अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष (IYM)

अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष (IYM)

  • हाल ही में भारत के प्रधान मंत्री ने रोम (इटली) में खाद्य और कृषि संगठन (FAO) मुख्यालय में अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष (IYM) के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया है ।
  • प्रधान मंत्री ने प्ल्ड के लॉन्च के लिए संयुक्त राष्ट्र FAO को बधाई दी। उन्होंने मिलेट्स को भविष्य के लिए पसंदीदा भोजन बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
  • वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष घोषित करने के भारत के प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2021 में स्वीकार किया था ।
  • अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष 2023, खाद्य सुरक्षा और पोषण में मिलेट्स के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाएगा।
  • मिलेट्स (मोटा अनाज) को लोकप्रिय रूप से पोषक अनाज के रूप में जाना जाता है। यह छोटे दाने वाले अनाजों (पोएसी कुल) का एक विविध समूह है।
  • इनमें ज्वार, बाजरा, रागी आदि शामिल हैं। यह भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की देशी प्रजातियां हैं।
  • ये सूक्ष्म पोषक तत्वों के समृद्ध स्रोत हैं। इनमें 7-12% प्रोटीन, 2-5% वसा, 65-75% कार्बोहाइड्रेट्स और 15-20% डायटरी फाइबर होते हैं।
  • हरित क्रांति के आगमन के साथ मिलेट्स केवल चारे की फसल बन कर रह गए थे। उल्लेखनीय है कि हरित क्रांति में गेहूं और चावल की फसलों पर सर्वाधिक बल दिया गया था ।
  • हालांकि, भारत अभी भी विश्व का 20% मिलेट्स उत्पादित करता है।

मिलेट्स को बढ़ावा देने के लिए की गई पहलें

  • वर्ष 2018 में राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष मनाया गया था ।
  • मिलेट्स की खेती करने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि की गई है।
  • सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 0 के तहत मध्याह्न भोजन योजना में सप्ताह में कम-से-कम एक बार मिलेट्स की आपूर्ति को अनिवार्य किया गया है।

मिलेट्स के लाभ

  • उपभोक्ताओं के लिए: ग्लूटेन मुक्त (सेलिएक रोगियों के लिए फायदेमंद)होते हैं,

टाइप 2 मधुमेह, गैस्ट्रिक अल्सर या कोलन कैंसर से बचाते हैं,

प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थ हैं, कब्ज और गैस जैसी समस्याओं को दूर करते हैं, एनीमिया, यकृत के विकार तथा अस्थमा के प्रभाव को कम करते हैं आदि ।

  • किसानों के लिए: ये चरम मौसम को सहने में सक्षम हैं, अतः इसकी खेती कम जोखिमपूर्ण होती है,

उर्वरक एवं कीटनाशक जैसे आगतों की कम आवश्यकता होती है,

  • पारितंत्र के लिए: संधारणीय उपभोग एवं उत्पादन को बढ़ावा देते हैं,जलवायु संबंधी कार्यवाहियों में सहायता करते हैं,
  • अंतर- फसल एवं मिश्रित फसल के रूप में भी उगाए जा सकते हैं आदि ।
  • भुखमरी को समाप्त करने के प्रयासों में सहयोग करते हैं,
  • अच्छे स्वास्थ्य एवं कल्याण को प्रोत्साहित करते हैं इत्यादि ।

स्रोत – द हिन्दू

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