असम में 18 एशियाई हाथियों (Asian Elephants)की अचानक मृत्यु

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असम में 18 एशियाई हाथियों की अचानक मृत्यु

असम में 18 एशियाई हाथियों (Asian Elephants)की अचानक मृत्यु

  • हाल ही में असम में 18 हाथियोंकी अचानक मृत्यु हो गई थी। हाथियों की मृत्यु का सही कारण पता लगाने के लिए असम सरकार ने इनकी फोरेंसिक जांच कराने का निर्णय लिया है।

पृष्ठभूमि

  • कुछ समय पहले असम राज्य के नौगांव जिले में कोठियाटोली वन क्षेत्र में 18 हाथी मृत पाये गए थे। प्रारंभ में इन हाथियों की मृत्यु के बारे में कहा गया कि इनकी मृत्यु करेंट लगने के कारण हुई है। लेकिन कुछ वन्यजीव विशेषज्ञों को इस बात पर संदेह होने लगा। उन्होंने अनुमान लगाया कि इतनी ज्यादा संख्या में हाथियों के मरने के का एक कारण इनको जहर देना भी हो सकता है, क्योंकि इससे पहले असम में जहर के कारण हाथियों की मौत देखी गई है।
  • इसी बात को देखते हुए असम राज्य की सरकार ने इन 18 हाथियों के मरने की फोरेंसिक जांच कराने का निर्णय लिया है।
  • गौरतलब है कि असम राज्य में अनियोजित विकास के चलते वन क्षेत्र कम होते जा रहे हैं, जिससे कई बार हाथी मानव अधिवासों की ओर आ जाते हैं। जिससे मानव-पशु संघर्ष बढ़ रहा है।

एशियाई हाथी (Asian Elephants)

  • यह एशियाई महाद्वीप के सबसे बड़े स्थलीय स्तनपायी हैं। इनका निवास स्थान भारत सहित दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के 13 देशों में फैले हुए सूखे जंगल और घास के मैदानों में हैं।
  • एशियाई हाथी को आईयूसीएन (IUCN) की रेड लिस्ट में एनडैनजर्ड (Endangered) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
  • एशियाई हाथी की तीन प्रजातियाँ हैं- भारतीय हाथी, सुमात्राई हाथी और श्रीलंकाई हाथी।

भारतीय हाथी (Indian elephant)

  • भारत सरकार ने हाथी को राष्ट्रीय धरोहर पशु घोषित किया है। भारतीय हाथी को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में सूचीबद्ध किया गया है। गुजरात के गांधीनगर में फरवरी 2020 में आयोजित हुए, प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर संधि (सीएमएस) के 13वें सम्मेलन (कॉप-13) में भारतीय हाथी को भी सीएमएस समझौते की अनुसूची-I में सूचीबद्ध किया गया है।

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972

  • इसे वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए 1972 में पारित किया था।इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य वन्य जीवों के अवैध शिकार, मांस और खाल के व्यापार पर रोक लगाना है।

अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) और इसकी लाल सूची(रेड लिस्ट) के बारे में

  • अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) की स्थापना वर्ष 1948 में की गई थी। यह विश्व की प्राकृतिक स्थिति को संरक्षित रखने के लिये एक वैश्विक प्राधिकरण है। इसका मुख्यालय स्विटज़रलैंड में स्थित है। आईयूसीएन सरकारों तथा नागरिक समाज दोनों से मिलकर बना एक संघ है।
  • आईयूसीएन का घोषित लक्ष्य, विश्व की सबसे विकट पर्यावरण और विकास संबंधी चुनौतियों के लिए व्यावहारिक समाधान खोजने में सहायता करना है।
  • आईयूसीएन विश्व के विभिन्न संरक्षण संगठनों के नेटवर्क से प्राप्त जानकारी के आधार पर प्राणियों की लाल सूची(रेड लिस्ट) प्रकाशित करता है, जो विश्व में सबसे अधिक संकटग्रस्त प्रजातियों को दर्शाती है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

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