प्रथम पीढ़ी के इथेनॉल का उत्पादन

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प्रथम पीढ़ी के इथेनॉल का उत्पादन

पेट्रोल (इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम) के साथ इथेनॉल के सम्मिश्रण लक्ष्यों को प्राप्त करने के उद्देश्य हेतुखाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने पहली पीढ़ी के इथेनॉल उत्पादन हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिये पूर्व में लागू योजना में कुछ संशोधन किया है।

इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम:

पेट्रोल के साथ इथेनॉल को मिश्रित से इसे जैव ईंधन की श्रेणी में लाया जा सकेगा। इसके परिणामस्वरूप ईंधन आयात में कटौती तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी के चलते लाखों डॉलर की बचत होगी।

इसके तहत वर्ष 2025 तक इथेनॉल के सम्मिश्रण को20%  तक बढ़ाना।

खाद्यान्नों से इथेनॉल का निष्कर्षण:

केंद्र सरकार ने वर्ष 2018 में मक्का, ज्वार, फल, सब्जी आदि की अधिशेष मात्रा से ईंधन निकालने के लिये EBP कार्यक्रम के दायरे को बढ़ाया था।

अपेक्षित लाभ:

किसानों की आय बढ़ेगी,रोज़गार में वृद्धि होगी।

क्षमता में वृद्धि या नई भट्टियों की स्थापना में निवेश से ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के नए अवसर सृजित होंगे।

राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति-2018:

इस नीति में ‘आधारभूत जैव ईंधनों’ यानी पहली पीढ़ी (1जी) के बायोइथेनॉल और बायोडीज़ल तथा ‘विकसित जैव ईंधनों’ यानी दूसरी पीढ़ी (2जी) के इथेनॉल, निगम के ठोस कचरे (एमएसडब्‍ल्‍यू) से लेकर ड्रॉप-इन ईंधन, तीसरी पीढ़ी (3जी) के जैव ईंधन, बायो CNG आदि को श्रेणीबद्ध किया गया है, ताकि प्रत्‍येक श्रेणी के अंतर्गत उचित वित्तीय और आर्थिक प्रोत्‍साहन बढ़ाया जा सके।

 

स्रोत: पीआईबी

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