भारत की सबसे बड़ी ओपन-एयर फर्नरी

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भारत की सबसे बड़ी ओपन-एयर फर्नरी

भारत की सबसे बड़ी ओपन-एयर फर्नरी

हाल ही में,  उत्तराखंड के रानीखेत में भारत की सबसे बड़ी ओपन एयर फर्नेरी का उद्घाटन किया गया है। जहां फर्न पौधों के संरक्षण में काफी मदद मिलेगी।

फ़र्नरी ( fernery), बड़ी संख्या में फ़र्न प्रजातियों का घर है, जिनमें से कुछ राज्य के लिए स्थानिक हैं, कुछ का औषधीय महत्व है, जबकि कुछ खतरे वाली प्रजातियां हैं जिसके देखभाल और सुरक्षा की आवश्यकता होती हैं।

नवनिर्मित फ़र्नरी भारत की सबसे बड़ी फ़र्नरीज़ में से एक है। फ़र्नरी  में फ़र्न प्रजातियों का सबसे बड़ा संग्रह है। यह प्राकृतिक परिवेश में देश की पहली ओपन-एयर फर्नरी है, जो किसी पॉली-हाउस/शेड हाउस के मुक्त है।

रानीखेत में बने इस फ़र्नरी 1,800 मीटर की ऊंचाई पर 4 एकड़ भूमि में फैला हुआ है। इस फ़र्नरी से एक मौसमी पहाड़ी धारा भी गुजरती है, जो इसे पर्याप्त नमी प्रदान करती है, क्योंकि फ़र्न को बढ़ने और फैलने के लिए छाया और नमी की आवश्यकता होती है।

इसे उत्तराखंड वन विभाग की रिसर्च विंग ने केंद्र सरकार की कैंपा योजना के तहत तीन साल की मेहनत के बाद विकसित किया है।

प्रमुख बिंदु

  • इस फर्नरी में लगभग 120 विभिन्न प्रकार के फर्न का आवास हैं। फर्नरी में पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र, पूर्वी हिमालयी क्षेत्र के साथ पश्चिमी घाट की प्रजातियों का मिश्रण है।
  • फ़र्नरी में कई दुर्लभ प्रजातियाँ भी हैं, जिनमें ट्री फ़र्न भी शामिल है, जो उत्तराखंड के राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा एक संकटग्रस्त प्रजाति है।
  • इसमें हंसराज जैसे औषधीय फर्न की लगभग 30 प्रजातियां भी हैं, जिनका आयुर्वेद में रोगों को ठीक करने की दवा के रूप में बहुत महत्व है।
  • इसके अलावा उत्तराखंड में लोकप्रिय पौष्टिक खाद्य पदार्थ के रूप में प्रयुक्त की जाने वाली ‘लिंगुरा’ जैसी खाद्य फर्न प्रजातियां हैं।

फर्न क्या हैं?

  • फर्न को गैर-फूल वाले टेरिडोफाइट के रूप में जाना जाता हैं। वे प्रायः बीजाणुओं का उत्पादन करके प्रजनन संपन्न करते हैं। फूलों के पौधों के समान, इसमें जड़ें, तना और पत्तियां होती हैं। फर्न एक पूर्ण रूप से विकसित संवहनी प्रणाली वाला प्रथम पौधा है।
  • भारतीय वनस्पतियों में फ़र्न और फ़र्न-सहयोगी पौधों का दूसरा सबसे बड़ा समूह है। इसमें कुल 33 परिवारों द्वारा 1,267 प्रजातियों और 130 जेनेरा का प्रतिनिधित्व किया जाता है जिनमें से लगभग 70 प्रजातियां भारत के लिए स्थानिक हैं।
  • इसके अलावा, फर्न नमी के संकेतक हैं और पारिस्थितिकी तंत्र को साफ करते हैं।
  • ये अच्छे नाइट्रोजन फिक्सिंग एजेंट हैं। इनका उपयोग प्रदूषित पानी से भारी धातुओं को छानने के लिए भी किया जाता है और एक पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के लिए एक जैव संकेतक हैं।

प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैम्पा)

प्रतिपूरक वनीकरण प्रबंधन निधि प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (CAMPA) को पर्यावरण और वन मंत्रालय (MoEF) द्वारा 2004 में प्राकृतिक वनों के संरक्षण, वन्यजीवों के प्रबंधन, वनों में बुनियादी ढांचे के विकास और अन्य संबद्ध गतिविधियों में तेजी लाने के लिए शुरू किया गया था।

स्रोत – द हिंदू

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