ग्राम न्यायालयों की स्थापना
हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने ग्राम न्यायालयों की स्थापना के लिए दायर याचिका पर उच्च न्यायालयों को नोटिस जारी किया है।
उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2019 की एक याचिका पर सभी उच्च न्यायालयों से जवाब मांगा है।
इस याचिका में केंद्र और सभी राज्यों को ग्राम न्यायालय स्थापित करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है।
दिसंबर 2021 तक 15 राज्यों ने 476 ग्राम न्यायालय अधिसूचित किए थे। वर्तमान में 10 राज्यों में 256 ग्राम न्यायालय क्रियाशील हैं।
ग्राम न्यायालयों के बारे में–
- विधि आयोग ने अपनी 114वीं रिपोर्ट में ग्राम न्यायालयों की स्थापना का सुझाव दिया था ।
- वर्ष 2008 में संसद ने ग्राम न्यायालय अधिनियम पारित किया था ।
अधिनियम की मुख्य विशेषताएं:
- मध्यवर्ती पंचायत स्तर पर ग्राम न्यायालयों की स्थापना का प्रावधान किया गया है।
- राज्य सरकार उच्च न्यायालय के परामर्श से प्रत्येक ग्राम न्यायालय में एक ‘न्यायाधिकारी नियुक्त करेगी।
- यह आपराधिक मामलों, दीवानी मुकदमों, दावों या विवादों की सुनवाई करेगा।
- ये प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होंगे, लेकिन उच्च न्यायालय द्वारा बनाए गए किसी नियम के अधीन होंगे।
- ये भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 में प्रदान किए गए साक्ष्य के नियमों से बंधे नहीं होंगे।
ग्राम न्यायालयों के लाभ:
- न्याय तक सुलभ और कम खर्च में पहुंच सुनिश्चित होती है,
- मामलों का त्वरित निपटान संभव हो पाता है,
- दीवानी न्यायालयों पर दबाव कम होता है आदि ।
ग्राम न्यायालयों के समक्ष चुनौतियां:
- इन्हें या तो बहुत कम संसाधन आवंटित किए जाते हैं या संसाधन उपलब्ध ही नहीं कराए जाते हैं,
- सभी हितधारकों के बीच इसके बारे में जागरूकता की कमी है,
- ग्राम न्यायालयों की न्यायिक अधिकारिता के बारे में भ्रम की स्थिति है आदि ।
स्रोत – द हिन्दू