ब्लैक सॉफ्टशेल कछुआ

ब्लैक सॉफ्टशेल कछुआ

हाल ही में दो गैर-सरकारी संगठनों (NGO) के साथ असम वन विभाग ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किया हैं साथ ही वर्ष 2030 तक लगभग 1,000 ब्लैक सॉफ्टशेल कछुओं (Black Softshell Turtles) को मिलकर पालने के लिये एक विज़न दस्तावेज़ (Vision Document) जारी किया है।

ब्लैक सॉफ्टशेल कछुए के बारे में:

  • ब्लैक सॉफ्टशेल कछुए वैज्ञानिक नाम: निल्सोनियानाइग्रिकन्स (Nilssonia Nigricans) है। यह लगभग भारतीय पीकॉकसॉफ्ट-शेल्ड कछुआ (Peacock Soft-shelled Turtle) (निल्सोनियाहर्म) के जैसा दिखता हैं।
  • पीकॉकसॉफ्ट-शेल्ड कछुआ कोIUCN की रेड लिस्ट में लुप्तप्राय के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • भारत में ताज़े जल के कछुओं की लगभग 29 प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इसमें से अधिकांश प्रजातियाँ पूर्वोत्तर भारत और बांग्लादेश में मंदिरों के तालाबों में पाई जाती हैं। इसकी वितरण सीमा में ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियाँ भी सम्मिलित हैं।

संरक्षण की स्थिति:

  • IUCN रेड लिस्ट में ‘ब्लैक सॉफ्टशेल कछुआ’ को गंभीर रूप से संकटग्रस्त श्रेणी में रखा है
  • साथ ही इसे CITES: परिशिष्ट I सूची में रखा गया है और भारत में इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत किसी भी प्रकार का कानूनी संरक्षण नहीं मिलता है।
  • कछुओं का विलुप्त होना कछुए के मांस और अंडे की खपत, रेत खनन, आर्द्रभूमि के अतिक्रमण और बाढ़ के पैटर्न में बदलाव आदि के कारण है।

भारतीय जल क्षेत्र के समुद्री कछुए:

  • भारत के जलीय भाग में कछुओं की 5 प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जैसे ओलिव रिडले, ग्रीन टर्टल, लॉगरहेड, हॉक्सबिल, लेदरबैक।
  • ओलिवरिडले, लेदरबैक और लॉगरहेड को IUCN रेड लिस्ट ऑफ थ्रेटेंडस्पीशीज़ में ‘सुभेद्य’ के रूप में श्रेणीबद्ध किया गया है।
  • हॉक्सबिल कछुए को ‘गंभीर रूप से लुप्तप्राय (Critically Endangered)’ के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, और ग्रीनटर्टल को आईयूसीएन की खतरनाक प्रजातियों की रेड लिस्ट में ‘लुप्तप्राय’ के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
  • इन सभी कछुए को भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972, अनुसूची I के तहत भी संरक्षण प्राप्त हैं।

कछुआ संरक्षण:

हिंद महासागर समुद्री कछुआ समझौता (IOSEA):

  • भारत संयुक्त राष्ट्र समर्थित पहल, प्रवासी प्रजातियों पर कन्वेंशन (Convention on Migratory Species- CMS) के हिंद महासागर समुद्री कछुआ समझौते (Indian Ocean Sea Turtle Agreement- IOSEA) का हस्ताक्षरकर्त्ता देश है।
  • यह संरक्षण का एक ढाँचा तैयार करता है जिसके माध्यम से हिंद महासागर एवं दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्र के राज्यों के साथ ही अन्य संबंधित राज्य, घटती समुद्री कछुओं की आबादी को बचाने के लिये एकसाथ काम सकते हैं ।

कूर्मा एप:

  • यह भारत के ताज़े जल के कछुओं सहित कछुओं की 29 प्रजातियों को शामिल करने वाला एक डिजिटल डेटाबेस है।
  • इस एप को ‘टर्टल सर्वाइवलअलायंस-इंडिया’ (Turtle Survival Alliance-India) और ‘वाइल्डलाइफ कंज़र्वेशन सोसाइटी-इंडिया’ (Wildlife Conservation Society-India) की सहायता से ‘इंडियन टर्टल कंज़र्वेशन एक्शन नेटवर्क’ (Indian Turtle Conservation Action Network- ITCAN) ने विकसित किया है।
  • साथ ही जन जागरूकता के लिए विश्व कछुआ दिवस प्रतिवर्ष 23 मई को मनाया जाता है।

स्रोत – पी आई बी

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