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अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान  की “वैश्विक खाद्य नीति रिपोर्ट- 2021”प्रकाशित

अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान  की “वैश्विक खाद्य नीति रिपोर्ट- 2021”प्रकाशित

हाल ही में , अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान नेवैश्विक खाद्य नीति रिपोर्ट- 2021प्रकाशित किया है। इस वर्ष “Transforming Food Systems After COVID-19” थीम पर रिपोर्ट का प्रकाशन किया गया है।

इस रिपोर्ट में दुनिया भर के निम्न और माध्यम आय वाले देशों के संकटग्रस्त समूहों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया गया है, साथ ही नीतिगत प्रतिक्रियाओं और उनके प्रभावों का विश्लेषण किया गया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि COVID- 19 के कारण आजीविका, खाद्य सुरक्षा और पोषण कैसे प्रभावित हुए हैं; इसका प्रभाव कैसे और क्यों विभिन्न क्षेत्रों और देशों में अलग-अलग हैं; तथा अब हमारी खाद्य प्रणालियों और खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं को आने वाले वर्षों में इस तरह के झटकों को बेहतर तरीके से सहन करने की आवश्यकता है।

भारत के सम्बन्ध में मुख्य तथ्य:

  • COVID-19 लॉकडाउन के कारण, विद्यालय एवं डे केयर सेंटर का संचालन बंद था, जिसके कारण पौष्टिक खाद्य उत्पादों की उपलब्धता गंभीर रूप से प्रभावित हुई ।लोगों में महंगे पौष्टिक खाद्य पदार्थ जैसे फलों और सब्जियों आदि के स्थान पर कम मूल्य के खाद्य पदार्थों का उपयोग शुरू हुआ।
  • मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम जिसमे भारत के लगभग 80% प्राथमिक स्कूली बच्चे शामिल हैं, COVID-19 लॉकडाउन के कारण प्रतिकूल रूप में प्रभावित हुआ।
  • रिपोर्ट के अनुसार भारत की तीव्र नीतिगत कार्रवाइयाँ और राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय संस्थानों में प्रभावी समन्वय ने स्वास्थ्य और पोषण कार्यक्रमों को शुरुआती झटकों से सुरक्षा प्रदान किया ।यह सफलता सामाजिक-सुरक्षा योजनओं में भारत के दशकों के निवेश को दर्शाती है।
  • जहां ई-फूड सेवाओं में साल-दर-साल 66.7 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, वहीं सुलभ दुकानों के कारोबार में 9.8 प्रतिशत की गिरावट आयी। एकल इकाई किराने की दुकानों में पिछले वर्ष की तुलना में 1.3 प्रतिशत की मामूली वृद्धि देखी गई ।

अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान:

  • अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान एक अंतर्राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र है जिसकी स्थापना 1970 के दशक में राष्ट्रीय कृषि और खाद्य नीतियों की समझ को बेहतर बनाने के लिए की गई थी जिससे कृषि प्रौद्योगिकी में नवाचारों को अपनाया जा सके।
  • IFPRI का लक्ष्य किसी देश के व्यापक विकास पथ में कृषि और ग्रामीण विकास की भूमिका पर अधिक प्रकाश डालना था साथ ही इसका मिशन अनुसंधान-आधारित नीति समाधान प्रदान करना है, जो गरीबी और अंत में भूख और कुपोषण को कम कर सके।
  • IFPRI को कोलंबिया के एक गैर-लाभकारी निगम के रूप में 1975 में बनाया गया था ।

स्त्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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