Youth Destination Logo Final

प्रश्न – “राज्यपाल का विवेकाधिकार, मनमाना या काल्पनिक नहीं हो सकता”, इस प्रकार के किसी भी अनुप्रयोग के सन्दर्भ में और अधिक ध्यान देने की आवश्कता है | टिपण्णी करें |

Share with Your Friends

Upload Your Answer Down Below 

प्रश्न – “राज्यपाल का विवेकाधिकार, मनमाना या काल्पनिक नहीं हो सकता”, इस प्रकार के किसी भी अनुप्रयोग के सन्दर्भ में और अधिक ध्यान देने की आवश्कता है | टिपण्णी करें – 11 May

उत्तर:

          यह एक स्वीकृत सिद्धांत है कि संसदीय लोकतंत्र में सरकार के एक जिम्मेदार रूप के साथ, राज्य के संवैधानिक या औपचारिक प्रमुख के रूप में राज्यपाल की शक्तियों को वास्तविक कार्यकारी, जैसे-मंत्रिपरिषद की कीमत पर नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने में राज्यपाल की महत्त्वपूर्ण भूमिका है क्योंकि वह केंद्र और राज्य सरकार के बीच एक महत्त्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है। इस भूमिका के तहत उसे अनुच्छेद 163(1) और अनुच्छेद 163(2) के अनुसार कुछ विवेकाधीन शक्तियों प्राप्त हैं। इन शक्तियों के अनुसार यदि कोई मुद्दा राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियों से संबंधित है तो उसका निर्णय अंतिम होगा। इस प्रकार, ऐसा प्रतीत होता है कि राज्यपाल को व्यापक शक्तियाँ प्राप्त हैं।

परन्तु, इन शक्तियों के व्यापक निरूपण (wide formulation) तथा अविवेकपूर्ण इस्तेमाल के कारण विभिन्न चिंताएँ उत्पन्न हुई हैं। उदाहरणार्थ:

  • अनुच्छेद 200 और 201: राज्यपाल को किसी भी विधेयक पर अपनी स्वीकृति रोकने के साथ-साथ उस विधेयक कोराष्ट्रपति के विचार हेत आरक्षित करने की शक्ति प्राप्त है। राज्यों द्वारा आरोप लगाया जाता है कि इस प्रावधान का राज्यपाल द्वारा केंद्र के इशारे पर प्रायः दुरुपयोग किया जाता है।
  • अनुच्छेद 356: राज्य में संवैधानिक आपात लागू करने की संस्तुति करना। राजनीतिक लाभ हेतु केंद्र सरकार द्वारा इस शक्ति का अब तक लगभग 120 बार दुरुपयोग किया जा चुका है।
  • अनुच्छेद 164: मुख्यमंत्री की नियुक्ति। त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में सरकार बनाने के लिए एक दल को आमंत्रित करने के राज्यपाल के विवेकाधिकार पर प्राय: प्रश्न उठाये जाते हैं। गोवा और मणिपुर के चुनाव इसके हालिया उदाहरण हैं।
  • राज्यपाल को संविधान का परिरक्षण, सरंक्षण और बचाव करने का कर्तव्य सौंपा गया है। हालाँकि राज्यपाल प्रायः केंद्र के अभिकर्ता के रूप में ही कार्य करते हैं।

आगे की राह:

  • इसमें कोई संदेह नहीं है कि राज्यपालों की नियुक्ति और उनके कार्यकाल से संबंधित प्रावधानों में बड़े सुधारों की आवश्यकता है।
  • वर्ष 1970 में गठित राजमन्नार समिति की सिफारिशों को लागू किया जाना चाहिये और राज्यपालों की नियुक्ति प्रक्रिया में राज्यों को भी शामिल किया जाना चाहिये। उल्लेखनीय है कि केंद्र-राज्य समीकरणों में असंतुलन को दूर रखने की शुरुआत इस तरह के सुधार से की जा सकती है।
  • राज्यपालों द्वारा लिये गए निर्णयों को न्यायिक जाँच के अधीन लाया जाना चाहिये जिसमें उस निर्णय तक पहुँचने के लिये प्रयोग किये गए स्रोत भी शामिल हों।
  • राज्यपाल के कार्यालय से जुड़ी शक्तियाँ और विशेषाधिकार जवाबदेही तथा पारदर्शिता के साथ संलग्न होने चाहिये।
  • राज्यपाल को अपने दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन करने में सक्षम बनाने के लिये राज्य सरकारों, केंद्र सरकार, संसद और राज्य विधानसभाओं द्वारा अनुमोदित एक ‘सहमत आचार संहिता’ विकसित की जानी चाहिये।
  • राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियों पर अंकुश लगाया जाना चाहिये और मुख्यमंत्री की नियुक्ति को लेकर उचित दिशा-निर्देश होने चाहिये।

राज्यपाल के विवेकाधिकार को सीमित करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ वाद में कहा गया कि राज्य कार्यपालिका पर संघीय कार्यपालिका का नियंत्रण भारतीय संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है। सरकारिया आयोग की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि, “कार्यवाही के चयन का सीमित क्षेत्र भी मनमाना नहीं होना चाहिए। यह चयन ऐसा हो जिसमें तर्कों के आधार पर चर्चा, सद्भावना द्वारा उत्प्रेरण और सावधानी के साथ तैयारी का समावेश हो।” इसके साथ ही यदि राज्यपाल संविधान की रक्षा करने में असफल रहे, तो एक नागरिक को यह अधिकार होना चाहिए कि वह न्यायालय के माध्यम से इसके उपचार की मांग कर सके। इस सन्दर्भ में, सर्वोच्च न्यायालय ने शमशेर सिंह बनाम पंजाब राज्य जैसे मामलों के माध्यम से उस पूर्ण उन्मुक्ति (absolute immunity) को दरकिनार कर दिया है, जिसका दावा राज्यपाल के कार्यालय द्वारा किया जा सकता है।

Click to Join Our Current Affairs WhatsApp Group

Join Our Whatsapp Group For Daily, Weekly, Monthly Current Affairs Compilation & Daily Mains Answer Writing Test & Current Affairs MCQ

In Our Current Affairs WhatsApp Group you will get daily Mains Answer Writing Question PDF and Word File, Daily Current Affairs PDF and So Much More in Free So Join Now

Register For Latest Notification

Register Yourself For Latest Current Affairs

October 2022
M T W T F S S
« Sep    
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31  

Mains Answer Writing Practice

Recent Current Affairs (English)

Current Affairs (हिन्दी)

Subscribe Our Youtube Channel

Register now

Get Free Counselling Session with mentor

Download App

Get Youth Pathshala App For Free

Open chat
1
Youth Destination IAS . PCS
To get access
- NCERT Classes
- Current Affairs Magazine
- IAS Booklet
- Complete syllabus analysis
- Demo classes
https://online.youthdestination.in/