प्रश्न – लोकतंत्र के प्रमुख कार्यों में से एक को निष्पादित करने के बावजूद चुनाव आयोग के पास महत्वपूर्ण शक्तियों की कमी है। क्या आप सहमत हैं? उपयुक्त दृष्टांतों के साथ समझाइए।

Print Friendly, PDF & Email

Upload Your Answer Down Below 

प्रश्न – लोकतंत्र के प्रमुख कार्यों में से एक को निष्पादित करने के बावजूद चुनाव आयोग के पास महत्वपूर्ण शक्तियों की कमी है। क्या आप सहमत हैं? उपयुक्त दृष्टांतों के साथ समझाइए। – 27 April

उत्तर – 

भारत का चुनाव आयोग भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए स्थापित एक स्थायी, स्वतंत्र और संवैधानिक निकाय है। संविधान के अनुच्छेद-324 में, निर्वाचन आयोग में ,  संसद, राज्य विधायिकाओं, भारत के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति  के  चुनाव के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति निहित है।

चुनाव आयोग के कार्य:

भारत का चुनाव आयोग भारत में लोकतंत्र की चार स्तंभ में से एक है, और इस तरह इसे कई प्रकार के कार्यों के लिए प्राधिकृत किया गया है।

  1. यह राजनीतिक दलों को चुनाव के उद्देश्य के लिए पंजीकृत करता है और उन्हें उनके प्रदर्शन के आधार पर राष्ट्रीय या राज्य दलों का दर्जा प्रदान करता है।
  2. यह राजनीतिक दलों को मान्यता प्रदान करता है और उन्हें चुनाव चिन्ह आवंटित करता है।
  3. राजनीतिक दलों को मान्यता देने और उन्हें चुनाव चिन्ह आवंटित करने से संबंधित विवादों के निपटारे के लिए अदालत के रूप में कार्य करना।
  4. चुनावी व्यवस्था से संबंधित विवादों में जाँच के लिए अधिकारियों की नियुक्ति करना।
  5. चुनाव के समय पार्टियों और उम्मीदवारों द्वारा पालन किये जाने वाले आचार संहिता का निर्धारण करना।
  6. धांधली, बूथ कैप्चरिंग, हिंसा, और अन्य अनियमितताओं की स्थिति में चुनाव रद्द करना

चुनाव आयोग के नवीनतम घटनाक्रम:

भले ही संसद का संविधान और अधिनियम चुनाव आयोग को दिन-प्रतिदिन के कामकाज के दौरान व्यापक अधिकार प्रदान करते हैं, लेकिन यह इन शक्तियों और कार्यों के उपयोग के संबंध में कई चुनौतियों का सामना करता है।इसी कारण सर्वोच्च नायालय ने निर्वाचन आयोग को दंतहीन की संज्ञा दी है।

  • 2019 के दौरान यह सत्ताधारी पार्टी के सदस्यों द्वारा आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़ी घटनाओं पर कार्रवाई नहीं करने के लिए संदेह के घेरे में आ गया है।
  • VVPAT से संबंधित मुद्दे, बिना लाइसेंस के NAMO टीवी का प्रसारण, EVM के बारे में चिंताएं, सभी ने संस्था के विश्वससनीयता और गैर-पक्षपात प्रकृति के सामने कई प्रश्न चिन्ह लगा दिए हैं।
  • भुगतान आधारित और नकली समाचारों के प्रसार को रोकने के लिए देर से और अपर्याप्त कार्रवाई के लिए ECI की भी आलोचना की जा रही है।
  • 2019 के आम चुनाव के दौरान, प्रमुख सेवानिवृत्त नौकरशाहों के एक समूह ने राष्ट्रपति को एक पत्र लिखा जिसमें शीर्ष अधिकारियों के स्थानांतरण, राजस्थान के राज्यपाल द्वारा टिप्पणी, वोटों के लिए सेना को शामिल करने, आदि मुद्दों पर प्रकाश डाला तथा निर्वाचन आयोग पर टिपण्णी करते हुए कहा कि “ECI इच्छाहीन आचरण और विश्वसनीयता के संकट से पीड़ित है।”

2019 के लोकसभा चुनाओं के समय नफरती भाषण देने पर प्रमुख राजनेताओ पर भी चुनाव प्रचार को 72 घंटे तक निलंबित करना, वेल्लोर में मतदान के दौरान धन बल के प्रयोग के कारण चुनाव रद्द करना, सोशल मीडिया और अन्य जागरूकता अभियाओं के कारण अधिक मतदाताओं को सम्मिलित करना, तथा VVPAT के माध्यम से EVM की विश्वससनीयता को मजबूती देना भी ECI के प्रमुख उपलब्धियों में से हैं. हालांकि, इस तथ्य से कोई इनकार नहीं है कि हाल की घटना ने कुछ हद तक विश्वसनीयता को प्रभावित किया है और सुधारों की तत्काल आवश्यकता है-

  • 225 वें विधि आयोग की सिफारिशों का पालन करना और प्रधानमंत्री , नेता प्रतिपक्ष और सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से मिलकर बने एक कॉलेजियम प्रणाली के माध्यम से सभी नियुक्तियां करना।
  • तीनों चुनाव आयुक्तों के लिए समान संवैधानिक सुरक्षा।
  • ECI के खर्चों को भारत की संचित निधि पर भारित करना

निर्वाचन आयोग को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत राजनितिक दलों के पंजीकरण रद्द करने की सकती मिलनी चाहिए।

Open chat
1
Youth Destination IAS . PCS
To get access
- NCERT Classes
- Current Affairs Magazine
- IAS Booklet
- Complete syllabus analysis
- Demo classes
https://online.youthdestination.in/