कार्बन क्रेडिट्स के व्यापार के लिए विविध गतिविधियां

कार्बन क्रेडिट्स के व्यापार के लिए विविध गतिविधियां

  • हाल ही में भारत ने पेरिस समझौते के अनुच्छेद -2 तंत्र के तहत कार्बन क्रेडिट्स के व्यापार के लिए विविध गतिविधियों को अंतिम रूप दिया है ।
  • केंद्र सरकार ने उभरती प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण को सुविधाजनक बनाने तथा भारत में अंतर्राष्ट्रीय वित्त जुटाने के लिए अलग-अलग गतिविधियों (इन्फोग्राफिक देखें) की एक सूची को अंतिम रूप दिया है।
  • इससे पहले, पेरिस समझौते के कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय निर्दिष्ट प्राधिकरण (National Designated Authority for Implementation of Paris Agreement-NDAIAPA) को अधिसूचित किया गया था।
  • NDAIAPA को उन परियोजना प्रकारों को तय करने का कार्य सौंपा गया है, जो अनुच्छेद 6 तंत्र के तहत अंतर्राष्ट्रीय कार्बन बाजार में भागीदारी कर सकती हैं।
  • पेरिस समझौते का अनुच्छेद – 6 देशों को उनके राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदानों (NDCs) के तहत निर्धारित उत्सर्जन कटौती के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए स्वेच्छा से एक-दूसरे के साथ सहयोग करने की अनुमति देता है ।
  • इसके तहत, अलग-अलग देश जलवायु संबंधी लक्ष्यों को पूरा करने में अन्य देशों की मदद करने में सक्षम हो जाते हैं ।
  • वे ऐसे देशों को ग्रीनहाउस गैसों (GHG) के उत्सर्जन में कमी से अर्जित कार्बन क्रेडिट्स को हस्तांतरित करके उनके जलवायु संबंधी लक्ष्यों को पूरा करने में सहायता करते हैं।
  • अनुच्छेद – 2, GHG उत्सर्जन में कटौतियों में व्यापार करने के लिए आधार निर्मित करता है ।
  • कार्बन ट्रेडिंग परमिट और क्रेडिट खरीदने व बेचने की बाजार आधारित प्रणाली है । यह परमिट धारक को कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन करने की अनुमति देता है ।
  • विद्युत उद्योग, ऑटोमोटिव आदि सहित विविध स्रोतों से उत्सर्जन की अनुमत मात्रा की समग्र सीमा निर्धारित की जाती है ।
  • इसके बाद सरकारें परमिट जारी करती हैं। यदि कोई कंपनी अपने स्वयं के कार्बन उत्सर्जन पर काफी हद तक अंकुश लगाती है, तो वह नकदी के लिए अतिरिक्त परमिट का व्यापार कर सकती है।
  • कार्बन ट्रेडिंग, औपचारिक रूप से 1997 में क्योटो प्रोटोकॉल के तहत शुरू की गई थी।

GHG शमन गतिविधियां:

  • भंडारण के साथ नवीकरणीय ऊर्जा, सौर तापीय ऊर्जा, अपतटीय पवन, हरित हाइड्रोजन, संपीड़ित बायोगैस, ज्वारीय ऊर्जा, समुद्री तापीय ऊर्जा आदि ।
  • वैकल्पिक सामग्री: ग्रीन अमोनिया (अमोनिया बनाने की प्रक्रिया 100% नवीकरणीय और कार्बन मुक्त है)।
  • निराकरण कार्य : कार्बन कैप्चर यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (CCUS) ।

स्रोत – बिजनेस स्टैण्डर्ड

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