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भारत और रूस एस-400 ट्रायम्फ मिसाइल रक्षा प्रणाली सौदे के लिए प्रतिबद्ध

भारत और रूस एस-400 ट्रायम्फ मिसाइल रक्षा प्रणाली सौदे के लिए प्रतिबद्ध

हाल ही में, रूस के राजदूत निकोलाई कुदाशेव बयान जारी किया जिसके तहत उन्होंने कहा कि भारत और रूस, दोनों देश एस-400 ट्रायम्फ मिसाइल रक्षा प्रणाली सौदे को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

समझौते के तहत, इस वर्ष के अंत तक भारत को S-400 मिसाइल प्रणाली सौप दी जायेगी । इसके साथ ही उन्होंने कहा कि दोनों भारत और रूसइस मुद्दे पर अमेरिकी प्रतिबंधों का विरोध करते हैं।

विदित हो कि इस हथियार प्रणाली की खरीद को लेकर भारत के खिलाफ अमेरिका द्वारा प्रतिबन्धलगाए जाने की संभावनाएं व्यक्त की जा रहीं थी।

मामले की पृष्ठभूमि

  • ऐसी सम्भावना व्यक्तकी जारी थी कि S-400 मिसाइल प्रणाली सौदे के कारण अमेरिकाCAATSA कानून अर्थात ‘अमेरिकी प्रतिद्वंद्वियों को प्रतिबंधो के माध्यम से प्रत्युत्तर अधिनियम’ (Countering America’s Adversaries through Sanctions Act- CAATSA) के माध्यम से भारत पर प्रतिबंध लगा सकता है।
  • विदित हो कि वर्ष 2018 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को चेतावनी दी थी कि यदि वह रूस के साथ यह सौदा करता है तो अमेरिका के साथ भारत के सैन्य सहयोग प्रभावित होंगे।
  • भारत ने इस संबंध में कहा कि चीन के साथ भी रूस रक्षा संबंधी सौदे करता है और रूस इसे चीन के माध्यम से पाकिस्तान को भी बेच सकता है। यदि भारत ऐसे हथियार सौदे नहीं करेगा तो भारत की रक्षा प्रणाली कमजोर हो सकती है।
  • हालाँकि इसी प्रकार के रक्षा सौदों पर अमेरिका, चीन और तुर्की पर पहले से ही प्रतिबंध लगा चुका है।

S-400 वायु रक्षा प्रणाली का भारत के लिए महत्व

  • S-400 रक्षा मिसाइल प्रणाली की खरीद को लेकर भारत और रूस के बीच हुआ यह समझौता सामरिक दृष्टि से बेहद महत्त्वपूर्ण है।
  • क्योंकि S-400 ट्रायम्फ रूस द्वारा डिज़ाइन की गयी,सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली (surface-to-air missile system- SAM) है। यह प्रणाली 400 किमी. की सीमा के भीतर 30 किमी. की ऊँचाई पर , मानव रहित हवाई वाहन, बैलिस्टिक तथा क्रूज मिसाइलों को भेद सकती है।
  • भारत में एस -400 विमान को शामिल करने के साथ, यह भारतीय वायु क्षेत्र में उड़ान भरने वाले पाकिस्तानी विमानों को ट्रैक करने में सक्षम होगा।
  • S-400 मिसाइल अमेरिका द्वाराविकसित मिसाइल , ‘टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस’ (Terminal High Altitude Area Defence – THAAD) से काफी उन्नत माना जा रहा है।

CAATSA कानून

  • CAATSA अर्थात ‘अमेरिका द्वारा अपने प्रतिद्वंद्वियों के विरोध हेतु बनाए गए दंडात्मक अधिनियम’ (Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act- CAATSA) का प्रमुख उद्देश्य दंडात्मक उपायों के माध्यम से ईरान, उत्तर कोरिया और रूस को प्रत्युत्तर देना है।
  • इसको वर्ष 2018 में लागू किया गया था। यह अधिनियम अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस के रक्षा और ख़ुफ़िया क्षेत्रों में महत्वपूर्ण लेनदेन करने वाले देशों और व्यक्तियों के खिलाफ प्रतिबंधलगाए जाने का अधिकार देता है।

स्रोत – द हिन्दू

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