भारतीय रिज़र्व बैंक की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट

Print Friendly, PDF & Email

भारतीय रिज़र्व बैंक की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट

रिज़र्व बैंक ने वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के 22वें अंक को प्रकाशित किया है। इस रिपोर्ट में वित्तीय स्थिरता के जोखिमों से संबंधित वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद की उप-समिति के सामूहिक मूल्यांकन और वित्तीय क्षेत्र के विकास और विनियमन से संबंधित समसामयिक मुद्दों के संदर्भ में वित्तीय प्रणाली के लचीलेपन को दर्शाया गया है।

वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट:

वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (FSR) भारतीय रिज़र्व बैंक का एक अर्द्धवार्षिक प्रकाशन है, जो भारत की वित्तीय प्रणाली की स्थिरता का समग्र मूल्यांकन प्रस्तुत करती है। साथ ही यह वित्तीय क्षेत्र के विकास और विनियमन से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा करती है।

22वीं वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:

  • वैक्सीन के विकास पर सकारात्मक खबर ने संभावनाओं पर आशावाद को दृढ किया है, हालांकि इसे अधिक संक्रामक उपभेदों सहित वायरस की दूसरी तरंगों ने आघात पहुंचाया है।
  • बैंकों के कार्यनिष्पादन मापदंडों में काफी सुधार हुआ है, जो कि कोविड-19 महामारी की प्रतिक्रिया में उपलब्ध कराए गए विनियामक व्यवस्था से समर्थित है।
  • अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के जोखिम-भारित आस्तियों की तुलना में पूंजी अनुपात (सीआरएआर) मार्च, 2020 में 14.7 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर, 2020 में 15.8 प्रतिशत हो गया, जबकि उनकी सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (जीएनपीए) अनुपात 8.4 प्रतिशत से घटकर 7.5 प्रतिशत हो गया और प्रावधान कवरेज अनुपात (पीसीआर) 66.2 प्रतिशत से बढ़कर 72.4 प्रतिशत हो गया।
  • 7 जनवरी, 2021 को जारी 2020-21 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के प्रथम अग्रिम अनुमानों को शामिल करने वाले समष्टि तनाव परीक्षणों से संकेत मिलता है कि बेसलाइन परिदृश्य के तहत सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के जीएनपीए अनुपात सितंबर, 2020 में 7.5 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर, 2021 में 13.5 प्रतिशत हो सकता है और एक गंभीर तनाव परिदृश्य के तहत यह अनुपात 14.8 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। यह संपत्ति की गुणवत्ता में संभावित गिरावट का सामना करने के लिए पर्याप्त पूंजी के अग्रसक्रिय निर्माण की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।
  • नेटवर्क विश्लेषण से पता चलता है कि सितंबर, 2020 को समाप्त हुई तिमाही में वित्तीय प्रणाली में संस्थाओं के बीच कुल द्विपक्षीय एक्सपोजर में मामूली वृद्धि हुई है। अंतर-बैंक बाजार के सिकुड़ने और बैंकों के बेहतर पूंजीकरण के साथ, विभिन्न परिदृश्यों के तहत मार्च, 2020 की तुलना में बैंकिंग प्रणाली के लिए छद्म जोखिम में गिरावट आई है।

वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद् (Financial Stability and Development Council-FSDC):

  • वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद् का गठन दिसम्बर, 2010 में हुआ था।इसका उद्देश्य है किवित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के तन्त्र को सुदृढ़ करना एवं उसे संस्थागत बनाना।
  • विभिन्न नियामक संस्थाओं के बीच समन्वय को बढ़ावा देना तथा वित्तीय प्रक्षेत्र के विकास को प्रोत्साहित करना।इस परिषद् के अध्यक्ष केन्द्रीय वित्त मंत्री होते हैं।

स्रोत – द हिन्दू

Open chat
1
Youth Destination IAS . PCS
To get access
- NCERT Classes
- Current Affairs Magazine
- IAS Booklet
- Complete syllabus analysis
- Demo classes
https://online.youthdestination.in/