प्रश्न – भारत में महिलाओं के यौन और प्रजनन स्वास्थ्य अधिकारों का उल्लंघन अक्सर सामाजिक मूल्यों और परंपराओं में गहराई से अंतर्निहित होता है। टिपण्णी कीजिए।

प्रश्न – भारत में महिलाओं के यौन और प्रजनन स्वास्थ्य अधिकारों का उल्लंघन अक्सर सामाजिक मूल्यों और परंपराओं में गहराई से अंतर्निहित होता है। टिपण्णी कीजिए। – 25 August 2021

उत्तर

यौन और प्रजनन स्वास्थ्य और संबंधित अधिकारों तक पहुंच एक मौलिक मानव अधिकार है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि दुनिया भर में महिलाओं और लड़कियों को यौन और प्रजनन स्वास्थ्य अधिकारों से वंचित किया जाता है। दुनिया भर में 214 मिलियन महिलाओं के पास गर्भनिरोधक उपायों तक पहुंच नहीं है। गर्भावस्था और प्रसव से संबंधित रोके जा सकने वाले कारणों उपायों के बावज़ूद  प्रतिदिन 800 से अधिक महिलाओं की मृत्यु हो जाती है।

प्रायः इन अधिकारों का उल्लंघन पारंपरिक रूप से समाज द्वारा निर्धारित और अनुसरित किए जाने वाले अमूर्त भावनाओं तथा सांस्कृतिक मानकों द्वारा किया जाता है, जिसे निम्नलिखित रूप से समझा जा सकता है:

  • पितृसत्तात्मक समाज में महिलाओं को उनकी प्रजनन क्षमता के आधार पर आंका जाता है। इससे उन्हें जल्दी विवाह और गर्भधारण का सामना करना पड़ता है, या लड़का पैदा करने के प्रयास में छोटी अवधि में बार-बार गर्भधारण करना पड़ता है।
  • गर्वित मातृत्व की अवधारणा संतान की आवश्यकताओं के समक्ष माताओं की प्रसवोत्तर देखभाल को गौण बना देती है।
  • मासिक धर्म भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है जिसके साथ सांस्कृतिक वर्जनाएं और अंधविश्वास गहरी जड़ें जमा चुके हैं। इसके अलावा, संबंधित स्वच्छता और स्वास्थ्य प्रथाओं के बारे में जागरूकता की कमी, मासिक धर्म को सुरक्षित रूप से प्रबंधित करने के लिए आवश्यक सामग्री की अनुपलब्धता, शौचालय तक पहुंच की कमी से संबंधित समस्याएं आदि इसे और अधिक जटिल बनाती हैं।
  • लैंगिक भेदभाव दहेज प्रथा को प्रोत्साहित करता है, जो बालिकाओं के प्रति पूर्वाग्रह को बढ़ावा देता है। यह जबरन और असुरक्षित गर्भपात को प्रोत्साहित करता है।
  • महिलाओं को अंतर्गर्भाशयी उपकरणों का उपयोग करने के बोझ का सामना करना पड़ता है, और वे नसबंदी/यूटरोटॉमी से भी गुजरती हैं, जो उन्हें मूत्र पथ के संक्रमण और अन्य जटिलताओं के प्रति संवेदनशील बनाती है।
  • महिलाओं की कामुकता और असमान शक्ति संबंधों जैसी विभिन्न रूढ़ियों के कारण, महिलाएं अक्सर सेक्स से इनकार करने या सुरक्षित यौन संबंध के लिए दबाव बनाने में असमर्थ होती हैं, जो उन्हें एचआईवी / एड्स सहित कई यौन संचारित रोगों की चपेट में ले आती है।
  • शुद्धता के नियम (आमतौर पर धर्म द्वारा स्वीकृत) अनावश्यक हस्तक्षेप उत्पन्न करते हैं, जैसे कि महिला जननांग विकृति, जबरन कौमार्य परीक्षण। कई समाजों में परिवार नियोजन, गर्भपात और गर्भनिरोधक उपायों को वर्जित माना जाता है।
  • शिक्षा तक पहुंच का अभाव अंततः महिलाओं को यौन और प्रजनन स्वास्थ्य अधिकारों के प्रति अज्ञानता की ओर ले जाता है।

राजनीतिक-आर्थिक स्थितियाँ, जैसे प्रजनन स्वास्थ्य पर बजटीय बाधाएँ, परिवार नियोजन, आदि, महिलाओं के लिए यौन और प्रजनन स्वास्थ्य अधिकारों की उपलब्धता को निर्धारित करने में सामाजिक मूल्यों और मानदंडों की भूमिका को सुदृढ़ करती हैं।

इसे स्वीकार करते हुए, भारत सरकार द्वारा कुछ कदम उठाए गए हैं –

  • प्रजनन, मातृ, नवजात शिशु, बाल और किशोर स्वास्थ्य (RMNCH+A) दृष्टिकोण (जिसे ‘निरंतर देखभाल’ की समझ प्रदान करने के लिए विकसित किया गया है) को अपनाना ताकि विभिन्न जीवन चरणों पर समान रूप से ध्यान केंद्रित किया जा सके।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 में महिलाओं के स्वास्थ्य और लैंगिक मुद्दों को मुख्य धारा में लाने की परिकल्पना की गई है; प्रजनन आयु वर्ग (40+) से अधिक महिलाओं की प्रजनन रुग्णता और स्वास्थ्य आवश्यकताओं के लिए उन्नत प्रावधान शामिल हैं।
  • राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम जैसी योजनाओं का संचालन करना, जिसमें यौन प्रजनन स्वास्थ्य मुख्य क्षेत्रों में से एक है।

बीजिंग में आयोजित महिलाओं पर चौथे विश्व सम्मेलन की घोषणा के अनुरूप, सभी महिलाओं के लिए समानता, विकास और शांति के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए महिलाओं के यौन और प्रजनन स्वास्थ्य के साथ-साथ शिक्षा को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य सेवाओं का सार्वभौमिकरण, महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए प्रसवपूर्व और प्रसवोत्तर देखभाल का मानकीकरण और महिलाओं के प्रजनन और यौन स्वास्थ्य के मामले में पूर्ण शारीरिक, सामाजिक और मानसिक कल्याण की स्थिति सुनिश्चित करने के लिए व्यवहार परिवर्तन के माध्यम से कई प्रयास किए जाने बाकी हैं।

Download our APP – 

Go to Home Page – 

Buy Study Material – 

Share with Your Friends

Join Our Whatsapp Group For Daily, Weekly, Monthly Current Affairs Compilations

Related Articles

Youth Destination Facilities