नीली अर्थव्यवस्था

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नीली अर्थव्यवस्था

प्रधान मंत्री ने हाल ही में अपने एक संबोधन में कहा कि नीली अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर भारत का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनने जा रही है।

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  • नीली अर्थव्यवस्था से अभिप्राय आर्थिक विकास, बेहतर आजीविका और रोजगार के लिए महासागरीय संसाधनों का सतत उपयोग करते हुए महासागर पारिस्थितिकी-तंत्र के स्वास्थ्य को संरक्षित करने से है।
  • भारत की कुल अर्थव्यवस्था में नीली अर्थव्यवस्था की भागीदारी 4.1% है।
  • मत्स्य पालन, गहरे समुद्र में खनन और अपतटीय तेल एवं गैस भारत की नीली अर्थव्यवस्था के बड़े घटक हैं।

नीली अर्थव्यवस्था की संभावनाओं को प्राप्त करने के लिए भारत द्वारा किए गए उपाय

  • पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा सागरमाला परियोजना को प्रारंभ किया गया है।
  • यह परियोजना बंदरगाहों के आधुनिकीकरण के लिए सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाओं के व्यापक उपयोग के माध्यम से बंदरगाह आधारित विकास (पोर्ट लैंड डेवलपमेंट ) सुनिश्चित करने वाली एक रणनीतिक पहल है।

मत्स्य संपदा योजना

  • इसका उद्देश्य मत्स्य उत्पादन में अतिरिक्त 70 लाख टन की वृद्धि करना और वर्ष 2024-25 तक मत्स्य निर्यात आय को बढ़ाकर 1 लाख करोड़ रुपये करना है।
  • सागरमाला पहल के अंतर्गत सभी समुद्र तटवर्ती राज्यों को समाविष्ट करते हुए तटीय आर्थिक क्षेत्र (कोस्टल इकोनोमिक जोन – सीइजेड) विकसित किए जा रहे हैं।
  • सीइजेड स्थानिक आर्थिक क्षेत्र हैं। इनमें उस क्षेत्र के बंदरगाहों से गहन रूप से जुड़े हुए तटीय जिलों या अन्य जिलों का एक समूह शामिल है।
  • बहुधात्विक नोड्यूल: भारत को मध्य हिंद महासागर में गहरे समुद्र में खनन के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुद्र तल प्राधिकरणसे स्वीकृति प्राप्त हुई है।

स्रोत – पीआईबी ,द हिन्दू

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