बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड इनिशिएटिव : G7

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बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड इनिशिएटिव : G7

हाल ही में ‘G7’ देशों ने चीन की बेल्टएंड रोड इनिशिएटिव परियोजना (BRI) से मुकाबला करने के लिये 47वें ‘जी-7’ शिखर सम्मेलन में ‘बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड’ (Build Back Better World- B3W) नामक पहल का प्रस्ताव रखा।

G7 (ग्रुप ऑफ सेवन)

  • गठन वर्ष 1975 में किया गया था, यह एक अंतर-सरकारी संगठन है ।
  • वैश्विक आर्थिक शासन, अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा नीति जैसे सामान्य हित के विषयों पर चर्चा करने के लिये इसकी वार्षिक बैठक होती है।
  • G7 संगठन मेंयूके, कनाडा, फ्राँस, जर्मनी, इटली, जापान और अमेरिकादेश शामिल हैं। विदित हो कि, सभी G7 देश और भारत, G20 का हिस्सा हैं।
  • ‘जी 7’ का कोई औपचारिक संविधान या कोई निश्चित मुख्यालय नहीं है। इसके वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान नेताओं द्वारा लिये गए निर्णय गैर-बाध्यकारी होते हैं।

बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड के विषय में:

  • इसका उद्देश्य विकासशील और कम आय वाले देशों के बुनियादी ढाँचे की समस्या तथा निवेश घाटे को दूर करना है, जहाँ चीन ने बैल्टएंड रोड इनिसिएटिव (BRI) के अंतर्गत लगभग 2,600 परियोजनाओं के माध्यम से अरबों डॉलर का निवेश किया है।
  • BRI परियोजनाओं को विश्व में व्यापार, विदेश नीति और भू-राजनीति में अपने रणनीतिक प्रभुत्व के लिये चीन द्वारा बिछाए गए ऋण जाल के रूप में माना जाता है।
  • ‘बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड इनिशिएटिव’ का सम्पूर्ण ध्यान परिवहन, रसद और संचार विकसित करने पर है, जो चीन के व्यापार लागत को कम करेगा, चीनी बाज़ारों तक अधिक पहुँच प्रदान करेगा तथा ऊर्जा एवं अन्य संसाधनों की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।
  • इस योजना के संचालन का नेतृत्व संयुक्त राज्य अमेरिका कर रहा है।
  • ‘बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड’पहल विकासशील देशों को वर्ष 2035 तक आवश्यक लगभग 40 ट्रिलियन डॉलर की मांग को पूरा करने के लिये एक पारदर्शी साझेदारी प्रदान करेगी।
  • यह जलवायु मानकों और श्रम कानूनों का पालन करते हुए निजी क्षेत्र के सहयोग से सैकड़ों अरबों डॉलर खर्च करने की अनुमति प्रदान करती है।
  • हालाँकि इस विषय में अभी घोषणा नहीं की गई है कि योजना वास्तव में कैसे कार्य करेगी या अंततः कितनी पूंजी को आवंटित करेगी।

चीन की BRI परियोजना:

  • बैल्टएंड रोड इनिसिएटिव (बीआरआई) को वर्ष 2013 में लॉन्च किया गया था। इसमें विकास और निवेश हेतु पहल को शामिल हैं जो एशिया से यूरोप तथा उससे आगे तक विस्तृत हैं।
  • इसके तहत रेलवे, बंदरगाह, राजमार्ग और अन्य बुनियादी ढाँचे जैसी BRIपरियोजनाओं में सहयोग हेतु 100 से अधिक देशों ने चीन के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं।

‘बीआरआई’ के ज़रिये चीन का निवेश:

  • इसकी स्थापना के पश्चात से इसमें बाह्य निवेश अधिक हुआ है क्योंकि चीन का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बहिर्वाह अनुपात 2001-10 के मध्य लगभग 0.34 से बढ़कर 1 हो गया।
  • मात्रा के लिहाज से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश(Foreign direct investment -FDI ) बहिर्वाह वर्ष 2016-19 में बढ़कर 140 अरब डॉलर हो गया, जबकि यह वर्ष 2001-10 के दौरान वार्षिक औसत 25 अरब डॉलर था।
  • चीन व्यापक परिवहन नेटवर्क सुनिश्चित करने के लिये अफ्रीका में निवेश कर रहा है। चीन और आसियान देशों के मध्य बेहतर एकीकरण के लिए चीन ने पूर्वी एशियाई क्षेत्र के साथ विभिन्न संपर्कों मार्गों के लिए भी हस्ताक्षर किये हैं, जिसमें ज़्यादातर परिवहन, रेलवे, सड़क मार्ग और जलमार्ग पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

महत्त्वपूर्ण परियोजनाएँ:

  • चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (China-Pakistan-Economic-Corridor-CPEC), बांग्लादेश-चीन-म्याँमार आर्थिक गलियारा (Bangladesh-China-India-Myanmar) और श्रीलंका में कोलंबो पोर्टसिटी परियोजना अन्य महत्त्वपूर्ण ‘बैल्ट एंड रोड’ परियोजनाएँ हैं।
  • चीन की BRI के एक भाग के रूप में मध्य एशियाई क्षेत्र के भीतर 4,000 किलोमीटर रेलवे और 10,000 किलोमीटर राजमार्गों को पूर्ण करने की योजना है।

भारत की चिंता:

  • भारत ने ‘CPEC’ के बारे में चिंता व्यक्त की है, क्योंकि यह पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) के बीच से होकर गुज़रता है।
  • बड़े पैमाने पर बुनियादी ढाँचा परियोजना चीन के झिंजियांग को पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में ग्वादर बंदरगाह से संयोजित करती है।
  • भारत ने अतीत में चीनी पहल में सम्मिलित होने से इनकार कर दिया और BRI के खिलाफ आवाज़ उठाई है।
  • चीनी प्रतिस्पर्द्धा के कारण भारत अपने उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता, बाज़ार पहुँच, संसाधन निष्कर्षण आदि पर प्रतिकूल व्यापार प्रभाव भी देखता है।

‘बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड’ का महत्त्व:

  • वर्ष 1991 में सोवियत संघ के पतन और शीत शुद्ध की समाप्ति के पश्चात एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में चीन का फिर से उदय हाल के समय की सबसे महत्त्वपूर्ण भू-राजनीतिक घटनाओं में से एक है।
  • वर्ष 1979 में चीन की अर्थव्यवस्था इटली की तुलना में कम थी, किंतु विदेशी निवेश के लिये खोले जाने और बाज़ार सुधारों को आरम्भ करने के बाद से चीन, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है, तथा यह नवीन प्रौद्योगिकियों के एक वैश्विक नेता के रूप में उभरा है।
  • हालाँकि ‘पारदर्शिता की कमी, खराब पर्यावरण और श्रम मानकों’ के प्रति चीन की सरकार के दृष्टिकोण के कारण वह पश्चिम में एक सकारात्मक विकल्प प्रस्तुत करने में असफल रहा है।
  • बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड’ का प्रस्ताव निश्चित रूप से चीन की मेगा योजना के प्रतिकूल प्रभावों को रोकने हेतु एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • हालाँकि ‘बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड’ में सुसंगत विचारों और उचित योजना का अभाव है लेकिन फिर भी इसमें देरी नहीं हुई है तथा इसे और अधिक बेहतर किया जा सकता है।
  • इसके साथ ही यह देखना अभी शेष है कि भारत ‘बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड’ में क्या भूमिका निभाएगा, क्योंकि चीन के ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) का भारत प्रबल विरोधी रहा है।

स्रोत – इंडियन एक्सप्रेस

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