बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2022
हाल ही में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2022 अधिसूचित किए हैं ।
नए नियम बैटरी (प्रबंधन और हैंडलिंग) नियम, 2001 का स्थान लेंगे।
नए नियमों के निम्नलिखित उद्देश्य हैं:
- अपशिष्ट बैटरियों का पर्यावरण अनुकूल प्रबंधन सुनिश्चित करना और चक्रीय (सर्कुलर) अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना।
- ये नियम सभी प्रकार की बैटरियों पर लागू होंगे। इनमें इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी, पोर्टेबल बैटरी, ऑटोमोटिव बैटरी और औद्योगिक बैटरी भी शामिल हैं।
मुख्य निष्कर्ष–
- इन नियमों से विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) प्रमाण-पत्रों के आदान-प्रदान के लिए एक तंत्र और केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल स्थापित हो सकेगा।
- प्रदूषक द्वारा भुगतान सिद्धांत के आधार पर, EPR लक्ष्यों को पूरा न करने पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का भुगतान करना पड़ेगा।
- अपशिष्ट बैटरियों के संग्रह और पुनर्चक्रण/नवीनीकरण करने वाले नए उद्योगों की स्थापना और उद्यमशीलता को बढ़ावा देंगे।
- निर्धारित रिकवरी लक्ष्य वित्त वर्ष-2025 के लिए 70%, वित्त वर्ष-26 के लिए 80% तथा वित्त वर्ष-27 और आगे के लिए 90% तय किए गए हैं।
- नए नियमों के तहत नई बैटरियों के निर्माण में कुछ निश्चित मात्रा में रिसाइकिल की गई सामग्री का उपयोग निर्धारित किया गया है।
- ऑनलाइन पंजीकरण और रिपोर्टिंग, लेखा परीक्षा एवं नियमों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए समिति गठित करने का प्रावधान किया गया है।
नए नियमों का महत्व–
- भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने की वजह से बैटरी अपशिष्ट का सतत प्रबंधन जरुरी है।
- नए नियमों से नई तकनीक, पुनर्चक्रण और नवीनीकरण में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
- नए कच्चे माल पर निर्भरता कम होगी और प्राकृतिक संसाधनों की बचत होगी।
- विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility: EPR) अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित एक अवधारणा है।
- इसमें ई-अपशिष्ट के उत्पादक (आयातक भी) ई-अपशिष्ट के संग्रह और पुनर्चक्रण/नवीनीकरण तथा प्राप्त सामग्री के उपयोग के लिए जिम्मेदार होते हैं।
स्रोत –द हिन्दू
