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प्रश्न – “हरित ऊर्जा के लिए बजट 2021” पर चर्चा करते हुए, हरित हाइड्रोजन की आवश्यकता समझाइये।

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प्रश्न – “हरित ऊर्जा के लिए बजट 2021” पर चर्चा करते हुए, हरित हाइड्रोजन की आवश्यकता समझाइये। – 12 May 

उत्तर:

वर्ष 2020 को शक्ति और अक्षय ऊर्जा लक्ष्योंमें अद्वितीय परिवर्तनों के वर्ष के रूप में विशेष रूप में चिह्नित किया जाएगा। जबकि आपूर्ति श्रृंखला और खपत में कम मांग और बढ़ती इनपुट लागत के कारण एक महत्वपूर्ण परिवर्तन देखा गया है , इसके साथ ही महामारी ने भारत में ऊर्जा संक्रमण को भी सुगम बनाया।सरकार ने विभिन्न प्रोत्साहन प्रदान करके इस क्षेत्र को पुनर्जीवित करने और हरित ऊर्जा और EVs जैसे जुड़े क्षेत्रों के लिए एक बहुत ही आवश्यक प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा करके महत्वपूर्ण नेतृत्वकारी भूमिका निभाई है। इसके अतिरिक्त, नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को 2022 तक 175 GW से एक और अधिक महत्वाकांक्षी 220 गीगावाट (GW) में संशोधित किया गया, जो कि “आत्मनिर्भर-भारत”एजेंडा को एक बल  देने के लिए है ।

मुख्य बिंदु:

  • बजट सुधार विशेष रूप से हरित विकास पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
  • इस पहल से भारत में स्वच्छ ईंधन की खपत बढ़ने की उम्मीद है।
  • इस बजट वर्ष 2021-22 के माध्यम से सौर विनिर्माण, वाहन स्क्रैपेज पॉलिसी, एवं हाइड्रोजन ऊर्जा मिशन में उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (Production-Linked Incentive- PLI) योजना के बारे में बल दिया गया है।
  • PLI योजना को उन्नत रसायन सेल (Advance Chemistry Cell- ACC) में भी विस्तारित किया गया है।
  • बजट ने खनिजों और दुर्लभ-तत्व-आधारित बैटरी पर निर्भरता को कम करने की दिशा में एक दीर्घकालिक लक्ष्य के साथ एक तकनीकी विकास और ऊर्जा भंडारण के रूप में हरे हाइड्रोजन पर जोर दिया।
  • यह पहली बार है कि 20,000 बसों के लिए 18,000 करोड़ के निजी वित्तपोषण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के साथ अभिनव वित्तपोषण का प्रस्ताव किया जा रहा है। यह भारत में सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों और बसों के कामकाज के क्षेत्र में क्रांति लाएगा।
  • इस पहल का उद्देश्य निजी वाहनों पर निर्भरता को कम करना एवं इस प्रकार अंततः कार्बन फुटप्रिंट को कम करना है।

वाहन स्क्रैपेज पॉलिसी

  • यह नीति पुराने एवं अनुपयुक्त वाहनों को चलन से बाहर निष्कासित करने के लिये प्रारम्भ की जाएगी।
  • योजना के अंतर्गत 20 वर्ष से अधिक पुराने निजी वाहन एवं 15 वर्ष से अधिक पुराने व्यावसायिक वाहन स्क्रैप किये जाने के योग्य होंगे।
  • इससे ईंधन कुशल, पर्यावरण अनुकूल वाहनों को प्रोत्साहित करने में सहायता मिलेगी जिससे वाहनों के प्रदूषण एवं तेल आयात व्यय खाते में कमी आएगी।
  • निर्धारित अवधि पूरी होने के पश्चात् वाहनों का स्वचालित फिटनेस केंद्रों में, फिटनेस परीक्षण किया जाएगा।

राष्ट्रीय हाइड्रोजन ऊर्जा मिशन:

  • राष्ट्रीय हाइड्रोजन ऊर्जा मिशन का उद्देश्य पेट्रोलियम उपयोग, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन एवं वायु प्रदूषण को कम करना तथा अधिक विविध और कुशल ऊर्जा अवसंरचना में योगदान करना है।
  • हरित ऊर्जा स्रोतों से हाइड्रोजन उत्पन्न करने के लिये वर्ष 2021-22 में हाइड्रोजन ऊर्जा मिशन प्रारंभ किया जाना प्रस्तावित है।
  • हरित हाइड्रोजन मिशन इस्पात एवं सीमेंट जैसे भारी उद्योगों से न केवल कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिये आवश्यक है, बल्कि यह स्वच्छ ऊर्जा आधारित इलेक्ट्रिक वाहनों (जो दुर्लभ तत्त्वों के उपयोग पर आधारित नहीं हैं) के लिये मार्ग प्रशस्त करने हेतु भी महत्त्वपूर्ण है।

हरित ऊर्जा एवं सरकार:

