ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के अस्तित्व को सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के कारण खतरा

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ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के अस्तित्व को सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के कारण खतरा

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के अस्तित्व को सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के कारण खतरा

हरित ऊर्जा परियोजनाओं ने ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) के जीवन के समक्ष खतरा उत्पन्न कर दिया है।

विदित हो कि ,राजस्थान में श्रेणीबद्ध तरीके से संचालित की जा रही सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के कारण ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के उच्च वोल्टेज युक्त तारों से टकराने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इससे हाल के दिनों में इनकी मृत्यु दर में वृद्धि हुई है।

मुख्य बिंदु

  • भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India)) के अनुमान के अनुसार प्रत्येक वर्ष विद्युत तारों से टकराने के कारण लगभग 15 प्रतिशत ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की मृत्यु हो जाती है।
  • इस प्रकार पर्यावास क्षति और निम्नीकरण की तुलना में विद्युत तारों का यह संजाल अधिक व्यापक खतरे के रूप में उभरा है।
  • अप्रैल 2021 में एम.के. रंजीत सिंह बनाम भारत संघ वाद में उच्चतम न्यायालय ने विशिष्ट बाध्यकारी दिशा-निर्देश जारी किए थे। इस वाद में न्यायालय ने मनुष्योंके लिए सतत विकास को अन्य प्राणियों के अधिकारों के साथ संतुलित करने की आवश्यकता को स्वीकार किया था।
  • विद्युत तारों को भूमिगत करने के लिए उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश की तिथि से एक वर्ष की समय सीमा निर्धारित की है।
  • भविष्य में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के “संभावित’ और ‘प्राथमिकता आधारित पर्यावास’ दोनों में सभी विद्युत तारों को अनिवार्यतः भूमिगत किया जाना है।
  • जब तक विद्युत तारों को भूमिगत नहीं कर दिया जाता, तब तक सभी तारों पर तत्काल बर्ड-डायवर्टर (पक्षियों के लिए मार्ग –विक्षेपक) स्थापित किये जायेंगे ।

तारों को भूमिगत किए जाने से संबंधित मुद्दे

  • इससे परियोजना की लागत और विद्युत की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हो जाती है। साथ ही, उच्च वोल्टेज युक्त विद्युत तारों के लिए तकनीकी व्यवहार्यता संबंधी मुद्दे भी विद्यमान हैं।
  • उच्चतम न्यायालय ने हाई वोल्टेज विद्युत तारों को भूमिगत करने की व्यवहार्यता के परीक्षण के लिए तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन भी किया था।

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के बारे में

  • यह भारतीय उपमहाद्वीप की एक स्थानिक प्रजाति है। यह मध्य भारत, पश्चिमी भारत और पूर्वी पाकिस्तान में पाया जाता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN)में यह क्रिटिकली एंडेंजर्ड (Critically Endangered) श्रेणी में शामिल है।
  • ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के लिए महत्वपूर्ण स्थल राष्ट्रीय मरू उद्यान अभयारण्य (राजस्थान), नलिया (गुजरात), वरोरा (महाराष्ट्र) और बेल्लारी (कर्नाटक) आदि हैं।
  • यह अधिकतर शुष्क और अर्ध-शुष्क घास भूमियों, कांटेदार झाड़ियों से युक्त खुली भूमि तथा कृषि भूमि से संलग्न लंबी घास युक्त भूमि जैसे पर्यावासों में पाए जाते हैं। यह सिंचित क्षेत्रों से दूर रहता है।
  • यह पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वन्य जीव प्राकृतिक वास के समेकित विकास (Integrated Development of Wildlife Habitats) के अंतर्गत रिकवरी कार्यक्रम (Recovery Programme) में शामिल प्रजातियों में से एक है।

स्रोत:द  हिन्दू

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