काला सागर अनाज समझौता

काला सागर अनाज समझौता

हाल ही में “काला सागर अनाज समझौता” की समय सीमा जुलाई 2023 में समाप्त होने वाली है।

“काला सागर अनाज समझौता ” काला सागर पर स्थित यूक्रेन के तीन प्रमुख बंदरगाहों से यूक्रेनी निर्यात के लिए एक सुरक्षित समुद्री मानवीय गलियारे का प्रावधान करता है।

यूक्रेन से किए जाने वाले निर्यात में विशेष रूप से खाद्यान्न और उर्वरक (अमोनिया सहित ) शामिल हैं। ये बंदरगाह हैं: चोर्नोमॉर्क, ओडेसा और यज़्नी/पिवडेनी ।

यह समझौता जुलाई, 2022 में संयुक्त राष्ट्र (UN) और तुर्की की मध्यस्थता में रूस व यूक्रेन के बीच हुआ था। इस समझौते की समय सीमा को आगे बढ़ाने का भी विकल्प रखा गया है। इस समझौते को तीन बार बढ़ाया जा चुका है। आखिरी बार इसे जुलाई, 2023 तक के लिए बढ़ाया गया था।

काला सागर अनाज समझौते का महत्त्व

  • वैश्विक खाद्य असुरक्षा को कम करना: यूक्रेन विश्व स्तर पर गेहूं, मक्का, रेपसीड, सूरजमुखी के बीज और सूरजमुखी तेल के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है।
  • खाद्य मुद्रास्फीति: यह रूस द्वारा किए जाने वाले उर्वरकों के निर्यात को आसान बनाता है, जो कि भविष्य में फसलों की उच्च पैदावार सुनिश्चित करने तथा खाद्य कीमतों में कमी लाने के लिए आवश्यक है।
  • यह आपूर्ति श्रृंखला में उत्पन्न हुए व्यवधान के कारण बढ़ती खाद्य कीमतों से निपटने में भी मदद करता है।

समझौते से जुड़े हुए मुद्दे

  • संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, काला सागर समझौते के तहत केवल 3% निर्यात ही कम आय वाले देशों को गया है, जबकि उच्च आय वाले देशों को निर्यात का लगभग 44% प्राप्त हुआ है।
  • अपने स्वयं के निर्यात के समक्ष मौजूद चुनौतियों के कारण रूस की पश्चिमी देशों से शिकायतें हैं ।

स्रोत – द हिन्दू

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