भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सहकारी बैंक को जारी किये निर्देश
हाल ही में ‘आरबीआई’ ने सहकारी बैंकों द्वारा वित्तीय सेवाओं की आउटसोर्सिंग में जोखिम प्रबंधन के लिए दिशा-निर्देश जारी किये है ।
वर्तमान समय में, सहकारी बैंक लागत कम करने के साथ-साथ विशेषज्ञता (जहां यह आंतरिक रूप से उपलब्ध नहीं है) प्राप्त करने के लिए भी आउटसोसिंग का तेजी से उपयोग कर रहे हैं।
आउटसोर्सिंग को सीमित अवधि के लिए कुछ गतिविधियों (जिन्हें एक सहकारी बैंक द्वारा प्रायः वर्तमान में या भविष्य में स्वयं संचालित किया जाएगा) को परिचालित करने हेतु तीसरे पक्ष के उपयोग के रूप में परिभाषित किया गया है।
चुनौतियाँ
इससे बैंक वित्तीय जोखिम, अनुपालन जोखिम और प्रतिष्ठा जोखिम सहित विभिन्न जोखिमों के प्रति सुभेद्य हो जाते हैं।
इन दिशा-निर्देशों की मुख्य विशेषताएं: –
- अपनी किसी भी वित्तीय गतिविधि को आउटसोर्स करने का प्रयोजन रखने वाले सहकारी बैंक को एक व्यापक आउटसोर्सिंग नीति निर्मितकरनी होगी।
- इस नीति में बैंकों को ऐसी गतिविधियों के साथ-साथ सेवा प्रदाताओं के भी चयन के लिए मानदंड स्थापित करने की आवश्यकता है
- आउटसोर्सिंग के कारण सहकारी बैंकों का शिकायत निवारण तंत्र बाधित नहीं होना चाहिए।
- अन्य संबंधित सुर्खियों में, RBI ने सांसदों, विधायकों और नगर निगमों या अन्य स्थानीय निकायों के सदस्यों पर सभी प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंकों (UCBS) में प्रबंध निदेशक (MD) या पूर्णकालिक निदेशक WTD) का पद धारण करने से रोक लगा दी है, हालंकि कुछ छूटों के प्रावधान भी किये गए हैं।
सहकारी बैंक क्या है?
- यह एक वित्तीय इकाई है, जो इसके सदस्यों से संबंधित होती है। ये सदस्य एक ही समय में अपने बैंक के स्वामी और ग्राहक दोनों होते हैं। ये वाणिज्यिक बैंकों सेभिन्न होते हैं।
- इन्हें इनके संचालन क्षेत्र के आधार पर शहरी और ग्रामीणसहकारी बैंकों में वर्गीकृत किया जाता है।
- ये संबंधित राज्य के सहकारी सोसाइटी अधिनियम केतहत या बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 केतहत पंजीकृत होते हैं।
- ये RBI (शहरी सहकारी बैंक) तथा राष्ट्रीय कृषि और विकास बैंक (ग्रामीण सहकारी बैंक) के प्रभावी पर्यवेक्षण के अंतर्गत आते हैं।
स्रोत – द हिन्दू