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थोक मूल्य सूचकांक

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थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index – WPI)

थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index – WPI)

हाल ही में भारत सरकार के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के आर्थिक सलाहकार कार्यालय द्वारा अप्रैल, 2021(अनंतिम) एवं फरवरी, 2021 (अंतिम) के लिए थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index-WPI) के आंकड़े जारी किए गए हैं।

  • विदित हो कि, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग, भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
  • इन आंकड़ों में के अनुसार अप्रैल, 2020 की तुलना में अप्रैल 2021 के दौरान (अनंतिम) रूप से मुद्रास्फीति की वार्षिक दर 10.49 प्रतिशत रही ।
  • ज्ञातव्य हो कि अप्रैल 2021 के दौरान मुद्रास्फीति की वार्षिक दर तेज रही है। जिसका मुख्य कारण खनिज तेलों जैसे पेट्रोल, डीजल आदि एवं विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में बढोत्तरी है ।

मुद्रास्फीति (Inflation)

  • आम तौर पर मुद्रास्फीति का अभिप्राय लोगों द्वारा दैनिक जीवन में उपयोग की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं (यथा- भोजन, कपड़े, आवास, मनोरंजन और परिवहन इत्यादि) की कीमतों में होने वाली वृद्धि से है।
  • मुद्रास्फीति को मुख्य रूप से भारत में दो मुख्य सूचकांकों के आधार पर मापा जाता है । जिनमे पहला है ,थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index-WPI) एवं दूसरा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index-CPI) है ।

थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index-WPI)

  • भारत में थोक मूल्य सूचकांक व्यापारियों द्वारा थोक (Wholesale) में बेचे गए सामानों की कीमतों में बदलाव को मापता है। अर्थात थोक स्तर पर सामानों की कीमतों का आकलन करने के लिए थोक मूल्य सूचकांक का इस्तेमाल किया जाता है।
  • थोक मूल्य सूचकांक को भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार कार्यालय द्वारा जारी किया जाता है। थोक मूल्य सूचकांक में मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों को सबसे ज़्यादा भार (weightage) दिया जाता है। इसका आधार वर्ष 2011-12 रखा गया है।
  • थोक मूल्य सूचकांक प्रत्येक माह की 14 तारीख को जारी किए जाते हैं। विदित हो कि थोक मूल्य सूचकांक के अनंतिम आंकड़े देश भर में संस्थागत स्रोतों और चुनी हुई विनिर्माण इकाइयों से प्राप्त आंकड़ों के साथ संकलित किए जाते हैं ।

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index-CPI)

  • उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index-CPI) का इस्तेमाल ख़ुदरा स्तर पर महँगाई मापने के लिए किया जाता है। इसका सीधा संबंध उपभोक्ताओं से होता है। भारत में अभी पांच उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) हैं

जिनमें से प्रमुख चार निम्नलिखित हैं-

  • औद्योगिक श्रमिकों (Industrial Workers-IW) के लिये उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई)
  • कृषि मज़दूर (Agricultural Labourer-AL) के लिये उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई)
  • ग्रामीण मज़दूर (Rural Labourer-RL) के लिये उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई)
  • ग्रामीण एवं शहरी संयुक्त उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई)
  • इनमे से पहले तीन सूचकांकों को श्रम और रोज़गार मंत्रालय के संबद्ध कार्यालय ‘श्रम ब्यूरो’ द्वारा संकलित एवं प्रकाशित किया जाता हैतथा चौथे प्रकार की सीपीआई को सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा संकलित एवं जारी किया जाता है।
  • इनमे वर्ष 2016 , औद्योगिक श्रमिकों के लिये उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का आधार है एवं वर्ष 1986-87 कृषि एवं ग्रामीण श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का आधार है ।

स्रोत:पीआईबी

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