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नासा का इन्जेन्यूटी हेलीकॉप्टर मंगल ग्रह पर भरेगा उड़ान

नासा का इन्जेन्यूटी हेलीकॉप्टर मंगल ग्रह पर भरेगा उड़ान

कुछ समय पूर्व नासा ने घोषणा की कि उसके इन्जेन्यूटी हेलीकाप्टर को मंगल की सतह पर सफलतापूर्वक उतार दिया गया है इसके साथ ही पृथ्वी के अलावा किसी दूसरे ग्रह पर उतरने वाला यह पहला रोटरक्राफ्ट बन गया है।

नासा के अनुसार इन्जेन्यूटी (Ingenuity) मार्स हेलीकॉप्टर 14 अप्रैल को मंगल ग्रह पर अपनी पहली उड़ान भरेगा, जिसके साथ ही , इन्जेन्यूटी दूसरे ग्रह में उड़ान भरने वाला विश्व का पहला नियंत्रित विमान हो जायेगा।

मंगल ग्रह पर रोटरक्राफ्ट

  • मंगल पर रोटरक्राफ्ट की जरूरत इसलिए है क्योंकि वहां की सतह बेहद ऊबड़-खाबड़ है वहां न ऑर्बिटर सक्षम हैं और न रोवर सक्षम हैं, ऐसे में रोटरक्राफ्ट की जरूरत होती है जो उड़ कर मुश्किल जगहों पर जा सके और हाई-डेफिनेशन तस्वीरें ले सके।इसी वजह से मंगल ग्रह के सम्पूर्ण अध्ययन हेतु नासा ने इन्जेन्यूटी नामक रोटरक्राफ्ट को मंगल पर भेजा है।
  • नासा के अनुसार यदि इन्जेन्यूटी हेलिकॉप्टर उड़ान भरने और कुछ दूर घूमने में सफल रहा तो मिशन 90% सफल रहेगा।
  • नासा के पहले मंगल हेलीकॉप्टर का नाम इन्जेन्यूटी (Ingenuity) रखा गया है। यह नाम भारतीय मूल की 17 वर्षीय छात्रा वेनिजा रुपानी ने दिया था।
  • रूपानी ने नासा द्वारा आयोजित ‘नेम द रोवर’ प्रतियोगिता में भाग लिया था जहाँ उनके द्वारा बताए गए नाम को चुना गया .

इन्जेन्यूटी हेलीकाप्टर (Ingenuity Helicopter)

  • विदित हो कि इन्जेन्यूटी दूसरे ग्रह में संचालित उड़ान का एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन है। नासा इन्जेन्यूटी हेलीकॉप्टर की मदद से बहुत सी परीक्षण उड़ानों का प्रदर्शन करेगा।
  • मंगलग्रह पर रात में 130 डिग्री फारेहाईट तक तापमान गिर जाता है, ऐसे में इन्जेन्यूटी हेलीकॉप्टर की मुख्य चुनौती यह है कि इतने कम तापमान में यह कार्य करता रहेगा या नहीं, क्योंकि इतना तापमान इस क्राफ्ट के बैटरियों को फ्रीज और क्रैक कर सकता हैं।
  • यह एक सौर ऊर्जा संचालित हेलीकाप्टर है तथा इसकी गति 2,400 आरपीएम है। इस हेलीकॉप्टर का वजन 8 किलोग्राम है।
  • मंगल मिशन- 2020 के एक भाग के रूप में पेरसेवेरांस रोवर द्वारा इन्जेन्यूटी हेलीकॉप्टर को मंगल ग्रह की सतह पर उतारा गया था।

पेरसेवेरांस रोवर (Perseverance Rover)

  • पेरसेवेरांस रोवर मंगल ग्रह पर भेजा जाने वाला मिशन है जिसका उद्देश्य मंगल में प्राचीन माइक्रोबियल जीवन के संकेतों को खोजना है। इससे पहले ‘क्यूरोसिटी’ रोवर मंगल ग्रह पर भेजा गया था।
  • पेरसेवेरांस रोवर में सात पेलोड इंस्ट्रूमेंट्स, दो माइक्रो फोन और 19 कैमरे हैं।यह मंगल ग्रह मिट्टी को ड्रिल करेगा और मंगल की चट्टानों के मुख्य नमूने एकत्र करेगा।

अन्य देशों के मंगल मिशन:

  • तियानवेन-1 मिशन चीन द्वारा लांच किया गया था।
  • ‘होप ऑर्बिटर’ मिशन यूएई द्वारा लांच किया गया था।

स्रोत – द हिन्दू

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