दक्षिण चीन सागर और उससे उत्पन्न विवाद

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दक्षिण चीन सागर और उससे उत्पन्न विवाद

दक्षिण चीन सागर में चीन के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए अमेरिका ने अगले एक दशक में अमेरिकी नौसेना मरीन कॉर्प्स और कोस्ट गार्ड सहित अपने अन्य समुद्री बलों को एकीकृत रूप से तैनात करने की योजना की घोषणा की है।

मुख्यबिंदु:

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका की यह एकीकृत ऑल-डोमेन नौसैनिक शक्ति (इंटीग्रेटेड ऑल डोमेन नेवल पावर ) चीन का दक्षिण चीन सागर में  से मुकाबला करेगी।

दक्षिणी चीन सागर विवाद:

  • इंडोनेशिया और वियतनाम के बीच पड़ने वाला समंदर का ये हिस्सा, क़रीब 35 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस पर चीन, फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ताईवान और ब्रुनेई अपना दावा करते रहे हैं। क़ुदरती ख़ज़ाने से लबरेज़ इस समुद्री इलाक़े में जीवों की सैकड़ों प्रजातियां पाई जाती हैं।
  • मूल विवाद दक्षिणी चीन सागर में स्थित दो द्वीप समूहों को लेकर है, जिनका नाम स्प्रैटली द्वीप और पारासेल है। ये दोनों द्वीपसमूह वियतनाम और फिलिपीन्स के बीच पड़ते हैं। चीन ने इस छोटे से सागर पर मालिकाना हक़ के एक अंतरराष्ट्रीय पंचाट के फ़ैसले को मानने से इनकार कर दिया।चीन इन दोनों पर अपना दावा करता है। दूसरी ओर चीन के इस दावे का विरोध फिलिपीन्स, वियतनाम, मलेशिया और ताईवान की ओर से हो रहा है। ब्रूनेई को भी इसमें आपत्ति है।
  • फिलीपींस द्वारा मामले को 2013 में न्यायालय में लाया गया था, जो स्कारबोरो शोल पर केंद्रित था। हालाँकि बीजिंग के द्वारा कार्यवाही का बहिष्कार करने का निर्णय किया गया।द हेग, नीदरलैंड स्थित स्थाई मध्यस्थता न्यायालय ने फैसला दिया था कि दक्षिण चीन सागर पर ऐतिहासिक अधिकार के चीन के दावों का कोई कानूनी आधार नहीं है।

भारत का पक्ष:

  • हाल के दिनों में भारत-चीन विवाद के बाद ये चर्चा होने लगी है कि क्या दक्षिणी चीन सागर के विवाद में भारत की भूमिका बढ़ेगी?
  • भारत दक्षिणी चीन सागर को एक न्यूट्रल जगह मानता रहता है। भारत मानता है कि ये न्यूट्रैलिटी कायम रहनी चाहिए और ये किसी भी देश का समुद्र नहीं है।
  • भारत अभी इसी स्थिति पर कायम रह सकता है। जानकार मानते हैं कि अगर विवाद ज़्यादा बढ़ता है तो फ़िर ‘क्वॉड’ की भूमिका अहम हो सकती है।

क्वॉड:

  • दि क्वाड्रिलैटरल सिक्युरिटी डायलॉग (क्यूसिड) जिसे क्वॉड (QUAD) के नाम से भी जाना जाता है, ये अमरीका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच अनौपचारिक राजनीतिक वार्ता समूह है।
  • क्वॉड कुछ देशों के विचारों का मिलन है। क्वॉड की शुरुआत एक सकारात्मक सोच के साथ हुई है। लेकिन 2007 में शुरू होने के बाद क्वॉड अगले 10 सालों तक निष्क्रिय रहा। साल 2017 में एक बार फ़िर क्वॉड के देश मिले।
  • 2019 में बैठक का स्तर बढ़ा और चारों देशों के विदेश मंत्रियों ने इसमें हिस्सा लिया। हालांकि क्वॉड भी कोई सैन्य गठबंधन नहीं है, इसलिए सीधे तौर पर दक्षिणी चीन सागर में किसी और देश की सेना के दखल की उम्मीद अभी नहीं करेगा।

स्रोत – द हिन्दू

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