डेटा सुरक्षा कानून के अभाव में फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी (FRT) के बढ़ते उपयोग

डेटा सुरक्षा कानून के अभाव में फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी (FRT) के बढ़ते उपयोग

हाल ही में ,डेटा सुरक्षा कानून के अभाव में फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी (FRT) के बढ़ते उपयोग ने चिंताएं उत्पन्न की है।

फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी (चेहरा पहचान प्रौद्योगिकी) प्रणाली कोलकाता, वाराणसी, पुणे, विजयवाड़ा, बेंगलुरु और हैदराबाद के विमान पत्तनों पर परिनियोजित किए जाने की प्रक्रिया में है। ज्ञातव्य है कि यह प्रणाली नागरिक विमानन मंत्रालय की डिजी यात्रा पहल के तहत परीक्षण के अधीन है।

डिजी यात्रा, यात्रियों के लिए निर्वाध यात्रा अनुभव के संवर्धन हेतु और साथ ही साथ सुरक्षा में सुधार करने के लिए एक संयोजित तंत्र की परिकल्पना करती है।

फेशियल रिकॉग्निशन, किसी व्यक्ति के चेहरे के माध्यम से उसकी पहचान करने या पुष्टि करने की एक पद्धति है। फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक का उपयोग करके फोटो, वीडियो या रियल-टाइम में लोगों कीपहचान की जा सकती है।

FRT के उपयोग

  • प्रवेश बिंदु, सुरक्षा जांच, विमान में प्रवेश आदि जैसे चेक-पॉइंट्स पर स्वचालित प्रक्रिया को संभव बनाती अपराधियों, अज्ञात शवों तथा लापता/पाए गए बच्चों एवं व्यक्तियों की बेहतर पहचान स्थापित करती है।
  • बायोमेट्रिक उपस्थिति या प्रमाणीकरण दर्ज करती है।

FRT से संबंधित मुद्दे

  • FRT निजता पर एक आक्रमण है, जहां निगरानी, बिना सहमति या कैमरे में मौजूद व्यक्ति को सूचित किए बिना की जाती है।
  • FRT का संभावित रूप से राज्य प्रायोजित जन निगरानी के लिए उपयोग किया जा सकता है।
  • डेटा सुरक्षा कानून, सुदृढ़ निगरानी सुधार तथा एक विशिष्ट FRT विनियमन का अभाव।
  • पहचान में निम्नस्तरीय सटीकता।

स्रोत –द हिन्दू

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