‘ब्रिक्स’ देशों के समूह में और छह नए सदस्य शामिल

ब्रिक्सदेशों के समूह में और छह (6) नए सदस्य शामिल

हाल ही में ‘ब्रिक्स’ के सदस्यों ने छह नए देशों का स्वागत करके ब्रिक्स समूह के विस्तार की घोषणा की है।

पहले चरण के विस्तार में अर्जेंटीना, मिस्र, इथियोपिया, सऊदी अरब, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल किया गया है, जो 1 जनवरी 2024 से आधिकारिक रूप से ब्रिक्स के पूर्ण सदस्य बन जाएंगे।

15वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन:

  • 22 से 24 अगस्त तक जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका) में 15वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया था । इन छह नए सदस्यों को जोड़ने की घोषणा इसी15वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अंत में की गई है ।
  • विदित हो कि 2019 के बाद से इस आयोजन में पहली बार ब्रिक्स देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के नेता एक मंच पर दिखाई दिए ।
  • यह सम्मेलन कोरोना महामारी और उसके बाद के वैश्विक प्रतिबंधों के उभरने के बाद व्यक्तिगत रूप से आयोजित होने वाला पहला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन है ।
  • भारत के प्रधानमंत्री ने 24 अगस्त, 2023 को जोहान्सबर्ग में ‘ब्रिक्स-अफ्रीका आउटरीच और ब्रिक्स प्लस डायलॉग’ में भी भाग लिया।

ब्रिक्स में सदस्य शामिल होने का महत्व:

  • नए सदस्यों के शामिल होने से संगठन मजबूत होगा, और यह बहुपक्षवाद व्यवस्था को बनाए रखने और उसे मजबूत करने में मदद करेगा।
  • बता दें कि इस समूह का इससे पहले विस्तार 2010 में हुआ था जब दक्षिण अफ्रीका को शामिल किया गया था। तब यह ब्रिक से ब्रिक्स हो गया।
  • ब्रिक्स का विस्तार प्रभुत्व बनाने और वैश्विक शासन को एक “बहुध्रुवीय” विश्व व्यवस्था में फिर से आकार देने की योजना का हिस्सा है जो ग्लोबल साउथ की आवाज़ को विश्व एजेंडे के केंद्र में रखता है।
  • सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ईरान और मिस्र को शामिल करना समूह में MENA (मध्य पूर्व और उतर अफ्रीका) का पहला प्रतिनिधित्व है, और अर्जेंटीना को शामिल करने का समर्थन इसके सदस्य ब्राज़ील ने किया था।
  • ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल करना विशेष महत्व रखता है क्योंकि ये तीनों ब्रिक्स में तेल समृद्ध खाड़ी के दोनों किनारों का प्रतिनिधित्व करेंगे।
  • मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत और चीन से मिलकर बने ब्रिक्स की कल्पना प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के वैश्विक स्तर के संगठन के रूप में की गई थी जो शीत युद्ध के बाद की विश्व व्यवस्था में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

चुनौतियां:

  • ब्रिक्स के वर्तमान 5 सदस्य देशों के बीच आपस में विश्वास की कमी है। साथ ही, इनके बीच सदस्यता विस्तार से संबंधित मानकों, मानदंडों और प्रक्रियाओं पर भी आम सहमति नहीं है । भारत-चीन सीमा विवाद इसका एक उदाहरण है।
  • वैश्विक मुद्दों पर इसके सदस्य देशों के बीच मतभेद देखने को मिलता है।
  • ब्रिक्स के चीन और रूस जैसे सदस्य देशों में सत्तावादी शासन व्यवस्था मौजूद है ।
  • कई बार ब्रिक्स को पश्चिम-विरोधी समूह मान लिया जाता है। इस धारणा की वजह से विश्व व्यवस्था के साथ इसके एकीकरण को चुनौती मिल सकती है।
  • ब्रिक्स के मौजूदा सदस्यों और जिन्हें सदस्य बनाने का प्रस्ताव है, उन पर अलग-अलग आर्थिक व राजनीतिक प्रतिबंध लगे हुए हैं। इससे आर्थिक बाधा पैदा हो सकती है।

ब्रिक्स के बारे में:

  • ब्रिक्स दुनिया की पांच प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के एक संगठन का नाम है। इस संगठन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। ब्रिक्स शिखर सम्मलेन की अध्यक्षता हर साल इसके सदस्य राष्ट्रों की ओर से की जाती है।
  • पांच देशों में से हर साल बदल-बदल कर इस सम्मेलन की मेजबानी की जाती है। 2023 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी दक्षिण अफ्रीका कर रहा है।

स्रोत – इंडियन एक्सप्रेस

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