त्रिनिदाद तथा टोबैगो से इंडिया स्टैक (INDIA STACK) को साझा करने हेतु समझौता

त्रिनिदाद तथा टोबैगो से इंडिया स्टैक (INDIA STACK) को साझा करने हेतु समझौता

हाल ही में भारत ने त्रिनिदाद तथा टोबैगो से इंडिया स्टैक (INDIA STACK) को साझा करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इंडिया स्टेक ओपन ‘एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफ़ेस (API )’ और डिजिटल पब्लिक गुड्स का एक संग्रह है, जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर पहचान, डेटा और भुगतान सेवाओं को सुविधाजनक बनाना है।

API परिभाषित नियमों का एक सेट है, जो अलग-अलग ऐप्लिकेशंस को एक दूसरे से संचार करने में सक्षम बनाता है।

इससे पहले भारत ने आर्मेनिया, सिएरा लियोन, सूरीनाम और एंटीगुआ तथा बारबुडा जैसे देशों के साथ इंडिया स्टैक साझा करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं ।

जुलाई 2023 में पापुआ न्यू गिनी के साथ भी इसी तरह के एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे, जो वैश्विक स्तर पर पहल की बढ़ती रुचि और स्वीकृति को दिखाता है।

UPI, जो इंडिया स्टैक का भी एक हिस्सा है, को फ्रांस, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर और श्रीलंका में स्वीकार किया गया है। इंडिया स्टैक के अलग-अलग घटकों का स्वामित्व और रख-रखाव का उत्तरदायित्व अलग–अलग एजेंसियों के पास है ।

उदाहरण के लिए-

  • “आधार” से संबंधित उत्पादों का स्वामित्व और प्रबंधन भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के पास है;
  • ‘डिजिलॉकर’ इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Meity) के अधीन है;
  • यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) का नियंत्रण भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के पास है
  • अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क का विनियमन भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के पास है ।

इंडिया स्टैक का महत्त्व:

  • यह सरकारों, व्यवसायों, स्टार्ट-अप्स आदि को उपस्थिति-रहित, कागज रहित और नकदी रहित सेवा वितरण की ओर बढ़ने में समर्थ बनाता है ।
  • यह डिजिटल अर्थव्यवस्था के सभी रूपों में सहक्रिया स्थापित करने में मदद करता है। साथ ही यह सभी नागरिकों की डिजिटल सेवाओं तक पहुंच का विस्तार करता है।
  • यह डेटा तक समान पहुंच प्रदान करके विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग जैसी उभरती तकनीकों में नवाचार एवं उद्यमशीलता को बढ़ावा देता है ।

इंडिया स्टैक की परतें:

  • पहचान आधारित परत : प्रत्येक निवासी को एक विशिष्ट आई.डी. दी जाती है, और उन्हें यह साबित करने में सक्षम बनाया जाता है कि “मैं वही हूं जो मैं होने का दावा करता हूं” ।
  • भुगतान आधारित परत : यह किसी भी व्यक्ति को किसी अन्य को भुगतान करने की सुविधा देता है। यह इंटर-ऑपरेबल, तेज़ और वहनीय है। यह सिर्फ स्मार्टफोन तक सीमित नहीं है ।
  • डेटा सशक्तीकरण : डेटा को सुरक्षित तरीके से साझा करने में मदद करता है ।

स्रोत – पी.आई.बी.

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