भारत द्वारा दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से चीता लाने के लिए समझौता

भारत द्वारा दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से चीता लाने के लिए समझौता

हाल ही में भारत ने दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से चीता लाने के लिए समझौतों को अंतिम रूप दे दिया है।

वर्ष 2022 के अंत तक, भारत दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से चीता लाने को तैयार है। इन्हें मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के कूनो पालपुर में बसाने की योजना है।

चीतों के पुनर्वास योजना का क्रियान्वयन पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय कर रहा है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) इसमें मंत्रालय की मदद कर रहा है।

कुनो पालपुर वन्यजीव अभयारण्य (श्योपुर-शिवपुरी वन भूमि) चीता अनुकूल अधिवास, शिकार की बहुतायत आदि के कारण चीते के लिए एक उपयुक्त स्थान है।

यह विश्व में एकमात्र ऐसा वन्यजीव अभयारण्य है, जहां चार बड़ी बिल्ली प्रजातियां; शेर, बाघ, चीता और तेंदुआ एक साथ पायी जाती हैं।

चीता के बारे में:

  • चीता शुष्क वनों, झाड़ीदार वनों और सवाना की एक कीस्टोन प्रजाति है।
  • अत्यधिक शिकार करने और पर्यावास की क्षति के कारण वर्ष 1952 में चीता को भारत में विलुप्त (extinct) घोषित कर दिया गया था।
  • चीता विश्व में सबसे तेज दौड़ने वाला स्थलीय स्तनपायी है।
  • इसे अधिक जल की आवश्यकता नहीं होती है।
  • इसे वन्यजीवों एवं वनस्पतियों की संकटापन्न प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय (CITES) के परिशिष्ट-1 में शामिल किया गया है।

IUCN लाल सूची स्थितिः – अफ्रीकी चीता- वल्नरेबल, एशियाई चीता- क्रिटिकली एनडेंजर्ड।

स्थानांतरण का महत्व

  • एक फ्लैगशिप प्रजाति होने के कारण चीते का संरक्षण, । घास भूमि और इसके बायोम तथा पर्यावास स्थल को पुनर्जीवित करेगा।
  • फ्लैगशिप प्रजाति वस्तुतः ऐसी प्रजातियां होती हैं, जिनके संरक्षण को अन्य जीवों के संरक्षण के साथ सकारात्मक रूप से सहसंबंधित माना जाता है।
  • इको-टूरिज्म की संभावनाओं में वृद्धि से स्थानीय समुदाय की आजीविका में बढ़ोतरी होगी।

स्रोत द हिंदू

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