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बाजार प्रोत्साहन हेतु प्रतिभूति अधिग्रहण योजना – G-SAP 1.0

बाजार प्रोत्साहन हेतु प्रतिभूति अधिग्रहण योजना – G-SAP 1.0

भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में वित्तीय वर्ष 2022 हेतु सरकारी प्रतिभूति अधिग्रहण कार्यक्रम (Government Security Acquisition Programme), GSAP 1.0 की घोषणा की है ।

इस कार्यक्रम के तहत, केंद्रीय बैंक 1 ट्रिलियन (या एक लाख करोड़ रुपये) मूल्य के सरकारी बॉन्ड खरीदेगा। 25,000 करोड़ रुपये की पहली खरीद 15 अप्रैल, 2021 को की जाएगी।

रिज़र्व बैंक जी-सेक अभिग्रहण कार्यक्रम (जी-एसएपी 1.0) के तहत प्रतिफल वक्र के स्थिर और क्रमबद्ध विकास को सक्षम करने की दृष्टि से 2021-22 की पहली तिमाही में ₹1 लाख करोड़ की सरकारी प्रतिभूतियों की खुला बाजार खरीद का संचालन करेगा।

प्रतिभूति अधिग्रहण योजना  का महत्व:

Importance of Securities Acquisition Scheme:

  • आरबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष सरकार की उधारी में वृद्धि हुई है| सरकार की उधारी में बढ़ोत्तरी से भारतीय बाजार काफी हद तक प्रभावित होता है|
  • आरबीआई का कार्य यह सुनिश्चित करना है किइस तरह की ऋण उधारी से भारतीय बाजार में कोई व्यवधान न हो।इसमें GSAP 0, बॉन्ड बाजार के लिए और अधिक सहूलियत प्रदान करेगा।
  • रेपो दर और दस-वर्षीय सरकारी बॉन्ड से होने वाली आय के बीच अंतर को कम करने में GSAP 0, बॉन्ड मदद करेगा।

‘मुक्तबाज़ार परिचालन’ (OMO) क्या होता है?

Open Market Operations:

  • मुक्त बाज़ार परिचालन आरबीआई की मात्रात्मक मौद्रिक नीति उपकरणों में से एक है, जो धन की कुल मात्रा को विनियमित या नियंत्रित करता है|इसे केंद्रीय बैंक द्वारा अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिये नियोजित किया गया है|
  • इसमें आरबीआई द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों और ट्रेजरी बिलों की खरीद और बिक्री के माध्यम से बाजार में मुद्रा आपूर्ति की स्थिति को समायोजित किया जाता है|
  • अतः G-SAP, करीब-करीब ‘मुक्त बाज़ार परिचालन’ कैलेंडर के प्रयोजन को पूरा करेगा, जोकि बॉन्ड बाजार की मांग सूची में लंबे समय से शामिल है।
  • भारतीय रिजर्व बैंक, मुक्त बाज़ार परिचालन (OMO) का निष्पादन वाणिज्यिक बैंकों के माध्यम से करता है| इसके तहतइसका जनता के साथ सीधे कोई संबंध नहीं होता|

OMO बनाम तरलता:

  • जब आरबीआई मौद्रिक नीति में तरलता में वृद्धि करना चाहता है, तो वह खुले बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद करेगा। इस प्रकार केंद्रीय बैंक, वाणिज्यिक बैंकों को तरलता प्रदान करता है।
  • इसके विपरीत, आर्थिक प्रणाली के अंतर्गत तरलता में कमी लाने के लिये सरकारी प्रतिभूतियाँ बेचता है ।
  • इस प्रकार से आरबीआई बाजार से अप्रत्यक्ष रूप से धन की आपूर्ति को नियंत्रित करता है और अल्पकालिक ब्याज दरों को प्रभावित करता है।
  • ‘मुक्त बाज़ार परिचालन’टूल का प्रयोग आरबीआई द्वारा दो तरीके से किया जाता है:
  1. सरकारी प्रतिभूतियों की एक मुश्त खरीद या बिक्री जो एक स्थाई प्रक्रिया होती है|
  2. दूसरी प्रक्रिया है प्रतिभूतियों की पुनर्खरीद करना| यह अल्पकालिक प्रक्रिया होती है|

 

GSAP 1.0

  • इस वर्ष सरकार की उधारी बढ़ी है जिसके कारण, RBI को यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय बाजार में कोई व्यवधान न हो अतः यह बांड बाजार को और अधिक सुविधा प्रदान करेगा।
  • वित्तीय वर्ष 2021 में, भारतीय रिज़र्व बैंक ने द्वितीयक बाजार से 13 ट्रिलियन मूल्य के बांड खरीदे।
  • दस साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड और रेपो रेट के बीच प्रसार को कम करने में यह कार्यक्रम मदद करेगा।
  • यह वित्त वर्ष 2022 में केंद्र और राज्यों के लिए उधार लेने की कुल लागत को कम करने में भी मदद करेगा।

सरकारी प्रतिभूतियाँ (Government Securities) क्या हैं?

  • सरकारी प्रतिभूतियाँ (G-Sec) वे सर्वोच्च प्रतिभूतियाँ हैं जो भारत सरकार की ओर से रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी की जाती हैं |
  • अल्पकालिक प्रतिभूतियां -आमतौर पर एक वर्ष से भी कम समय की मेच्योरिटी वाली इन प्रतिभूतियों को ट्रेजरी बिल कहा जाता है इनकी समयावधि तीन रूपों होती है, 91 दिन, 182 दिन और 364 दिन|
  • दीर्घकालिक प्रतिभूतियां- आमतौर पर एक वर्ष या उससे अधिक की मेच्योरिटी वाली इन प्रतिभूतियों को सरकारी बॉण्ड या दिनांकित प्रतिभूतियाँ कहा जाता है|
  • भारत में सरकारी प्रतिभूतियां भारत सरकार द्वारा बाजार से पूंजी जुटाने के लिए जारी संप्रभु बांड हैं। चूंकि ये बांड सरकार द्वारा समर्थित हैं, इसलिए उन्हें जोखिम मुक्त माना जाता है।

स्रोत – भारतीय रिज़र्व बैंक बेबसाईट

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