बंगाल की मुख्यमंत्री ने दायर की ‘चुनाव याचिका’

बंगाल की मुख्यमंत्री ने दायर की ‘चुनाव याचिका’

हाल ही में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नंदीग्राम निर्वाचन क्षेत्र के विधानसभा चुनाव परिणाम के खिलाफ कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक ‘चुनाव याचिका’ दायर की है।

निर्वाचन याचिका

  • विदित हो कि चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद चुनाव आयोग की भूमिका समाप्त हो जाती है, इसके बाद यदि कोई उम्मीदवार मानता है कि चुनाव प्रक्रिया में भ्रष्टाचार अथवा कदाचार हुआ था तो चुनाव अथवा निर्वाचन याचिका उसके लिए एकमात्र कानूनी उपाय है।
  • ऐसा उम्मीदवार संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय में चुनाव अथवा निर्वाचन याचिका के माध्यम से परिणामों को चुनौती दे सकता है।
  • बशर्ते कि ऐसी याचिका चुनाव परिणाम जारी होने की तारीख से 45 दिनों के भीतर दायर की जानी है; इस अवधि की समाप्ति के बाद न्यायालय द्वारा मामले की सुनवाई नहीं की जा सकती है।
  • यद्यपि वर्ष 1951 के जनप्रतिनिधि अधिनियम (RPA) के अनुसार , उच्च न्यायालय को 6 माह के भीतर मुकदमे को समाप्त करने का प्रयास करना चाहिये, लेकिन इस तरह के मुकदमे प्रायः वर्षों तक चलते रहते हैं।

जिन आधारों पर निर्वाचन याचिका दायर की जा सकती है (RPA की धारा 100)

  • चुनाव की तारीख को जीतने वाला उम्मीदवार चुनाव लड़ने के योग्य नहीं था।
  • चुनाव जीतने वाले उम्मीदवार, उसके पोल एजेंट या जीतने वाले उम्मीदवार की सहमति से किसी अन्य व्यक्ति ने कोई भ्रष्ट आचरण किया है।
  • जीतने वाले उम्मीदवार के नामांकन की अनुचित स्वीकृति या नामांकन की अनुचित अस्वीकृति।
  • मतगणना प्रक्रिया में कदाचार, जिसमें अनुचित तरीके से मत प्राप्त करना, किसी भी मान्य वोट को अस्वीकार करना या किसी भी अमान्य वोट को स्वीकार करना शामिल है।
  • संविधान या जनप्रतिनिधि अधिनियम (RPA) के प्रावधानों या ‘RPA’ के तहत बनाए गए किसी भी नियम या आदेश का पालन न करना।

यदि निर्णय याचिकाकर्त्ता के पक्ष में है (RPA की धारा 84)

  • याचिकाकर्त्ता जीतने वाले उम्मीदवार के परिणाम को शून्य घोषित किये जाने की मांग कर सकता है।
  • इसके अलावा यदि याचिका उसी उम्मीदवार द्वारा दायर की गई हैतो याचिकाकर्त्ता न्यायालय से स्वयं को या किसी अन्य उम्मीदवार को विजेता या विधिवत निर्वाचित घोषित करने की मांग कर सकता है।
  • यदि चुनाव याचिका का निर्णय याचिकाकर्त्ता के पक्ष में होता है तो न्यायालय द्वारा पुनः चुनाव आयोजित करने या एक नए विजेता की घोषणा की जा सकती है।

निर्वाचन याचिका का इतिहास

ऐसा सबसे प्रसिद्ध मामला वर्ष 1975 का था इसमें इलाहाबाद उच्च न्यायालय का निर्णयचर्चा में था , जिसके तहत 4 वर्ष पूर्व (वर्ष 1971) रायबरेली निर्वाचन क्षेत्र से इंदिरा गांधी के चुनाव को भ्रष्ट आचरण के आधार पर रद्द कर दिया गया था।

जनप्रतिनिधि अधिनियम, 1951

  • यह चुनावों और उपचुनावों के वास्तविक संचालन को नियंत्रित करता है।
  • यह चुनाव आयोजित कराने के लिये प्रशासनिक मशीनरी भी प्रदान करता है।
  • यह राजनीतिक दलों के पंजीकरण को भी नियंत्रित करता है।
  • जनप्रतिनिधि अधिनियम, 1951 की धारा 123 में भ्रष्ट आचरण की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान की गई है, जिसमें रिश्वतखोरी, बल प्रयोग या ज़बरदस्ती अथवा धर्म, जाति, समुदाय और भाषा के आधार पर वोट की अपील करना आदि शामिल हैं।
  • यह सदनों की सदस्यता के लिये योग्यता और अयोग्यता को भी निर्दिष्ट करता है।
  • यह भ्रष्ट आचरण और अन्य अपराधों को रोकने का प्रावधान करता है।
  • यह चुनावों से उत्पन्न होने वाले संदेहों और विवादों को निपटाने की प्रक्रिया निर्धारित करता है।

स्रोत – इंडियन एक्सप्रेस

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