अमेरिका का महासागरीय तल की खोज हेतु जहाज ‘ओकेनोस एक्सप्लोरर’

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अमेरिका का महासागरीय तल की खोज हेतु जहाज ‘ओकेनोस एक्सप्लोरर’

अमेरिका का महासागरीय तल की खोज हेतु जहाज ‘ओकेनोस एक्सप्लोरर’

  • हाल ही में अमेरिका ने महासागरीय तल की खोज करने के लिए एक खोजी जहाज ओकेनोस एक्सप्लोरर (Okeanos Explorer) तैयार किया है।
  • ओकेनोस एक्सप्लोरर जहाज को राष्ट्रीय समुद्री और वायुमंडलीय प्रशासन (एनओएए)(National Oceanic and Atmospheric Administration -NOAA) द्वारा निर्मित किया गया है। इसे 14 मई, 2021 को फ्लोरिडा के पोर्ट कैनावेरल से रवाना किया गया है।

ओकेनोस एक्सप्लोरर (Okeanos Explorer)

  • ओकेनोस एक्सप्लोरर अपनी समुद्रीय खोज के दौरान ‘हैडल ज़ोन’ के समुद्र तल के विशाल क्षेत्रों पर आधारित 3D मानचित्रों का निर्माण करेगा।
  • अमेरिका के इस खोजी जहाज ओकेनोस एक्सप्लोरर का यह अभियान दो सप्ताह तक चलेगा ।
  • इस जहाज के माध्यम से ऑर्फियस (Orpheus) नामक पानी के नीचे चलने वाला वाहन (autonomous under water vehicle) का एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन भी किया जायेगा।
  • ऑर्फियस रोबोट सबमर्सिबल रोबोट का एक नया रूप है । यह समुद्रीय तल की वैज्ञानिक विशेषताओं की पहचान करने में मदद करेगा।

ऑर्फियस (Orpheus)

  • अकसर, समुद्र के गहरे तल की खोज के लिए अत्यधिक शक्ति वाले उपकरण जैसे, सोनार की आवश्यकता होती है। ऐसे उपकरणों के विपरीत, ऑर्फ़ियस अत्याधुनिक सॉफ़्टवेयर के साथ-साथ कैमरों व प्रकाश का उपयोग करता है। इसका वजन लगभग 250 किलोग्राम है, जो गहरे समुद्र में पनडुब्बियों की तुलना में हल्का है ।
  • यह बहुत ही तेजी से काम करने वाला है । यह ऊबड़-खाबड़ सतह वाले क्षेत्र में आसानी से चलता है। इस तरह का वातावरण आमतौर पर गहरे समुद्र में चलने वाले अधिकांश वाहनों के लिए दुर्गम होता है।
  • ऑर्फियस को नासा की जेट प्रणोदन प्रयोगशाला (Jet Propulsion Laboratory-JPL), और वुड्स होल ओशनोग्राफिक इंस्टीट्यूशन (WHOI ) द्वारा डिजाइन किया गया था।
  • विदित हो कि, नासा की JPL ने ही ‘मार्स मिशन 2020’ के ‘परसेवरांस रोवर’ और ‘इन्जेन्यूटी हेलीकॉप्टर’ को भी डिजाइन किया है। WHOI HADEX कार्यक्रम का संचालन कर रहा है। HADEX का अर्थ हैडल एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम (Hadal Exploration Programme) है।

हैडलजोन (Hadal Zone)

  • हैडल ज़ोन (Hadal Zone) महासागर में समुद्री खाइयों के बीच स्थित सबसे गहरे क्षेत्र हैं, जिसकी गहराई आमतौर पर 6,000 मीटर से 11,000 मीटर तक होती है।
  • विदित हो कि, महासागरों के सबसे गहरे पाच जगहों का पता लगाने के लिए हाल ही में एक ‘फाइव डीप अभियान’ (Five Deeps Expedition) लांच किया गया था ।

स्रोत – द हिन्दू

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