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प्रश्न – फ्रंटियर प्रौद्योगिकी क्या है? इसमें निहित चुनौतियों का वर्णन करें।

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प्रश्न – फ्रंटियर प्रौद्योगिकी क्या है? इसमें निहित चुनौतियों का वर्णन करें। – 6 May

उत्तर – 

औद्योगिक क्रांति के साथ शुरू हुए तकनीकी परिवर्तन के युग ने न केवल विश्व अर्थव्यवस्था को एक नया आकार दिया है, बल्कि दक्षता और वैश्वीकरण की गति को तेज करके मानव समाज को बदलने में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित की है। वर्तमान चरण औद्योगिक क्रांति का चौथा चरण है, जिसे ‘फ्रंटियर टेक्नोलॉजी’ के युग के रूप में भी जाना जाता है, तकनीकी परिवर्तन की नवीनतम लहर ने वस्तुओं, सेवाओं और विचारों के आदान-प्रदान की मूल प्रकृति को पूरी तरह से बदल दिया है। यद्यपि बदलती प्रौद्योगिकी की विनाशकारी प्रकृति नई नहीं है, लेकिन यह वैश्विक समाज के सामने नए अवसर पेश कर रही है और साथ ही नीति निर्माण के लिए नई चुनौतियां पेश कर रही है। इन अवसरों का लाभ उठाने और चुनौतियों से निपटने के लिये फ्रंटियर प्रौद्योगिकी हेतु शासन के सभी स्तरों (राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और वैश्विक) पर नीतिगत सहयोग की आवश्यकता है।

फ्रंटियर प्रौद्योगिकी का अर्थ

  • वर्ष 2015 में जब विश्व ने वर्ष 2030 तक सतत् विकास लक्ष्यों की प्राप्त के लिये समझौता किया तब इन लक्ष्यों को प्राप्त के लिये तकनीक को एक महत्त्वपूर्ण साधन के रूप में मान्यता दी गई। वास्तव में कई नवाचार जैसे- न्यूमोकोकल वैक्सीन, माइक्रोफाइनेंस और ग्रीन प्रौद्योगिकी आदि पिछले कुछ दशकों में काफी तेज़ी से हुए हैं, जिससे अकुशल स्वास्थ्य प्रणाली, आर्थिक असमानता और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों को संबोधित करने में मदद मिली है। मोबाइल फोन और इंटरनेट जैसी डिजिटल तकनीकों ने एक ऐसे युग का निर्माण किया है जहाँ विचार, ज्ञान और सूचना आदि पहले से कहीं अधिक स्वतंत्र रूप से प्रवाहित होते हैं।
  • फ्रंटियर प्रौद्योगिकी आधुनिक प्रौद्योगिकी के विकास का अगला चरण है। फ्रंटियर प्रौद्योगिकी को मुख्यतः ऐसी प्रौद्योगिकियों के रूप में परिभाषित किया जाता है जो व्यापक स्तर पर चुनौतियों या अवसरों को संबोधित कर सकती हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, 3Dप्रिंटिंग और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) इत्यादि को फ्रंटियर प्रौद्योगिकी में शामिल किया जाता है।

फ्रंटियर प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग:

  • फ्रंटियर प्रौद्योगिकी ने कृषि, विनिर्माण, अनौपचारिक एवं औपचारिक क्षेत्रों को जोड़ने और घरेलू इंटरकनेक्टिविटी के माध्यम से समृद्धि के नए मार्ग खोले हैं। इसके माध्यम से सरकारी प्रशासन एवं सार्वजनिक सेवाओं के वितरण में महत्त्वपूर्ण सुधार किया जा सकता है।
  • फ्रंटियर प्रौद्योगिकी, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन के खतरों एवं वायु प्रदूषण के प्रभावों का पूर्वानुमान लगाने तथा इनसे निपटने में मददगार साबित हो सकती है।
  • उदाहरण के लिये दक्षिण कोरिया में यातायात प्रदूषण को कम करने, ऊर्जा एवं जल की बचत करने तथा एक स्वच्छ वातावरण बनाने के लिये इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) के माध्यम से सोंगदो (Songdo) स्मार्ट सिटी बनाई गई है।
  • यदि वैश्विक समाज को वर्ष 2030 तक सतत् विकास लक्ष्यों को प्राप्त करना है तो आवश्यक है कि ये अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियाँ समाज एवं पर्यावरण के साथ-साथ अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भी काम करें ताकि विश्व के सभी देश आर्थिक विकास के अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें।

संबंधित चुनौतियाँ

डिजिटल विभाजन में वृद्धि:

