भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के 75 गौरवशाली वर्ष पूर्ण हुए
BIS, भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 1986 के तहत स्थापित भारत का राष्ट्रीय मानक निकाय है। यह पहले स्थापित किए गए भारतीय मानक संस्थान (ISI) के कार्यों का निर्वहन करता है।
BISकी स्थापना वस्तुओं के मानकीकरण, मुहरांकन और गुणवत्ता प्रमाणन गतिविधियों केसुमेलित विकास तथा उससे जुड़े या उससे प्रसंगवश जुड़े मामलों के लिए की गई है।
यह उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के तत्वावधान में कार्यकरता है।
BISका महत्व –
- मानकीकरण:BIS उपभोक्ताओं को सुरक्षित, विश्वसनीय और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत श्रेष्ठ मानकीकृत प्रथाओं का अनुपालनकरता है।
- प्रमाणनः इसके तहत, किसी विशेष उत्पाद के निर्माता को BIS मानक चिन्ह (ISI चिन्ह) केस्व-मुहरांकन अधिकार प्रदान किए जाते हैं।
BISविभिन्न प्रबंधन प्रणाली प्रमाणन योजनाएं भी संचालित करता है।
- हॉलमार्किंग:BIS स्वर्ण, चांदी के आभूषण, स्वर्ण बुलियन आदि की हॉलमार्किंग करता है। यह उपभोक्ताओं को स्वर्ण आभूषणों की शुद्धता या उनकी उत्कृष्टता पर तृतीय पक्ष के रूपमें आश्वासन प्रदान करता है।
- प्रयोगशाला सेवाएं:BIS ने देश में आठ प्रयोगशालाओं की स्थापना की है। इनका उद्देश्य अनुरूपता मूल्यांकन योजनाओं से उत्पन्न नमूनों की जांच संबंधी आवश्यकता को पूरा करना है।
BISने बाहर की प्रयोगशालाओं को मान्यता प्रदान करने के लिए प्रयोगशाला मान्यता योजना भी शुरू की है।
अगले 25 वर्षों के लिए BIS एजेंडा
- बाधक नहीं बल्कि एक सुविधा प्रदाता के रूप में कार्य करना।
- एक वैश्विक संगठन के रूप में विकास करना, वैश्विक अनुभवों से सीखना और वैश्विक मानकों को एकीकृत करना।
- देश की प्रयोगशाला सत्यापन आवश्यकताओं का आकलन करने के लिएसंबंधित कमियों के विश्लेषण पर कार्य करना। साथ ही, संपूर्ण भारत में उच्च गुणवत्ता वाली आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित करना।
- एक राष्ट्र एक मानक के माध्यम से गुणवत्ता या मानक क्रांति लाना।
स्रोत –द हिन्दू