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अंबेडकर जयंती पर मनाया गया “समानता दिवस”

अंबेडकर जयंती पर मनाया गया “समानता दिवस”

14 अप्रैल को डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की 130वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

विदित हो कि इस दिन को अंबेडकर स्मरण दिवस भी कहा जाता है एवं वर्ष 2015 से, 14 अप्रैल को भारत में आधिकारिक सार्वजनिक अवकाश की भी घोषणा की गई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए उनका संघर्ष एक मिसाल बना रहेगा एवं उनके जीवन से हमें शिक्षा और आदर्श ग्रहण करना चाहिए।

भीमराव अंबेडकर

  • अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल, 1891 में मध्य प्रांत (वर्तमान मध्यप्रदेश) के महू नामक तहसील में हुआ था। उनका पूरा नाम भीमराव रामजी अंबेडकर था।
  • इनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल था जो ब्रिटिश सेना में सूबेदार थे और इनकी माता भीमाबाई सकपाल एक गृहिणी थी।
  • अस्पृश्यता के विषय का अम्बेडकर के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा, क्योंकि वे उस समय अछूत माने जाने वाले एक महार जाति में पैदा हुए थे।
  • अम्बेडकर साहब ने जीवन भर लोगों के बीच समता लाने के लिए संघर्ष किया इसी वजह से,उनके जन्मदिन को “समानता दिवस” ​​केरूपमेंभीमनायाजाताहै।
  • डा. अंबेडकर जीवन भर दलितों व शोषितों के अधिकारों की लड़ाई लड़ते रहे,6 दिसंबर, 1956 को दिल्ली में बाबासाहेब भीमराव रामजी अंबेडकर ने अंतिम सांस ली।
  • भारत ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में उनके जन्मदिन को अंतर्राष्ट्रीय समानता दिवस के रूप में मनाये जाने की भी मांग रखी है।ज्ञात हो संयुक्त राष्ट्र ने 2016, 2017 और 2018 में लगातार तीन साल अंबेडकर जयंती मनाई।

अंबेडकर से सम्बंधित महत्त्वपूर्ण तथ्य

  • भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंबेडकर ने 1920 में “मूकनायक” (साप्ताहिक) एवं 1927 में बहिष्कृत भारत (मासिक) पत्र का प्रकाशन किया।
  • अंबेडकर ने अगस्त 1936 में दलित वर्ग, मजदूर एवं किसानों की समस्याओं से समाधान हेतु एक “इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी” की स्थापना की थी। जिसका नाम बदलकर वर्ष 1942 में अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ कर दिया गया था
  • डॉ अम्बेडर ने 1930-32 के बीच हुए तीनो गोलमेज सम्मेलनों में भाग लिया | ये सम्मलेन मई 1930 में साइमन आयोग द्वारा प्रस्तुत की गयी रिपोर्ट के आधार पर संचालित किये गए थे।
  • पुणे की यरवदा जेल में 24 सितम्बर, 1932 को भीमराव आम्बेडकर एवं महात्मा गांधी के मध्य एक ऐतिहासिक समझौता हुआ था जिसे पूना पैक्ट या पूना समझौता कहा जाता है | समझौते के तहत उस समय दलित वर्ग के लिए की जा रही पृथक निर्वाचक मंडल की मांग को त्याग दिया गया था लेकिन दलित वर्ग के लिए आरक्षित सीटों की संख्या प्रांतीय विधानमंडलों में 71 से बढ़ाकर 147 और केन्द्रीय विधायिका में कुल सीटों की 18% कर दीं गयीं थीं ।
  • भारत की आजादी के पश्चात स्वतंत्र भारत के केन्द्रीय मंत्रिमंडल में अंबेडकर प्रथम विधि मंत्री नियुक्त किये गये। 5 फरवरी, 1951 को संसद में अंबेडकर ने “हिन्दू कोड बिल” पेश किया जिसके असफल हो जाने पर मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया।
  • अंबेडकर ने कहा था “छुआछूत गुलामी से भी बदतर है।“ उन्होंने अपनी आत्मकथा, वेटिंग फॉर अ वीजा में अपने साथ हुए छुआछूत और भेदभाव को वर्णित किया है।
  • हिन्दू धर्म में व्याप्त कुरूतियों और छुआछूत की प्रथा से तंग आकार सन 1955 में उन्होंने ‘भारतीय बौद्ध धर्म सभा’ कि स्थापना कर बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया। इनका प्रसिद्ध कथन था कि “मैं हिन्दू धर्म में पैदा हुआ हूँ लेकिन मैं मरूँगा बौद्ध धर्म में”।
  • अंबेडकर साहब की भारतीय संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यह संविधान सभा की मसौदा समिति (ड्राफ्टिंग कमेटी) के अध्यक्ष थे।1990 में, अंबेडकर को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
  • 14 अप्रैल, 1990 और 14 अप्रैल, 1991 के बीच की अवधि को “सामाजिक न्याय का वर्ष” के रूप में मनाया गया।
  • 2020 में, कनाडा ने और 2021 में, ब्रिटिश कोलंबिया सरकार ने अंबेडकर के जन्मदिन को डॉ. बी.आर. अंबेडकर डे ऑफ इक्वैलिटी के रूप में मनाने का फैसला किया।

स्रोत – पीआईबी

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