कराधान का संप्रभु अधिकार

कराधान का संप्रभु अधिकार

हाल ही में, मार्च 2012 में भारत सरकार द्वारा लागू किए गए आईटी अधिनियम में ‘पूर्वव्यापी कराधान संशोधन’ (Retrospective Taxation Amendment) को वापस लेने का निर्णय किया गया है।

पृष्ठभूमि:

  • विदित हो कि वर्ष 2012 में भारत सरकार द्वारा आयकर अधिनियम में पूर्वव्यापी संशोधन किया गया था । यह संशोधन सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए एक फैसले की प्रतिक्रिया के तहत किया गया था । इस फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था, कि वोडाफोन पर वर्ष 2007 में किए गए लेनदेन के लिए कर नहीं लगाया जा सकता है। विदित हो कि, वोडाफोन ने11 अरब डॉलर में ‘हचिसनव्हामपोआ’ (Hutchison Whampoa) कंपनी में 67 % हिस्सेदारी की खरीदी थी, जिस पर भारतीय आयकर विभाग ने ‘कर’ की मांग की थी।

‘संप्रभुता’ (Sovereignty) से तात्पर्य:

  • वह क़ानून जिसे देश के संविधान तहत मान्यता प्राप्त किसी अन्य शक्ति द्वारा रोका या रद्द नहीं किया जा सकता है, संप्रभु शक्ति का क़ानून कहलाता है ।

भारत में ‘कराधान का संप्रभु अधिकार’ क्या है?

  • भारत में संविधान के अंतर्गत सरकार को व्यक्तियों और संगठनों पर कर लगाने का अधिकार दिया गया है, परंतु साथ में यह भी स्पष्ट किया गया है, कि विधिक प्राधिकारी के अतरिक्त किसी को भी कर लगाने या वसूलने का अधिकार नहीं है। और किसी भी लगाए जाने वाले ‘कर’ का आधार विधायिका या संसद द्वारा पारित कानून के तहत होना चाहिए।

पूर्वव्यापी व्यवस्था को रद्द करने से लाभ:

  • इस पूर्वव्यापी व्यवस्था को हटाने से, उन कंपनियों को एक ‘स्पष्ट एवं पूर्वानुमेय कराधान कानून’ और संकल्पना को दिखाया गया है, जो देश में कारोबार करते समय अपनी परिसंपत्तियों का निर्माण कर सकती हैं।
  • सरकार का यह कदम, उन सभी देशों की कंपनियों के लिए ‘सौदा’ करने के संदर्भ में भी स्पष्टता प्रदान करता है, जहाँ यह‘सौदे’ किसी भी ‘कर संधि लाभ’ (Tax Treaty Benefits) के तहत नहीं आते हैं।
  • वर्ष 2012 से पहले के मामलों के लिए , कंपनियां ‘मध्यस्थता’ अधिकरणों में दायर मुकदमोंको वापस लेने से, अर्जित लाभ को अपने पास रख सकती हैं, और उनके द्वारा पहले से भुगतान की जा चुकी, या कर-मांग के संदर्भ में समायोजित की जा चुकी ‘कर-राशि’ को वापस कर दिया जाएगा।

स्रोत – इंडियन एक्सप्रेस

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