भारत का वणिज्यिक व्यापार घाटा

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भारत का वणिज्यिक व्यापार घाटा

भारत का वणिज्यिक व्यापार घाटा

हाल ही में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने सरकार द्वारा जारी रिपोर्ट के प्रारंभिक आंकड़े के सन्दर्भ में कहा कि; वस्तु निर्यात मार्च 2021 में वार्षिक आधार पर 58 प्रतिशत बढ़कर, 34 अरब डॉलर रहा। भारतीय इतिहास में किसी एक माह में यह सर्वाधिक है। सरकारी नीतियां महामारी के बावजूद देश को नई ऊंचाई पर ले जा रही है।

सरकार द्वारा जारी प्रारंभिक आंकड़ों से पता चला है कि, मार्च 2021 में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 14.11 बिलियन अमरीकी डॉलर हो गया, जो मार्च 2020 के दौरान 9.98 बिलियन अमरीकी डालर था।

प्रमुख बिंदु:

  • 23% की वृद्धि के साथ, मार्च 2021 में भारत का व्यापारिक निर्यात मार्च 2020 में USD 21.49 बिलियन के तुलना में34.0 बिलियन अमरीकी डॉलर था।
  • पहली बार, किसी एक महीने में, भारतीय निर्यात मार्च 2021 में 34 बिलियन अमरीकी डॉलर को पार कर गया।
  • 89% की वृद्धि के साथ, भारत का व्यापारिक आयात मार्च 2020 में 31.47 बिलियन अमरीकी डॉलर के तुलना में 48.12 बिलियन अमरीकी डॉलर था।
  • मार्च के दौरान, गैर-पेट्रोलियम निर्यात 62% बढ़ा, जबकि गैर-पेट्रोलियम और गैर-आभूषण निर्यात 61% बढ़ा।

व्यापार घाटा:

  • किसी देश के कुल व्यापार को उसके आयात और उसके निर्यात के योग से मापा जाता है।देश, वस्तुओं और सेवाओं दोनों का व्यापार करते हैं।
  • किसी देश का व्यापार “शेष” उसके निर्यात से होने वाली कमाई और उसके आयात के लिए भुगतान के बीच के अंतर को दर्शाता है।
  • यदि प्राप्त संख्या ऋणात्मक है – अर्थात, किसी देश द्वारा आयातित वस्तु का कुल मूल्य उस देश द्वारा निर्यात किए गए वस्तु के कुल मूल्य से अधिक है – तो इसे “व्यापार घाटा” कहा जाता है। यह चालू खाता घाटा का एक भाग है .

चालू खाता घाटा:

  • चालू खाता, निर्यात और आयात के कारण विदेशी मुद्रा के निवल अंतराल को प्रदर्शित करता है।
  • चालू खाता के अंतर्गत मुख्यत: तीन प्रकार के लेन-देन सम्मिलित हैं-पहला वस्तुओं व सेवाओं का आयात-निर्यात, दूसरा कर्मचारियों व विदेशी निवेश से प्राप्त आय एवं खर्च और अंतिम में ,विदेशों से प्राप्त उपहार, अनुदान राशि एवं विदेश में बसे कामगारों द्वारा भेजी जाने वाली विप्रेषण (Remittance) की राशि, को सम्मिलित किया जाता है।
  • चालू खाता घाटा, व्यापार संतुलन (BOP) से भिन्न है, जहाँ व्यापार संतुलन केवल वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात और आयात से होने वाली आय और खर्च में अंतर को मापता है, चालू खाता विदेशों में घरेलू पूंजी के प्रयोग से प्राप्त भुगतान को भी शामिल करता है।

स्त्रोत: द हिन्दू

 

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