अग्रणी देशों में भारत: ऊर्जा क्षेत्र अथवा अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के मामले में भारत अग्रणी देशों की सूची में शामिल है।

  1. भारत अपनी ऊर्जा अर्थव्यवस्था के मामले में विश्व में पाँचवें स्थान पर है।
  2. भारत विश्व में चौथा सबसे बड़ा स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता वाला देश है एवं विश्व में तीसरा सबसे बड़ा स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वाला देश है।

सौर ऊर्जा: जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन (Jawaharlal Nehru National Solar Mission- JNNSM) का लक्ष्य वर्ष 2022 तक 20 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना है।

  1. हालाँकि वर्ष 2015 के केंद्रीय बजट में वर्ष 2022 तक सौर ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य 20 गीगावाट से बढ़ाकर 100 गीगावाट कर दिया गया था।
  2. भारत की कुल सौर ऊर्जा क्षमता वर्ष 2014 से जून 2020 के बीच 11 गुना से अधिक बढ़ गई है, यह 2.6 गीगावाट से 38 गीगावाट हो गई है।
  3. घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिये सौर इनवर्टर पर प्रशुल्क 5% से बढ़ाकर 20% और सौर लैम्प पर 5% से बढ़ाकर 15% कर दिया गया है।

नवीकरणीय ऊर्जा: भारत सरकार ने वर्ष 2022 के अंत तक 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

  1. इसमें पवन ऊर्जा से 60 गीगावाट, सौर ऊर्जा से 100 गीगावाट, बायोमास ऊर्जा से 10 गीगावाट एवं लघु पनबिजली से 5 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना शामिल है।
  2. भारत में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वर्तमान में 136 गीगावाट है, जो इसकी कुल ऊर्जा क्षमता का लगभग 36% है।
  3. वर्ष 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को 450 गीगावाट करने के लक्ष्य की घोषणा की गई थी।

हरित ऊर्जा एवं अवसंरचना विकास: बजट मुख्य रूप से अवसंरचना विकास के क्षेत्र में व्यय करने पर केंद्रित है एवं ऊर्जा को शामिल किये बिना कोई बुनियादी अवसंरचना परियोजना पूर्ण नहीं की जा सकती है।

  1. हालाँकि वर्तमान संदर्भ में इसमें शामिल ऊर्जा, स्वच्छ ऊर्जा होनी चाहिये।
  2. वर्तमान में सौर ऊर्जा 2 रुपए/यूनिट उपलब्ध है जो नए कोयला विद्युत संयंत्र से उत्पन्न ऊर्जा से भी सस्ती है।
  3. सौर पैनलों के निर्माण के लिये PLI योजनाओं द्वारा घरेलू विनिर्माण क्षमता में वृद्धि की गई है।वर्ष 2021-22 के बजट के माध्यम से PLI योजना ऑटोमोबाइल, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक/प्रौद्योगिकी उत्पादों एवं उन्नत रसायन सेल बैटरी (इलेक्ट्रिक वाहनों के लिये) के विनिर्माण सहित 10 क्षेत्रों तक विस्तारित की गई है।

हरित हाइड्रोजन क्यों?

  • हाइड्रोजन एक ऊर्जा भंडारण विकल्प के रूप में कार्य कर सकता है, जो भविष्य में नवीकरणीय ऊर्जा के रिक्त स्थान को भरने के लिये आवश्यक विकल्प होगा।
  • गतिशीलता के संदर्भ में माल ढुलाई अथवा यात्रियों की लंबी दूरी की आवाजाही के लिये यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण पहल है।रेलवे, बड़े जहाज़ों, बसों अथवा ट्रकों में हाइड्रोजन का उपयोग किया जा सकता है जहाँ लंबी दूरी की यात्रा के लिये पर्याप्त क्षमता नह होने के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग नहीं किया जा सकता है।
  • बुनियादी अवसंरचना के साथ-साथ हाइड्रोजन प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य प्राप्त करने की क्षमता रखता है।
  • जापान जैसे विश्व के कई देश हाइड्रोजन को भविष्य के ऊर्जा माध्यम के रूप में अपनाने हेतु अग्रसर हो रहे हैं।जर्मनी एवं कई अन्य यूरोपीय संघ के देशों ने पहले से ही एक महत्त्वाकांक्षी हरित हाइड्रोजन नीति निर्धारित की है।यहाँ तक ​​कि UAE एवं ऑस्ट्रेलिया जैसे देश जिन्हें पारंपरिक रूप से जलवायु कार्रवाई के प्रति पिछड़ा (Laggards) माना जाता है, हरित हाइड्रोजन की ओर अग्रसर है।

हरित ऊर्जा प्राप्ति की ओर बढ़ना वास्तव में एक चहुँमुखी लाभ की स्थिति है, यह न केवल स्वच्छ वातावरण हेतु स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देगी, बल्कि विनिर्माण एवं रोज़गार के विभिन्न क्षेत्रों को भी बढ़ावा देगी।

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