सप्लाई चैन रेज़ीलिएंस के निहितार्थ:

  • भारत के कुल आयात मेंचीन लगभग 14 प्रतिशत का हिस्सेदार है, यदि किसी संकटपूर्ण परस्थिति में चीन किसी भी कारण से भारत को आयात करना बंद कर देता है तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था को अत्यधिक प्रभावित कर सकता है।
  • हालाँकि भारत द्वारा चीन के साथ अचानक अपनी आपूर्ति श्रृंखला को समाप्त करना या अपने आयात को कम करना अथवा बंद कर देना पूरी तरह से अव्यवहारिक है।
  • भारतीय दवा निर्माता कंपनियां कई दवाओं के निर्माण के लिये आवश्यक सामग्री के आयात हेतु चीन पर अत्यधिक निर्भर हैं। इसके अतिरिक्त भारत के कुल इलेक्ट्रॉनिक्स आयात में चीन काहिस्सा45 प्रतिशत है।
  • अतः स्पष्ट है कि भारत चीन के साथ अपने अपनी आपूर्ति श्रृंखला को समाप्त या बंद नहीं कर सकता है, किंतु यदि भारत समय के साथ धीरे-धीरे आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाता है या चीन के अलावा अन्य देशों के साथ अपने आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत करता है, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था के आपूर्ति श्रृंखला में लचीलापन पैदा करेगा, जो कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये भविष्य में काफी लाभदायक साबित होगा।

ऑस्ट्रेलिया के लिए सप्लाई चैन रेज़ीलिएंस के निहितार्थ:

  • यद्यपि चीन और ऑस्ट्रेलिया बड़े व्यापारिक भागीदार देशों में से एक है, किंतु कोविड-19 संकट के दौरान दोनों के बीच व्यापारिक संबंध काफी तनावपूर्ण रहे हैं।
  • चीन ने वर्ष 2020 में कुछ ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों से पशु माँस के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था|इसके अतिरिक्त ऑस्ट्रेलिया से आयातित जौ पर भी आयात शुल्क अधिरोपित किया था।
  • वर्ष 2020 में ही चीन के शिक्षा मंत्रालय ने ऑस्ट्रेलिया में पढ़ने वाले अथवा पढ़ने की इच्छा रखने वाले चीनी छात्रों को वहाँ बढ़ते नस्लवाद को लेकर चेतावनी दी थी।
  • हाल ही में ऑस्ट्रेलिया की संसद द्वारा चीन की महत्वकांक्षीपरियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव(BRI)के एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट निलंबित कर दिया|
  • चीन औरऑस्ट्रेलिया के मध्य बढ़ते तनाव के कारण ही संभवतः ऑस्ट्रेलिया अपनी आपूर्ति श्रृंखला में लचीलापन लाने की कोशिश कर रहा है।

स्रोत: द हिंदू

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