प्रश्न – UBI (सार्वभौमिक मूलभूत आय) के समर्थकों का यह विचार है कि बिना-शर्त के (नो- स्ट्रिंग – अटैच्ड) भुगतान , भारत के न्यून प्रभावशील निर्धनता निवारक कार्यक्रमों और क्षरक, विरूपित सब्सिडी का उचित निदान है। चर्चा करें।

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प्रश्न – UBI (सार्वभौमिक मूलभूत आय) के समर्थकों का यह विचार है कि बिना-शर्त के (नो- स्ट्रिंग – अटैच्ड) भुगतान , भारत के न्यून प्रभावशील निर्धनता निवारक कार्यक्रमों और क्षरक, विरूपित सब्सिडी का उचित निदान है। चर्चा करें। – 9 April 

उत्तर:

कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने हेतु जारी निर्बंधन (लॉकडाउन) के कारण देश के भीतर सभी प्रकार की आर्थिक गतिविधियाँ शिथिल हैं। ऐसे में भारतीय अर्थव्यवस्था पर आर्थिक मंदी का खतरा पूरी तरह टला नहीं है। देश में व्यापक स्तर पर रोज़गार समाप्त हो गए हैं, फलतः इस संकट की घड़ी में स्वास्थ्य के साथ ही लोगों की आजीविका भी खतरे में है। कर्मचारियों के काम वेतन तथा उनकी छटनी ने गंभीर समस्या को जन्म दे दिया है। 

इस समय स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए आर्थिक गतिविधियों को बनाए रखना, सरकार की प्रमुख चुनौती है।  ऐसी  परिस्थिति में सार्वभौमिक मूलभूत आय की योजना, जिसे विश्व के कई उन्नत इकॉनमी ने अपनाया है , एक प्रभावकारी उपाय सिद्ध हो सकता है।

सार्वभौमिक मूलभूत आय (UBI)

UBI एक शर्त रहित आवधिक नकद भुगतान है, जो सभी को अर्थव्यवस्था में उनके योगदान के निरपेक्ष दिया जाता है। UBI की निम्नलिखित 5 विशेषताएं हैं:

  • आवधिक (नियमित अंतराल पर किया जाने वाला भुगतान)
  • नकद भुगतान
  • व्यक्तिगत (घरों या परिवारों के लिए नहीं),
  • सार्वभौमिक (लक्षित नहीं)और शर्त रहित (नौकरी में व्याप्त संभावनाओं या आय को महत्व दिए बिना)

यूनिवर्सल बेसिक इनकम से लाभ:

  • वर्तमान में सरकार विभिन्न प्रकार की सामाजिक जन कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से लोगों के कल्याण को सुनिश्चित करने में प्रायसरत है लेकिन अब सरकार उन्हें नकद धन प्रदान कर इस प्रवृत्ति में बदलाव लाना चाहती है जिससे लोग अपनी आवश्यकता के अनुसार सेवाओं/वस्तुओं को सुलभता से प्राप्त कर सकें।
  • वर्तमान में महामारी के कारण चल रहे आर्थिक संकट के मध्य यह योजना, देश के लोगों को अतिरिक्त क्रय शक्ति प्रदान करेगी जिससे देश में उत्पादनकारी व निर्माणकारी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
  • इस योजना का क्रियान्वयन अपेक्षाकृत सरल है क्योंकि इसमें लाभार्थियों को चिन्हित करने की आवश्यकता नहीं होती। यह योजना सरकारी धन के अपव्यय और भ्रष्टाचार को कम करेगी क्योंकि इसका कार्यान्वयन बहुत सरल है और दिए जाने वाला धन सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में भेजा जायेगा।

अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की तुलना में UBIयोजना के लाभ:

  • प्रशासनिक भार को कम करेगा: वर्तमान में लगभग, 950 केंद्रीय और केंद्र प्रायोजित उप-योजनाएँ हैं जो बजट आवंटन में सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 5% भाग है, व्यवहार में हैं। इस प्रकार की योजना के क्रियान्वयन हेतु व्यापक प्रशासनिक तंत्र की आवश्यकता है।
  • सरल क्रियान्वयन:ICDS और PDS जैसी लक्षित कल्याणकारी योजनाओं में लाभार्थियों की पहचान करने हेतु व्यापक आधारभूत अन्वेषण तथा प्राप्त नियोजित धनराशी के दुरुपयोग को रोकने के लिए अंकेक्षण की आवश्यकता होती है। हालांकि, एक सामूहिक रूप में UBI का वितरण एवं निगरानी करना सरल होगा।
  • व्यक्तिगत स्वतंत्रता: यह वर्तमान में मिल रहे लाभों (सब्सिडी, लाभ अंतरण या अन्य) के स्थान पर कुछ अलग चुनने की स्वतंत्रता को वरीयता देता है। यह निर्धनता को कम कर, समानता को बढ़ावा देता है, सरकारी स्थानांतरणों में होने वाले क्षरण को कम कर दक्षता में वृद्धि करता है |
  • उत्पादकता में वृद्धिः मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रो में UNICEF और SEWA द्वारा 2011 के एक अध्ययन से ज्ञात हुआ है कि मूलभूत आय प्राप्त होने पर लोगों की उत्पादकता में वृद्धि दर्ज की गयी। जबकि वहीं MGNREGA जैसी योजना उत्पादक रोजगार देने में विफल होने के कारण जाँच के दायरे में आ चुकी हैं।
  • ऋण व्यवस्था और व्यवसाय की स्वतंत्रता: कृषि छूट योजनाओं के विपरीत, UBI ऋण व्यवस्था को बाधित नहीं करता है और लोगों को कुछ निश्चित व्यवसायों तक ही सीमित नहीं करता है (जैसे- वर्तमान में खेत संबंधी लाभ अंतरण प्राप्त करने के लिए व्यक्ति का कृषक होना आवश्यक है)।
  • किसान-केंद्रित योजना की तुलना में, सार्वभौमिक मूलभूत आय अधिक आकर्षक बनी हुई है क्योंकि, यह व्यवसाय या भूमि के स्वामित्व के आधार पर भेदभाव नहीं करती है और कार्य करने हेतु लक्ष्यीकरण की सटीकता पर निर्भर नहीं होती है।

आधारभूत आय का विचार भारतीय जनता के स्वास्थ्य, शिक्षा व अन्य नागरिक सुविधाओं में सुधार के साथ, उनके जीवन-स्तर को उन्नत करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास होगा परन्तु सबके लिये एक आधारभूत आय तब तक संभव नहीं है जब तक कि वर्तमान की सभी योजनाओं के माध्यम से दी जा रही सब्सिडी को खत्म न कर दिया जाए।  अतः सभी भारतवासियों के लिये एक बेसिक इनकम की व्यवस्था करने की बजाय सामाजिक-आर्थिक जनगणना के आधार पर, समाज के सर्वाधिक वंचित वर्ग के लिये एक निश्चित आय की व्यवस्था करना कहीं अधिक प्रभावी और व्यावहारिक प्रतीत होता है।  

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