  1. चूँकि सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी इन्फ्रास्ट्रक्चर कई फ्रंटियर प्रौद्योगिकियों के लिये अतिमहत्त्वपूर्ण है और विश्व के कई देश इस प्रकार के इन्फ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। अतः इससे एक नए फ्रंटियर प्रौद्योगिकी विभाजन का जोखिम उत्पन्न होता है जो पहले से मौजूद डिजिटल विभाजन के साथ जुड़कर और अधिक व्यापक हो सकता है।
  2. एक अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2023 तक संभवतः 3 बिलियन लोग इंटरनेट के उपयोग से वंचित होंगे और इससे भी अधिक लोगों के पास डिजिटल प्रौद्योगिकी का लाभ प्राप्त करने का बहुत कम अवसर होगा।
  3. प्रौद्योगिकी इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण उत्पन्न डिजिटल विभाजन के परिणामस्वरूप फ्रंटियर प्रौद्योगिकियों से संबंधित लाभ, विश्व के सभी गरीब लोगों तक नहीं पहुँच पाएंगे।

रोज़गार की अनिश्चितता

अनुमान के मुताबिक, फ्रंटियर प्रौद्योगिकी के व्यापक प्रसार से आने वाले दशकों में लगभग 785 मिलियन श्रमिकों के रोज़गार पर खतरा पैदा हो सकता है जो कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कुल रोज़गार का लगभग 50% है।

विश्वास और नैतिकता का प्रश्न

अनुमानतः सदी के मध्य तक विश्व की जनसंख्या 10 बिलियन तक पहुँच जाएगी, जिसके परिणामस्वरूप शासन व्यवस्था वर्तमान की अपेक्षा और अधिक जटिल हो जाएगी। विदित हो कि फ्रंटियर प्रौद्योगिकी स्वयं में कोई समस्या नहीं है, किंतु अत्यधिक विशाल जनसंख्या के कारण गोपनीयता और पारदर्शिता से संबंधित विभिन्न मुद्दे इस संदर्भ में काफी महत्त्वपूर्ण हो जाएंगे।

विकासशील एवं अल्पविकसित देशों पर प्रभाव

विकासशील देश पहले से ही कम मानव पूंजी, संस्थानों की अकुशलता और उपयुक्त व्यापारिक माहौल की कमी जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं जिसके कारण उनके लिये फ्रंटियर प्रौद्योगिकी को अपनाना एवं उससे संबंधित विभिन्न समस्याओं का सामना करना और कठिन हो जाएगा।

विश्लेषकों के अनुसार, विकासशील एवं अल्पविकसित देश तमाम चुनौतियों के बावजूद फ्रंटियर प्रौद्योगिकी की नई लहर से लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इस संदर्भ में आवश्यक है कि प्रौद्योगिकी एवं नवाचार की अगली पीढ़ी के लिये तैयार किये जाने वाले नीतिगत ढाँचे में फ्रंटियर प्रौद्योगिकी हेतु एक सक्षम वातावरण के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाए ताकि अर्थव्यवस्था, समाज और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सके।

इसके लिये निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:

  1. इस संदर्भ में सर्वप्रथम कुशल सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण की आवश्यकता है।
  2. डिजिटल क्रांति के बदलते स्वरूप के अनुरूप श्रमबल। इस संदर्भ में रोज़गार सृजन करने वाले वर्ग के विकास के लिये आजीवन सीखने, नए कौशल विकसित करने और उद्यमिता विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
  3. सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को मज़बूत करने के लिये नीतिगत ढाँचे का निर्माण किया जाना चाहिये ताकि चौथी औद्योगिक क्रांति से लाभ प्राप्त किया जा सके।
  4. एक ऐसे विनियामक ढाँचे की आवश्यकता है जो नवाचार को प्रतिकूल रूप से प्रभावित न करता हो।
  5. ज्ञात हो कि मात्र प्रौद्योगिकी के माध्यम से सफलता सुनिश्चित नहीं की जा सकेगी। नीति निर्माताओं को स्थानीय संदर्भों एवं स्थितियों के प्रति भी उत्तरदायी होना चाहिये ताकि वे एक ऐसे सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक तंत्र का निर्माण कर सकें जिसमें प्रौद्योगिकी से रोज़गार का सृजन होता हो और समावेशी विकास को गति मिलती हो।
  6. विभिन्न राष्ट्र की सरकारों को मुख्यतः चार क्षेत्रों: बुनियादी ढाँचे, मानव पूँजी, नीति नियमन, और वित्त में निवेश हेतु योजना के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिये।

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