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भारत के 24वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुशील चंद्रा नियुक्त

भारत के 24वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुशील चंद्रा नियुक्त

भारत के राष्ट्रपति ने हाल ही में श्री सुशील चंद्रा को भारतीय निर्वाचन आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद पर नियुक्त किया है।

ज्ञात हो कि निर्वाचन आयुक्त सुशील अरोड़ा की 12 अप्रैल, 2021 पर पदमुक्ति के उपरांत 13 अप्रैल, 2021 को श्री सुशील चंद्रा ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में कार्यभार ग्रहण किया है।उनकी यह नियुक्ति वरिष्ठता क्रम के आधार पर की गई है क्योंकि श्री सुशील चंद्रा भारतीय निर्वाचन आयोग में सबसे वरिष्ठ निर्वाचन आयुक्त थे।

भारतीय निर्वाचन आयोग

  • भारत में निर्वाचन आयोग जिसे चुनाव आयोग के नाम से भी जाना जाता है,एक संवैधानिक निकाय है।इसकी स्थापना 25 जनवरी, 1950 को को हुई थी।
  • निर्वाचन आयोग भारत के संविधान में उल्लिखित नियमों और विनियमों के अनुसार भारत में संघ और राज्य चुनाव प्रक्रियाओं का संचालन करता है। इसके अंतर्गत यह देश में राज्यसभा, लोकसभा,राज्य विधानसभाओं, राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति के चुनाव का संचालन करता है।
  • संविधान का भाग 15 निर्वाचन से संबंधित है। जिसमें चुनावों के संचालन के लिये एक निर्वाचन आयोग के निर्माण का प्रावधान किया गया है
  • अनुच्छेद 324 से लेकर अनुच्छेद 329 में चुनाव आयोग और उनके सदस्यों की शक्तियों, कार्य, कार्यकाल, पात्रता आदि से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख है।
  • मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक होता है। राष्ट्रपति के पास मुख्य चुनाव आयुक्त और उनकी सलाह पर अन्य चुनाव आयुक्तों का चयन करने की शक्ति है।
  • इनको सर्वोच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के समान वेतन और भत्ते प्राप्त होते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त को संसद द्वारा केवल कदाचार और अक्षमता (सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाये जाने की रीति के अनुसार) के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है।
  • मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश के बिना अन्य आयुक्तों को उनके पद से नहीं हटाया जा सकता।

निर्वाचन आयोग की संरचना

  • प्रारंभ में निर्वाचन आयोग में मूलतः केवल एक चुनाव आयुक्त का प्रावधान था, लेकिन 16 अक्टूबर, 1989 को राष्ट्रपति की एक अधिसूचना के पश्चात दो अतिरिक्त आयुक्तों की नियुक्ति कर इसे तीन सदस्यीय निकाय बना दिया गया|
  • यह नियम 1 जनवरी, 1990 तक ही अस्तित्व में रहा। इसके बाद से फिर इसे एक सदस्यीय आयोग बना दिया गया परन्तु 1 अक्टूबर, 1993 को पुनः आयोग में दो अतिरिक्त चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की गई और तभी से यह संरचना चली आ रही है। वर्तमान में, इसमें एक मुख्य चुनाव आयुक्त और दो अन्य चुनाव आयुक्त शामिल हैं।
  • आयोग के पास ऐसे उम्मीदवार को प्रतिबंधित करने की शक्ति है, जो तय समय के भीतर और कानून के अनुसार निर्धारित तरीके से अपने चुनाव खर्चों का लेखा-जोखा आयोग के समक्ष पेश करने में असफल रहते हैं |
  • अनुच्छेद 103 के अंतर्गत राष्ट्रपति संसद के सदस्यों की अयोग्यताओं के संबंध में निर्वाचन आयोग से परामर्श करता है।
  • राज्यों के राज्यपाल अनुच्छेद 192 के अन्तर्गत राज्य विधानमण्डल के सदस्यों की अयोग्यताओं के संबंध में निर्वाचन आयोग से परामर्श करते हैं।

स्रोत –पीआईबी

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