प्रश्न – ब्रिटिश काल के दौरान सामाजिक- धार्मिक सुधार आन्दोलनों के भारतीय समाज पर सकारात्मक प्रभावों की संक्षिप्त चर्चा कीजिये।

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प्रश्न – ब्रिटिश काल के दौरान सामाजिक- धार्मिक सुधार आन्दोलनों के भारतीय समाज पर सकारात्मक प्रभावों की संक्षिप्त चर्चा कीजिये। – 5 july 2021

उत्तर – 

1813 ई. के चार्टर एक्ट के बाद ब्रिटिश शासन ने अपने औद्योगिक हितों एवं व्यापारिक लाभ के लिए सीमित हस्तक्षेप प्रारम्भ कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप कालान्तर में सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों का जन्म हुआ।

सामाजिक- धार्मिक सुधार आन्दोलनों के भारतीय समाज पर सकारात्मक प्रभाव:

  • आधुनिक शिक्षा, ज्ञान, विज्ञान, दर्शन एवं साहित्य के अध्ययन में लोगों की रूचि में वृद्धि हुई।
  • देश में स्कूलों एवं कॉलेजों की संख्या में वृद्धि हुई।
  • महिलाओं की स्थिति में भी कुछ सुधार हुआ। सती प्रथा, बाल विवाह तथा पर्दा प्रथा में कमी आई एवं उनकी शिक्षा का विकास हुआ।
  • सभी सुधारकों द्वारा वेदों के पुन: अध्ययनएवं संस्कृति के गौरव गान से, भारतीयों में स्वतंत्रता व राष्ट्रीयता की भावना को और मजबूती प्रदान की।
  • इन सुधार आंदोलनों से पूरे देश में एक नई जागृति फैली तथा सांस्कृतिक चेतना का विकास हुआ।

निष्कर्ष:

उन्नीसवीं शताब्दी में भारत में जो धार्मिक एवं सामाजिक सुधार आंदोलन का विकास हुआ उसके प्रभाव से भारतीय समाज के शैक्षणिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक प्रत्येक क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिले।

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