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क्लाइमेट ब्रेकथ्रू सम्मेलन

क्लाइमेट ब्रेकथ्रू सम्मेलन

  • हाल ही में विश्व के प्रमुख राष्ट्रों के नेताओं ने ‘स्टील, शिपिंग, ग्रीन हाइड्रोजन और प्रकृति सहित अन्य वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रगति का प्रदर्शन करने के लिये ‘क्लाइमेट ब्रेकथ्रू सम्मेलन’ की बैठक का आयोजन किया गया है।
  • इस सम्मलेन कोवर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, मिशन पॉसिबल पार्टनरशिप, यूनाइटेड नेशंस क्लाइमेट चैंपियंस और यूनाइटेड किंगडम ( Presidency of COP 26 of UNFCCC) के मध्य एक सहयोग के रूम में आयोजित किया गया है ।
  • इसका उद्देश्य शून्य-कार्बन अर्थव्यवस्था हेतु वैश्विक संक्रमण में तीव्रता लाने के लिए, प्रणालीगत परिवर्तन की आवश्यकता को प्रदर्शित करना है।
  • “शून्य कार्बन अर्थव्यवस्था” कम ऊर्जा खपत और कम प्रदूषण के आधार पर हरित पारिस्थितिक अर्थव्यवस्था को संदर्भित करती है, जहां उत्सर्जन की भरपाई ग्रीनहाउस गैसों के अवशोषण और निष्कासन से होती है ।
  • ‘रेस टू ज़ीरो’ (Race to Zero) अभियान यह अभियान 708 शहरों, 24 क्षेत्रों, 2,360 व्यवसायों, 163 निवेशकों और 624 उच्च शिक्षण संस्थानों को एक सतत् भविष्य के लिये ज़ीरो-कार्बन रिकवरी की ओर अग्रसर करता है,यह ग्रीनहाउस गैसों (नेट-ज़ीरो) के अवशोषण के लिए महत्वपूर्ण अभियानों में से एक है

शिखर सम्मेलन की विशेषताएँ:

  • संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन को स्थाई करने एवं वर्ष 2050 तक वैश्विक तापमान की वृद्धि को औद्योगिक-पूर्व के तापमान स्तर की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सभी देशों से समन्वित कार्रवाई का आह्वान किया है ।
  • संसार की सबसे बड़ी कंटेनर शिपिंग लाइन और पोत संचालक‘मर्स्क (Maersk) वर्ष 2030 तक उत्सर्जन को आधा करने के लक्ष्य के साथ ‘रेस टू ज़ीरो अभियान’जुड़ा हुआ है।
  • पूरी दुनिया के 40 स्वास्थ्य देखभाल संस्थानों ने 2030 तक उत्सर्जन को आधा करने एवं 2050 तक ‘नेट ज़ीरो’ तक पहुँचने के लिये संकल्प लिया है।
  • जो संशोधित जलवायु कार्ययोजना के मार्ग (Climate Action Pathways) में दिखाई देता है, जिसे ग्लोबल क्लाइमेट एक्शन के लिये मराकेश (Marrakech) पार्टनरशिप के साथ ही जारी किया गया है।
  • क्लाइमेट एक्शन पाथवे वर्ष 2050 तक 1.5 डिग्री सेल्सियस तक विश्व की पहुँच स्थापित करने के लिये क्षेत्रीय दृष्टिकोण निर्धारित करते हैं, जो देशों और गैर-राज्य नेतृत्वकर्त्ताओं को समान रूप से 2021, 2025, 2030 और 2040 तक ज़ीरो-कार्बन वाला विश्व तैयार करने हेतु आवश्यक कार्यों की पहचान करने में मदद करने के लिये एक रोडमैप प्रदान करते हैं।

महत्त्व:

  • इसमें एल्यूमीनियम, कंक्रीट एवं सीमेंट, रसायन, धातु-खनन, प्लास्टिक तथा स्टील जैसे भारी उद्योग एवं उपभोक्ता वस्तु, फैशन, आईसीटी और मोबाइल तथा खुदरा वस्तु आदि हल्के उद्योग इन दोनों का तकनीकी और आर्थिक रूप से डीकार्बोनाइज (Decarbonizing) करना सुनियोजित किया गया है।

रेस टू ज़ीरो अभियान (Race to Zero Campaign)

  • संयुक्त राष्ट्र समर्थित रेस टू ज़ीरो अभियान में गैर-राज्य अभिनेताओं (कंपनियां, शहर, क्षेत्र, वित्तीय और शैक्षणिक संस्थान ) को शामिल किया गया है। इसके अंर्तगत वर्ष 2030 तक वैश्विक उत्सर्जन को आधा करने और एक स्वस्थ, निष्पक्ष, ज़ीरो-कार्बन विश्व प्रदान करने के लिये कठोर और तत्काल कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
  • रेस टू ज़ीरो राष्ट्रीय सरकारों के बाहरीनेतृत्वकर्त्ताओं को जलवायु महत्त्वाकांक्षी गठबंधन (Climate Ambition Alliance) में शामिल होने के लिये एकत्रित करता है।

जलवायुमहत्त्वाकांक्षी गठबंधन (Climate Ambition Alliance)

  • जलवायु महत्त्वाकांक्षी गठबंधन में वर्तमान में 120 देश और कई अन्य निजी भागीदार संस्थाएं शामिल हैं जो वर्ष 2050 तक नेट-ज़ीरो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिये प्रतिबद्ध है।
  • हस्ताक्षर करने वाले राष्ट्र या निजी भागीदार दुनिया भर में वर्तमान में उत्सर्जित ग्रीनहाउस-गैसके 23% और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में 53% के लियेज़िम्मेदार हैं।भारत इस गठबंधन का अंग नहीं है।

स्रोत: द हिन्दू

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