सर्वोच्च न्यायालय का अनुराधा भसीन मामला

सर्वोच्च न्यायालय का अनुराधा भसीन मामला

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने अनुराधा भसीन मामले में निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुपालन का आदेश दिया है।

  • न्यायालय ने अनुराधा भसीन मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों को लागू करने के लिए सरकार को एक नोटिस जारी किया है।
  • अनुराधा भसीन मामले( 2020 ) में, संविधान के अनुच्छेद-370 को निरस्त करने के समय जम्मू–कश्मीर राज्य में मोबाइल, लैंडलाइन और इंटरनेट सेवाओं के निलंबन के साथ-साथ कुछ क्षेत्रों में आवाजाही पर प्रतिबंध को चुनौती दी गई थी।

अनुराधा भसीन मामले में प्रस्तावित प्रमुख दिशा-निर्देश:

  • दूरसंचार सेवा अस्थायी निलंबन (लोक आपात और लोक सुरक्षा) नियम, 2017 के तहत इंटरनेट सेवाओं को अनिश्चित काल के लिए निलंबित करने का आदेश अनुचित है।
  • निलंबन का उपयोग केवल अस्थायी अवधि के लिए ही किया जा सकता है।
  • निलंबन नियमों के तहत जारी किए गए इंटरनेट को निलंबित करने वाले किसी भी आदेश को ‘आनुपातिकता के सिद्धांत’ का पालन करना चाहिए। साथ ही, इस निलंबन को आवश्यक अवधि से आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए ।
  • निलंबन नियमों के तहत इंटरनेट को निलंबित करने का कोई भी आदेश न्यायिक समीक्षा के अधीन है।
  • इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने यह भी कहा कि इंटरनेट के माध्यम से वाक् व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यापार एवं वाणिज्य की स्वतंत्रता क्रमशः अनुच्छेद 19 (1) (A) तथा अनुच्छेद 19 (1) (G) के तहत संवैधानिक रूप से संरक्षित अधिकार हैं ।

भारत में इंटरनेट शटडाउन से संबंधित प्रावधान

  • वर्तमान में, दूरसंचार सेवाओं का निलंबन ( इंटरनेट शटडाउन सहित ) दूरसंचार सेवा अस्थायी निलंबन (लोक आपात और लोक सुरक्षा) नियम, 2017 द्वारा शासित होता है। इन नियमों को भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 के तहत अधिसूचित किया गया है।
  • 2017 के नियम लोक आपातकाल के आधार पर किसी क्षेत्र में दूरसंचार सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद करने का प्रावधान करते हैं। इसमें दूरसंचार सेवाओं को एक बार में केवल 15 दिनों तक ही बंद किया जा सकता है।

स्रोत – लाइव लॉ

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