बेस एडिटिंग (क्षार संपादन) की सहायता से कैंसर का उपचार संभव

बेस एडिटिंग (क्षार संपादन) की सहायता से कैंसर का उपचार संभव 

  • हाल ही में ‘बेस एडिटिंग’ उपचार पद्धति के परीक्षण पर कार्य कर रहे यूनाइटेड किंगडम (UK)के वैज्ञानिकों ने बताया है कि, बेस एडिटिंग (क्षार संपादन) पद्धति से टी-सेल एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया नामक ब्लड कैंसर का इलाज किया जा सकता है ।
  • टी-सेल एक प्रकार की श्वेत रक्त कोशिकाएं होती हैं। ये शरीर के लिए उत्पन्न होने वाले खतरों को पहचानने और उन्हें बेअसर करने में सक्षम हैं।

बेस एडिटिंग के बारे मेंCancer treatment possible with the help of base editing

  • एक व्यक्ति का जेनेटिक कोड चार प्रकार के क्षारकों (बेस) का कई बार क्रम परिवर्तन है।
  • ये चार क्षारक (बेस) हैं: एडेनिन (A), गुआनिन (G), साइटोसिन (C) और थाइमिन (T)।
  • इन क्षारकों के अनुक्रम जीन को उन आवश्यक प्रोटीनों की विस्तृत श्रृंखला का उत्पादन करने का निर्देश देते हैं, जो शरीर के संचालन के लिए आवश्यक हैं।
  • वैज्ञानिक अब केवल एक क्षारक की आणविक संरचना को बदलने के लिए जेनेटिक कोड के एक सटीक भाग का चयन करने हेतु कई तरीकों का उपयोग कर सकते हैं। इससे आनुवंशिक निर्देशों को प्रभावी ढंग से बदला जा सकता है।
  • इन तरीकों में CRISPR – cas9 प्रणाली सबसे लोकप्रिय है ।
  • UK की मरीज के मामले में, क्षारकों के अव्यवस्थित अनुक्रम के कारण टी-सेल ही कैंसर का कारण बन गई थीं ।
  • वैज्ञानिकों ने एक स्वस्थ दाता से प्राप्त टी-सेल को बेस – एडिटिंग की मदद से एक नए प्रकार के टी-सेल में बदल दिया।
  • यह नई टी-सेल न तो एक-दूसरे को और न ही अन्य कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाएगी। यह कीमोथेरेपी से भी सुरक्षित रहेगी और शरीर में मौजूद अन्य कैंसरकारी टी-कोशिकाओं को नष्ट कर देगी

CRISPR Cas – 9 (Clustered Regularly Interspaced Short Palindromic Repeats’ and ‘CRISPR-associated protein 9’) के बारे में

  • क्रिस्पर कैस-9 तकनीक जीन एडिटिंग की वह तकनीक है, जिसका उपयोग किसी जीव के जीनों में परिवर्तन करने या उसके अनुवांशिक गठन में फेर-बदल करने में किया जा सकता है।
  • CRISPR Cas-9 तकनीक की खोज वैज्ञानिकों द्वारा वर्ष 2012 में की गई थी
  • CRISPR तकनीक के माध्यम से संपूर्ण आनुवंशिक कोड में से लक्षित हिस्सों (विशिष्ट हिस्सों) या विशेष स्थान पर DNA की एडिटिंग की जा सकती है।
  • CRISPR-CAS9 तकनीक आनुवंशिक सूचना धारण करने वाले DNA के सिरा या कुंडलित धागे को हटाने और चिपकाने की क्रियाविधि की भाँति कार्य करती है।
  • DNA सिरा के जिस विशिष्ट स्थान पर आनुवंशिक कोड को बदलने या एडिट करने की आवश्यकता होती है, सबसे पहले उसकी पहचान की जाती है।
  • इसके पश्चात् CAS-9 के प्रयोग से (CAS-9 कैंची की तरह कार्य करता है) उस विशिष्ट हिस्से को हटाया जाता है।
  • उल्लेखनीय है कि DNA सिरा के जिस विशिष्ट भाग को काटा या हटाया जाता है उसमें प्राकृतिक रूप से पुनर्निर्माण, मरम्मत की प्रवृति होती है।
  • वैज्ञानिकों द्वारा स्वत: मरम्मत या पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में ही हस्तक्षेप किया जाता है और आनुवंशिक कोड में वांछित अनुक्रम या परिवर्तन की क्रिया पूरी की जाती है, जो अंततः टूटे हुए DNA सिरा पर स्थापित हो जाता है।

स्रोत – द हिन्दू

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