दुर्लभ रोगों के लिए राष्ट्रीय नीति

दुर्लभ रोगों के लिए राष्ट्रीय नीति

दुर्लभ रोगों के लिए राष्ट्रीय नीति

हाल ही में,केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने “दुर्लभ रोगों के लिए राष्ट्रीय नीति, 2021” को स्वीकृति दे दी है।इसका कारण यह है कि, कुछ समय से विभिन्न हितधारक दुर्लभ बीमारियों की रोकथाम और प्रबंधन के लिए एक समग्र नीति की प्रबल मांग कर रहे हैं।

मुख्य बिंदु:

  • अनेक चुनौतियों के कारण, दुर्लभ बीमारियों का जल्द पता लगाना एक बड़ी और गंभीर समस्या है।
  • दुर्लभ बीमारियों के अनुसंधान व विकास में कई मूलभूत चुनौतिया अन्तर्निहित हैं, जैसे- भारतीय सन्दर्भ में दुर्लभ बीमारियों से सम्बन्धी विकारों से जुडी शारीरिक प्रक्रियायों और प्राकृतिक इतिहास के बारे में न्यूनतम जानकारी उपलब्ध है,साथ ही मरीजों का छोटा समूह,चिकित्सकीय अनुभव के लिए पर्याप्त नहीं है।

दुर्लभ रोग:

  • दुर्लभ बीमारी की कोई सर्वमान्य परिभाषा नहीं है, अलग – अलग देशों में इसकी भिन्न-भिन्न परिभाषा है।
  • अमेरिका, देश के 2 लाख लोगों से कम को प्रभावित करने वाले रोग को, दुर्लभ बीमारी के रूप में परिभाषित करता है, जबकि यूरोपीय संघ,दुर्लभ बीमारीयों को “जीवन- घातक” या कालानुकामिक दुर्बलता के रूप में परिभाषित करता है, जो 10,000 लोगों में, 5 से अधिक को प्रभावित न करे।
  • 86 % दुर्लभ बीमारी, मूलतः आनुवंशिक होती है,इसलिए जन्म लेने वाले बच्चे को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करती है।

दुर्लभ रोगों के लिए राष्ट्रीय नीति, 2021:

  • राष्ट्रीय आरोग्य निधि की अंब्रेला योजना के तहत 20 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता केंद्र सरकार द्वारा उन दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए प्रदान की जाएगी, जिन्हें एकमुश्त उपचार की आवश्यकता होती है।(समूह 1 के तहत सूचीबद्ध बीमारियों)
  • आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के तहत दुर्लभ बीमारियों के मरीज एक बार के इलाज के लिए पात्र होंगे।
  • वित्तीय सहायता के लाभार्थी केवल बीपीएल परिवार से नहीं होंगे, बल्कि यह सहायता लगभग 40% आबादी तक बढ़ेगी, जो केवल पीएमजेएवाई के 23 मानदंडों के तहत सरकारी तृतीयक देखभाल में उपचार के लिए पात्र हैं।
  • नीति ने दुर्लभ बीमारियों को तीन समूहों में वर्गीकृत किया है-
  1. एक बार के उपचार की जरूरत वाली बीमारियाँ
  2. लंबी अवधि या लंबे समय तक उपचार वाले असामान्य रोग
  3. और ऐसी बीमारियां जिनके लिए निश्चित उपचार उपलब्ध है, लेकिन लाभ के लिए इष्टतम रोगी को चुनना चुनौती है।
  • साथ ही,नीति में एक क्राउड फंडिंग व्यवस्था की भी कल्पना भी की गई है, जिसमें निगमों और लोगों को दुर्लभ बीमारियों के उपचार के लिए एक मजबूत आईटी प्लेटफॉर्म के माध्यम से वित्तीय समर्थन देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • एकत्र की गई धनराशि का उपयोग, पहली बार के रूप में दुर्लभ बीमारियों के सभी तीन श्रेणियों के उपचार के लिए उत्कृष्टता केंद्र द्वारा किया जाएगा और फिर शेष वित्तीय संसाधनों का उपयोग अनुसंधान के लिए भी किया जा सकता है।

राष्ट्रीय आरोग्य निधियोजना:

  • इसका उद्देश्य गंभीर बीमारी से पीड़ित गरीबी रेखा के नीचे के रोगियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना था ताकि वे सरकारी अस्पतालों में उपचार की सुविधा प्राप्त कर सकें।
  • इसके अंतर्गत गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को सुपर स्पेशिलिटी वाले अस्पतालों/संस्थानों और सरकारी अस्पतालों में उपचार की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है।
  • इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय आरोग्य निधि योजनाएं 1977 से प्रचालन में हैं। इस योजना का संचालन केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा किया जाता है। वर्तमान में, इस योजना के तहत, देश के विभिन्न राज्यों में 13 सरकारी सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा संस्थानों में 2 लाख रुपये तक के उपचार का लाभ उठाया जा सकता है। इससे आगे के उपचार के लिए, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय से अनुमोदन के बाद वित्तीय सहायता प्राप्त होती है।

स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स

 

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