प्रश्न : “भारतीय आर्थिक संवृद्धि , बढ़ती असमानता से जुड़ी है”। इसके क्या कारण हो सकते हैं, तथा इसकोन्यूनतम करने का क्या उपाय है?

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प्रश्न : “भारतीय आर्थिक संवृद्धि , बढ़ती असमानता से जुड़ी है”। इसके क्या कारण हो सकते हैं, तथा इसकोन्यूनतम करने का क्या उपाय है? – 2 April

उत्तर:

  • वर्ल्ड सोशल रिपोर्ट, 2020 के अनुसार, “ तीव्र गति से बदलते वैश्विक परिदृश्य में असमानता तब प्रतिबिंबित होती है। जब हम गहन असमान विश्व की कठोर वास्तविकताओं का सामना करते हैं, उत्तर और दक्षिण दोनों में , आर्थिक संकट, बढ़ती असमानता और नौकरी की असुरक्षा के संयोजन ने बड़े पैमाने पर विद्रोह प्रदर्शनों को जन्म दिया है ।आय असमानता और अवसरों की कमी, असमानता, हताशा और असंतोष के दुष्चक्र का कारण है।
  • भारत का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2000 से 2019 के बीच पाँच गुना बढ़ गया जो, तत्कालीन 443 अमेरिकी डालर से बढ़कर, 2019 में, 2014 अमेरिकी डालर हो गया।
  • इसका अर्थ यह नहीं है कि पूरी आबादी की आय में वृद्धि हुई है। भारत में शीर्ष एक प्रतिशत ने 2019 में देश की कुल आय का 21 प्रतिशत अर्जित किया। यह 1990 में 11 प्रतिशत था।
  • शीर्ष 10 प्रतिशत ने 2019 में देश की कुल आय का 56 प्रतिशत अर्जित किया; तथा निचले 10 प्रतिशत ने केवल 3.5 प्रतिशत अर्जित किया।
  • धन वितरण की भी समान कहानी है। 2019 में सबसे अमीर 10 प्रतिशत भारतीयों के पास 80.7 प्रतिशत संपत्ति थी।
  • गिनी गुणांक भारत में बढ़ती असमानता की ओर इशारा करता है। 2014 में गुणांक 34.4 प्रतिशत था (100 प्रतिशत पूर्ण असमानता और 0 प्रतिशत पूर्ण समानता दर्शाता है)।2011 में गुणांक 35.7 प्रतिशत और 2018 में बढ़कर 47.9 प्रतिशत हो गया।
  • कृषि कार्य गांवों में आजीविका के प्रमुख मार्गों में से एक है। 2011 की नवीनतम जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कुल 26.3 करोड़ परिवार खेती की गतिविधियों में शामिल हैं।2010-11 और 2015-16 के दौरान लघु और सीमांत किसानों का अनुपात 84.9 प्रतिशत से बढ़कर 86.2 प्रतिशत हो गया, जबकि परिचालन जोतों (operational land holdings) की कुल संख्या 138 मिलियन से 146 मिलियन हो गई।

असमानताओं को कम करने के उपाय:

गहन समावेशी विकास:समावेशी विकास एजेंडे का प्रचार और उसे अपनाना, बढ़ती असमानता की समस्या का एकमात्र समाधान है। आर्थिक विकास जो समावेशी नहीं है, वह केवल असमानता को बढ़ाएगा।

कौशल विकास: यदि भारत अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का उपयोग करना चाहता है, तो युवाओं के बीच उन्नत कौशल का विकास एक पूर्वाकांक्षित शर्त है।शिक्षा में बढ़ते निवेश के साथ कुशल युवा ही एकमात्र तरीका है जिससे हम असमानता को कम कर सकते हैं।भारत को एक कौशल-नेतृत्व वाली अर्थव्यवस्था बनने की आवश्यकता है।

प्रगतिशील कर संरचना: अमीरों और विलासिता पर उच्च करों से आय की असमानताओं को कम करने में सहयोग मिलेगा।

सभी के लिए समान अवसर: सरकार कुछ ऐसी मशीनरी स्थापित कर सकती है जो सभी नागरिकों को रोजगार पाने और व्यापार और उद्योग में एक समान अवसर प्रदान कर सकती है।दूसरे शब्दों में, पेशे की पसंद के मामले में, परिवार के प्रभाव को खत्म करने के लिए कुछ अतिरिक्त प्रयास किया जा सकता है।उदाहरण के लिए, सरकार उदार मासिक वजीफे और छात्रवृत्ति की एक प्रणाली स्थापित कर सकती है, जिससे समाज के सबसे गरीब व्यक्ति भी, उच्चतम शिक्षा और तकनीकी कौशल प्राप्त कर सकें।

इस प्रकार, “निम्न असमानता”, देश के वास्तविक आर्थिक प्रगति के मूल में निहित है, जिसको निम्नतम करके ही, समावेशी विकास की कल्पना की जा सकती है .

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