छठा व्यक्ति (जिनेवा रोगी) एचआईवी से ठीक हो गया

छठा व्यक्ति (जिनेवा रोगी) एचआईवी से ठीक हो गया 

जिनेवा रोगी के रूप में जाना जाने वाला ह्यूमन इम्यूनोडेफिशियेंसी वायरस (HIV) से पीड़ित छठा व्यक्ति, ल्यूकेमिया के लिए स्टेम सेल प्रत्यारोपण प्राप्त करने के बाद संभवतःठीक हो गया है ।

HIV से ठीक होने वाले अब तक के सभी रोगियों के उपचार में स्टेम सेल प्रत्यारोपण (SCT) करना पड़ा है।

स्टेम सेल ट्रांसप्लांट

SCT को अस्थि मज्जा (bone-marrow) भी कहा जाता है । स्टेम सेल ट्रांसप्लांट (SCT) एक चिकित्सा प्रक्रिया है जिसमें क्षतिग्रस्त या रोगग्रस्त स्टेम कोशिकाओं को बदलने के लिए स्वस्थ स्टेम कोशिकाओं को रोगी में डाला जाता है ।

स्टेम सेल्स विशेष मानव कोशिकाएं होती हैं। ये कई अलग-अलग प्रकार की कोशिकाओं में विकसित हो सकती हैं।

प्रत्यारोपण का उद्देश्य शरीर में स्वस्थ रक्त कोशिकाओं का उत्पादन करने की क्षमता को बहाल करना , प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देना और ल्यूकेमिया और लिम्फोमा जैसी कुछ बीमारियों का इलाज करना है।

स्टेम प्रत्यारोपण के प्रकार

ऑटोलॉगस प्रत्यारोपण: इसमें मरीज की ही स्टेम सेल्स का उपयोग किया जाता है।

एलोजेनिक प्रत्यारोपण: इसमें दाता से प्राप्त स्टेम सेल्स का उपयोग किया जाता है।

HIV मुख्य रूप से मानव शरीर की CD4 प्रतिरक्षा कोशिकाओं पर हमला करता है। इससे व्यक्ति के शरीर की कुछ संक्रमणों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है।

CD4 प्रतिरक्षा कोशिकाएं श्वेत रक्त कोशिकाओं का ही एक प्रकार हैं ।

CD4 प्रतिरक्षा कोशिकाओं की सतह पर CCR5 रिसेप्टर्स मौजूद होते हैं। ये रिसेप्टर्स HIV वायरस के लिए प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करते हैं ।

हालांकि, CCR5 डेल्टा 32 उत्परिवर्तन HIV वायरस द्वारा उपयोग किए जाने वाले इन रिसेप्टर्स को सतह पर बनने से रोकता है। इस तरह यह वायरस के लिए प्रवेश द्वार को ही बंद कर देता है।

इसीलिए पहले पांच मामलों में, वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से CCR5-डेल्टा 32 उत्परिवर्तन वाले दाताओं (Donors) की मदद ली थी।

स्टेम सेल प्रत्यारोपण के माध्यम से एचआईवी की रिकवरी आमतौर पर कॉकेशियन लोगों में अधिक देखी गई है क्योंकि इस नस्लीय समूह में CCR5 डेल्टा 32 के रूप में जाना जाने वाला एक विशिष्ट जीन उत्परिवर्तन अधिक प्रचलित है।

स्टेम सेल प्रत्यारोपण के माध्यम से एचआईवी से मुक्ति पाने वाले अन्य रोगियों में बर्लिन के रोगी, लंदन के रोगी और न्यूयॉर्क के रोगी शामिल हैं।

गर्भनाल और वयस्क स्टेम कोशिकाओं का उपयोग करके स्टेम सेल थेरेपी अन्य जातियों के लोगों में भी प्रत्यारोपण संभव बना सकती है।

स्रोत – इंडियन एक्सप्रेस

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