ट्रांस फैटी एसिड

  • भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने तेल और वसा में ट्रांस फैटी एसिड की वर्तमान मात्रा को 5% वर्ष 2021तक तथा 3%से 2%2022करने का लक्ष्य रखा है।
  • एफएसएसएआईने यह परिवर्तन खाद्य सुरक्षा और मानक (बिक्री पर निषेध और प्रतिबंध) विनियम, 2011 में संशोधन करते हुए किया है।
  • इससे पहले वर्ष 2011 में भारत ने पहली बार एक विनियमन पारित किया जिसके तहत तेल और वसा में ट्रांस फैटी एसिडकी सीमा 10% निर्धारित की गई थी। वर्ष 2015 में इस सीमा को घटाकर 5% कर दिया गया।
  • ये विनियमन विभिन्न खाद्य उत्पादों, सामग्रियों और उनके सम्मिश्रणों की बिक्री से जुड़ी निषेधाज्ञाओं एवं प्रतिबंधों से संबंधित हैं।

वैश्विक स्तर पर:

डब्लूएचओने वैश्विक स्तर पर वर्ष 2023 तक औद्योगिक रूप से उत्पादित खाद्य तेलों में ट्रांस-फैट के उन्मूलन हेतु वर्ष 2018 में रिप्लेस नामक एक अभियान शुरू किया।

ट्रांस फैट:

ट्रांस फैट तेल तथा खाद्य पदार्थों की शेल्फ लाइफ (सामग्री के भंडारण एवं उपयोग होने तक की अवधि) में वृद्धि करने व उनके स्वाद को स्थिर करने में सहायता करते हैं। ट्रांस फैट को ट्रांस फैटी एसिड के रूप में भी जाना जाता है। ये दो प्रकार के होते हैं:

(i) प्राकृतिक ट्रांस फैट

(ii) कृत्रिम ट्रांस फैट

  • कृत्रिम ट्रांस फैटी एसिड तब बनते हैं, जब शुद्ध घी/मक्खन के समान फैट/वसा के उत्पादन में तेल के साथ हाइड्रोजन की प्रतिक्रिया कराई जाती है।
  • ट्रांस फैटी एसिड अथवा ट्रांस फैट, सबसे हानिकारक प्रकार के फैट/वसा हैं, जो मानव शरीर पर किसी भी अन्य आहार घटक की तुलना में अत्यधिक प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।
  • यद्यपि इन वसाओं को बड़े पैमाने पर कृत्रिम रूप से उत्पादित किया जाता है, ये बहुत ही कम मात्रा में प्राकृतिक रूप में भी पाए जा सकते हैं। इस प्रकार हमारे आहार में, ये कृत्रिम टीएफएऔर/या प्राकृतिक टीएफएके रूप में मौजूद हो सकते हैं।
  • हमारे आहार में कृत्रिम टीएफएके प्रमुख स्रोत आंशिक रूप से हाइड्रोजनीकृत वनस्पति तेल (PHVO)/ वनस्पति/मार्ज़रीन हैं, जबकि प्राकृतिक टीएफएमीट और डेयरी उत्पादों में (बहुत ही कम मात्रा में) पाए जाते हैं।

उपयोग:

टीएफए युक्त तेलों को लंबे समय तक संरक्षित किया जा सकता है। ये भोजन को वांछित आकार और स्वरुप प्रदान करते हैं तथा आसानी से ‘शुद्ध घी’ के विकल्प के रूप में प्रयोग किये जा सकते हैं। तुलनात्मक रूप से इनकी लागत बहुत ही कम होती है एवं इस प्रकार ये लाभ/बचत में वृद्धि करते हैं।

ट्रांस फैट के स्वास्थ्य खतरे:

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस फैटी एसिड के सेवन से विश्व स्तर पर प्रत्येक वर्ष लगभग 5.4 लाख मौतें होती हैं।FSSAI के ये नियम महामारी के ऐसे समय में आए हैं, जब गैर-संचारी रोगों के बोझ में वृद्धि हुई है।ट्रांस-फैट के सेवन से हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
  • गैर-संचारी रोगोंके कारण होने वाली अधिकाँश मौतें हृदय रोगों के कारण होती हैं।इसके उपभोग से कम-घनत्व वाले लिपोप्रोटीन (जिसे “ख़राब” कोलेस्ट्रोल भी कहा जाता है) के स्तर में वृद्धि होती है। इसके फलस्वरूप हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही यह उच्च-घनत्व वाले लिपोप्रोटीन (जिसे “अच्छा” कोलेस्ट्रोल भी कहते हैं) के स्तर को कम करता है।
  • इन्हें टाइप-2मधुमेह का मुख्य कारण माना जाता है, जो इन्सुलिन प्रतिरोध से जुड़ा हुआ होता है। इस कारण WHO ने अनुशंसा की है कि एक व्यक्ति द्वारा ग्रहण की जाने वाली कुल कैलोरी मात्रा का एक प्रतिशत से अधिक ट्रांस फैट से नहीं होना चाहिए।
  • यह मोटापा, टाइप 2 मधुमेह, चयापचय सिंड्रोम, इंसुलिन प्रतिरोध, बांझपन, कुछ विशेष प्रकार के कैंसर आदि की वृद्धि में सहायक है और भ्रूण के विकास को भी प्रभावित करता है जिसके परिणामस्वरूप पैदा होने वाले बच्चे को नुकसान पहुँच सकता है।
  • मेटाबोलिक सिंड्रोम में उच्च रक्तचाप, उच्च रक्त शर्करा, कमर के आस-पास अतिरिक्त फैट/चर्बी और कोलेस्ट्रॉल का असामान्य स्तर शामिल हैं। सिंड्रोम से व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ने और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

टीएफए (TFA)सेवन को कम करने के प्रयास:

  • एफएसएसए आईने टीएफएमुक्त उत्पादों को बढ़ावा देने हेतु स्वैच्छिक लेबलिंग के लिये “ट्रांस फैट फ्री” लोगो लॉन्च किया। लेबल का उपयोग बेकरी, स्थानीय खाद्य आउटलेट्स एवं दुकानों द्वारा किया जा सकता है जिसमें टीएफए2 प्रति 100 ग्राम/मिली. से अधिक नहीं होता है।
  • एफएसएसएने वर्ष 2022 तक खाद्य आपूर्ति में औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस फैट को खत्म करने के लिये एक नया सामूहिक मीडिया अभियान “हार्ट अटैक रिवाइंड” शुरू किया।
  • खाद्य तेल उद्योगों ने वर्ष 2022 तक नमक, चीनी, संतृप्त वसा और ट्रांस फैट सामग्री के स्तर को 2% तक कम करने का संकल्प लिया है।
  • ‘स्वस्थ भारत यात्रा’ नागरिकों को खाद्य सुरक्षा, खाद्य मिलावट और स्वस्थ आहारों से संबद्ध मुद्दों से जोड़ने के लिये “ईट राईट” अभियान के तहत शुरू किया गया एक पैन-इंडिया साइक्लोथॉन है।

स्रोत: द हिंदू

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