एकीकृत नदी बेसिन प्रबंधन (RBM) में क्षमता निर्माण

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एकीकृत नदी बेसिन प्रबंधन (RBM) में क्षमता निर्माण

एकीकृत नदी बेसिन प्रबंधन (RBM) में क्षमता निर्माण

हाल ही में एकीकृत नदी बेसिन प्रबंधन (RBM) में क्षमता निर्माण के लिए नदी पारिस्थितिकी तंत्र में भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी के उपयोग पर समझौता ज्ञापन प्रस्तुत किया गया है।

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) नेभू-स्थानिक प्रौद्योगिकी का उपयोग करके एकीकृत नदी बेसिन प्रबंधन (IRBM) में क्षमता निर्माण को सुदृढ़ करने हेतु दक्षिण एशियाई उन्नत अनुसंधान एवं विकास संस्थान (South Asian Institute for Advanced Research and Development: SAIARD) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

भारत के जल क्षेत्रक में भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग

  • भुवन-वाटर बॉडीज इंफोसिस्टम (Bhuvan-WBIS): सेंसर से व्युत्पन्न जल निकायों की सूचनाओ का सतही जल निकायों के स्थानिक मानचित्र निर्मित करने के लिए उपयोग किया जाता है।
  • जलवायु और पर्यावरण अध्ययन के लिए राष्ट्रीय सूचना प्रणाली (National Information System for Climate and Environmental Studies: NICES): राष्ट्रीय स्तर पर सटीक व दीर्घकालिक जलवायु डेटाबेस संतति प्रदान करता है।
  • इंडिया वाटर रिसोर्सेज इंफोसिस्टम (India-WRIS): इसमें डैशबोर्ड के माध्यम से जल संसाधनों से संबंधित सूचनाओं के साथ-साथ जल संसाधन परियोजनाओं पर मॉड्यूल और भौगोलिक सूचना प्रणाली (Geographical Information System: GIS) लेयर संपादन हेतु उपकरण शामिल हैं।
  • जल जीवन मिशनःजलापूर्ति व सीवेज अवसंरचना का GIS मानचित्रण आदि।
  • नमामि गंगे: आधार मानचित्र और मॉडल तैयार करना।
  • बांध पुनरुद्धार और सुधार परियोजना (Dam Rehabilitation and Improvement Project DRIP): बांध स्थल के चयन तथा प्रगति की निगरानी के लिए सुदूर संवेदन एवं GIS तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है।
  • राष्ट्रीय नदी अंतर्योजन परियोजना (National River Linking Project-NRLP): मानसून तथा गैर-मानसून मौसम के दौरान नदियों की विशेषताओं को समझना।

भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी के बारे में

  • यह किसी लक्षित ऑब्जेक्ट को ट्रैक करने तथा उसे किसी विशिष्ट स्थान पर संदर्भित करने की अनुमति प्रदान करती है।
  • यह भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS), सुदूर संवेदन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IOT) आदि का उपयोग करके पृथ्वी की वास्तविक भौगोलिक जानकारी का अध्ययन करने में सहायता करती है।

स्रोत –द हिन्दू

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